हिमाचल में पहली बार कटा हाथ जुड़ा, एम्स बिलासपुर ने रचा इतिहास
हिमाचल में पहली बार कटा हाथ जुड़ा, एम्स बिलासपुर ने रचा इतिहास

Post by : Himachal Bureau

Aug. 11, 2026 1:22 p.m. 116

हिमाचल प्रदेश के स्वास्थ्य क्षेत्र में एम्स बिलासपुर के चिकित्सकों ने एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है। संस्थान के प्लास्टिक सर्जरी विभाग की विशेषज्ञ टीम ने गंभीर रूप से घायल एक व्यक्ति के लगभग पूरी तरह अलग हो चुके हाथ को जटिल सूक्ष्म शल्य प्रक्रिया के माध्यम से सफलतापूर्वक जोड़ दिया। करीब सात घंटे तक चली इस सर्जरी के बाद हाथ में रक्त का प्रवाह दोबारा स्थापित करने में चिकित्सकों को सफलता मिली। यह उपलब्धि AIIMS Bilaspur Surgery के लिहाज से महत्वपूर्ण मानी जा रही है। चिकित्सकों के अनुसार, एम्स बिलासपुर में इस स्तर की पुनर्निर्माण सर्जरी पहली बार की गई है। इस सफल उपचार से प्रदेश में गंभीर चोटों के उपचार की आधुनिक सुविधाओं को भी नई मजबूती मिलने की उम्मीद है।

खेत में काम करते समय हुआ गंभीर हादसा

जानकारी के अनुसार, कुल्लू जिले का रहने वाला व्यक्ति खेत में काम कर रहा था। इसी दौरान तेजधार कृषि उपकरण की चपेट में आने से उसका हाथ गंभीर रूप से कट गया और लगभग शरीर से अलग हो गया। हादसे के बाद अत्यधिक रक्तस्राव होने के कारण उसकी स्थिति चिंताजनक हो गई। परिजन और स्थानीय लोग घायल व्यक्ति को तत्काल अस्पताल लेकर पहुंचे। प्रारंभिक उपचार के बाद उसकी गंभीर स्थिति को देखते हुए उसे बेहतर उपचार के लिए एम्स बिलासपुर भेजा गया। Himachal Health News के अनुसार, मरीज के अस्पताल पहुंचते ही चिकित्सकों ने बिना समय गंवाए आवश्यक जांच और उपचार की प्रक्रिया शुरू कर दी।

सात घंटे तक चली बेहद जटिल सर्जरी

एम्स बिलासपुर पहुंचने के बाद चिकित्सकों ने सबसे पहले मरीज की हालत को स्थिर किया। इसके बाद विशेषज्ञों की टीम ने आपातकालीन सर्जरी का निर्णय लिया। Microsurgery की मदद से हाथ की क्षतिग्रस्त रक्तवाहिकाओं, नसों और टेंडन की बारीकी से मरम्मत की गई। सर्जरी के दौरान हड्डियों को भी सही स्थिति में लाकर जोड़ा गया। चिकित्सकों का मुख्य उद्देश्य हाथ में रक्त संचार दोबारा स्थापित करने के साथ उसकी कार्यक्षमता को बचाना था। करीब सात घंटे तक चली प्रक्रिया के दौरान अलग-अलग विशेषज्ञों ने मिलकर उपचार को आगे बढ़ाया।

विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम ने संभाला मोर्चा

इस जटिल ऑपरेशन का नेतृत्व प्लास्टिक सर्जरी विभाग के डॉ. नवनीत शर्मा ने किया। उनके साथ डॉ. विनीत, डॉ. शिवानी, डॉ. हरलीन और डॉ. ऐश्वर्या ने सर्जिकल टीम में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। वहीं, बेहोशी और ऑपरेशन के दौरान मरीज की स्थिति पर लगातार निगरानी रखने की जिम्मेदारी डॉ. मार्कंडेय प्रसाद, डॉ. सचिन और कनिष्ठ चिकित्सक डॉ. हिमांशु की टीम ने संभाली। Hand Replantation Surgery जैसी जटिल प्रक्रिया में कई विशेषज्ञ विभागों के बीच बेहतर समन्वय बेहद जरूरी होता है।

एम्स बिलासपुर में पहली बार हुई ऐसी प्रक्रिया

डॉ. नवनीत शर्मा ने बताया कि एम्स बिलासपुर में इस स्तर की सर्जरी पहली बार सफलतापूर्वक की गई है। इस उपलब्धि को AIIMS Bilaspur के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। चिकित्सकों ने लोगों को यह भी समझाया कि किसी दुर्घटना में शरीर का कोई अंग कट जाने पर घबराने के बजाय उसे सुरक्षित तरीके से संभालना बेहद जरूरी है। कटे हुए अंग को साफ कपड़े में सुरक्षित रखकर मरीज के साथ जल्द से जल्द ऐसे अस्पताल पहुंचाना चाहिए, जहां इस तरह की विशेषज्ञ चिकित्सा उपलब्ध हो।

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समय पर अस्पताल पहुंचना बेहद जरूरी

Plastic Surgery विशेषज्ञों के अनुसार, ऐसे मामलों में उपचार की सफलता काफी हद तक इस बात पर निर्भर करती है कि घायल व्यक्ति और कटे हुए अंग को कितनी जल्दी अस्पताल पहुंचाया जाता है। देरी होने पर अंग को दोबारा जोड़ने की संभावना प्रभावित हो सकती है। एम्स बिलासपुर की इस उपलब्धि को Bilaspur Medical News के लिहाज से भी अहम माना जा रहा है। इस सर्जरी ने यह दिखाया है कि प्रदेश में अब गंभीर चोटों और जटिल पुनर्निर्माण उपचार के लिए आधुनिक चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध हो रही हैं।

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