गोबिंदसागर झील में डूबा ऐतिहासिक कहलूर मंदिर फिर उभरने लगा
गोबिंदसागर झील में डूबा ऐतिहासिक कहलूर मंदिर फिर उभरने लगा

Post by : Himachal Bureau

Jan. 10, 2026 4:26 p.m. 864

9 अगस्त, 1961 को भाखड़ा बांध का जलस्तर बढ़ने से बिलासपुर का पुराना शहर डूब गया था। इस घटना के साथ ही कहलूर रियासत के कई ऐतिहासिक स्थल पानी में समा गए थे। इसमें रंगमहल, नया महल, पुराने महल, शिखर शैली के 99 मंदिर, स्कूल, कॉलेज, गुरुथान और कचहरी परिसर शामिल थे। अब गोबिंदसागर झील का जलस्तर कम होने से यह ऐतिहासिक मंदिर एक बार फिर उभरने लगे हैं।

धीरे-धीरे पानी कम होने के कारण मंदिरों के गुंबद पानी की सतह पर तैरते हुए दिखाई देने लगे हैं। करीब चार माह पहले ये मंदिर जलमग्न हो गए थे, लेकिन अब जलस्तर कम होने के कारण धीरे-धीरे बाहर आ रहे हैं। कई मंदिर सिल्ट के नीचे दबे हुए हैं, लेकिन कुछ मंदिर हर साल गोबिंदसागर झील में कुछ महीनों के लिए जलमग्न होते हैं और फिर बाहर आते हैं। फरवरी तक यह मंदिर पूरी तरह दिखाई देने लगेंगे।

मुख्य मंदिरों में रंगनाथ मंदिर, खनेश्वर, नारदेश्वर, गोपाल मंदिर, मुरली मनोहर मंदिर, बाह का ठाकुरद्वारा, ककड़ी का ठाकुरद्वारा, नालू का ठाकुरद्वारा और खनमुखेश्वर मंदिर शामिल हैं। ये हर वर्ष झील के जलस्तर बढ़ने पर डूब जाते हैं और पानी उतरते ही फिर उभर आते हैं।

स्थानीय युवाओं महेश, मनोज, अनूप, अजय शर्मा, गौरव और वरुण का कहना है कि वे बचपन से इस प्रक्रिया को लगातार देखते आए हैं। मंदिर जुलाई माह के बाद जलमग्न होना शुरू हो जाते हैं और जैसे ही बाहर आते हैं, स्थानीय लोग और अन्य जिलों व राज्यों के लोग यहां घूमने और पिकनिक का आनंद लेने आने लगते हैं। यह नजारा पर्यटकों और इतिहास प्रेमियों के लिए आकर्षण का केंद्र बनता है।

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