Post by : Himachal Bureau
हिमाचल प्रदेश में पिछले कुछ दिनों से कमजोर पड़ा मानसून अब एक बार फिर रफ्तार पकड़ने जा रहा है। मौसम के साफ रहने से जहां मैदानी क्षेत्रों के साथ-साथ पहाड़ी इलाकों में भी उमस और गर्मी ने लोगों को परेशान किया, वहीं अब मौसम विभाग ने आने वाले दिनों के लिए भारी बारिश की चेतावनी जारी की है। प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में 18 जुलाई से मौसम का मिजाज बदलने की संभावना जताई गई है। इसके साथ ही 19 जुलाई से 23 जुलाई तक कई जिलों के लिए ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है। विशेषज्ञों का कहना है कि इस दौरान कई स्थानों पर तेज से बहुत तेज बारिश दर्ज की जा सकती है, जिससे जनजीवन प्रभावित होने की आशंका बनी हुई है। मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार बीते 24 घंटों के दौरान प्रदेश में मानसून की गतिविधियां काफी कमजोर रहीं, जिसके कारण दिन के तापमान में उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई। अधिकतम तापमान सामान्य से करीब 2 डिग्री सेल्सियस से अधिक पहुंच गया, जिससे लोगों को उमस भरी गर्मी का सामना करना पड़ा। हालांकि अब बंगाल की खाड़ी और अरब सागर से आने वाली नमी के कारण मानसून फिर से सक्रिय होने की संभावना है।
मौसम विभाग का अनुमान है कि 18 जुलाई से बारिश का दौर शुरू होगा, जबकि 20 से 22 जुलाई के बीच इसका प्रभाव सबसे अधिक देखने को मिल सकता है। 18 जुलाई को कुछ जिलों में येलो अलर्ट रहेगा, जबकि 19 जुलाई से लगातार कई दिनों तक ऑरेंज अलर्ट प्रभावी रहेगा। इस दौरान विशेष रूप से चंबा, मंडी, कुल्लू, कांगड़ा और शिमला जिलों में कहीं-कहीं भारी से बहुत भारी वर्षा होने की संभावना है। सिरमौर, हमीरपुर, बिलासपुर, ऊना, सोलन और किन्नौर जैसे जिलों में भी अच्छी बारिश होने का अनुमान है। ऊंचाई वाले क्षेत्रों, विशेषकर लाहौल-स्पीति के कुछ इलाकों में हल्की बर्फबारी अथवा बारिश भी देखने को मिल सकती है। लगातार होने वाली वर्षा के कारण पहाड़ी ढलानों पर मिट्टी खिसकने और छोटे नालों में जलस्तर बढ़ने की आशंका व्यक्त की गई है।
मौसम विशेषज्ञों ने लोगों से अनावश्यक यात्रा से बचने की अपील की है। विशेषकर पर्वतीय क्षेत्रों में जाने वाले पर्यटकों और स्थानीय लोगों को मौसम की ताजा जानकारी लेकर ही यात्रा करने की सलाह दी गई है। लगातार बारिश के कारण पहाड़ी क्षेत्रों में चट्टानें गिरने, पेड़ उखड़ने और जलभराव जैसी परिस्थितियां बन सकती हैं। प्रशासन ने भी सभी संबंधित विभागों को अलर्ट मोड पर रहने के निर्देश दिए हैं ताकि किसी भी आपात स्थिति में तुरंत राहत एवं बचाव कार्य शुरू किया जा सके।इसके अलावा नदी-नालों के किनारे रहने वाले लोगों को अतिरिक्त सतर्कता बरतने की सलाह दी गई है। यदि लगातार वर्षा होती है तो कई स्थानों पर जलस्तर तेजी से बढ़ सकता है। ऐसे में लोगों से सुरक्षित स्थानों पर रहने और प्रशासन की ओर से जारी दिशा-निर्देशों का पालन करने का आग्रह किया गया है।
प्रदेश सरकार और जिला प्रशासन ने संभावित भारी बारिश को देखते हुए सभी विभागों को सतर्क रहने के निर्देश दिए हैं। आपदा प्रबंधन से जुड़े अधिकारियों को चौबीसों घंटे निगरानी रखने के लिए कहा गया है। बिजली, लोक निर्माण, जल शक्ति और स्वास्थ्य विभाग की टीमें भी संभावित आपात स्थितियों से निपटने के लिए तैयार रखी गई हैं।मौसम विभाग का मानना है कि लगातार कई दिनों तक वर्षा होने से पहाड़ी इलाकों में भूस्खलन और सड़क बाधित होने जैसी घटनाएं बढ़ सकती हैं। ऐसे में संवेदनशील क्षेत्रों पर विशेष निगरानी रखी जा रही है ताकि किसी भी प्रकार की जनहानि को रोका जा सके।
हाल ही में हुई बारिश के बाद प्रभावित हुई आवश्यक सेवाओं को सामान्य बनाने का कार्य तेजी से जारी है। प्रशासन के प्रयासों से अधिकांश बिजली आपूर्ति बहाल कर दी गई है। पहले जहां कई क्षेत्रों में ट्रांसफार्मर बंद होने के कारण लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा था, वहीं अब अधिकांश स्थानों पर बिजली व्यवस्था सामान्य हो चुकी है। पेयजल योजनाओं को भी पूरी तरह बहाल कर दिया गया है। हालांकि सड़क संपर्क अभी भी बड़ी चुनौती बना हुआ है। कई ग्रामीण और पहाड़ी मार्ग अब भी बंद पड़े हैं, जिससे लोगों की आवाजाही प्रभावित हो रही है। लोक निर्माण विभाग लगातार मशीनों की मदद से मलबा हटाने और मार्गों को दोबारा खोलने का कार्य कर रहा है। अधिकारियों का कहना है कि मौसम अनुकूल रहने पर बंद सड़कों को जल्द बहाल करने का प्रयास किया जाएगा।
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विशेषज्ञों का मानना है कि आगामी पांच दिन हिमाचल प्रदेश के लिए मौसम के लिहाज से काफी महत्वपूर्ण रहेंगे। लगातार सक्रिय रहने वाले मानसून के कारण कई जिलों में सामान्य जनजीवन प्रभावित हो सकता है। ऐसे में लोगों को मौसम संबंधी आधिकारिक सूचनाओं पर नजर रखने, अनावश्यक जोखिम से बचने और प्रशासन द्वारा जारी एडवाइजरी का पालन करने की सलाह दी गई है। यदि अनुमान के अनुसार वर्षा होती है तो प्रदेश के कई हिस्सों में जलभराव, भूस्खलन और यातायात बाधित होने जैसी परिस्थितियां दोबारा देखने को मिल सकती हैं। इसलिए आने वाले दिनों में सतर्कता ही सबसे बड़ा बचाव मानी जा रही है।
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