Post by : Khushi Joshi
मास्को से भारत-रूस रक्षा साझेदारी से जुड़े संबंधों में बड़ा कदम आगे बढ़ाते हुए रूसी संसद के निचले सदन ‘स्टेट ड्यूमा’ ने दोनों देशों के बीच हुए लॉजिस्टिक सपोर्ट समझौते को मंजूरी दे दी है। यह फैसला ऐसे समय में आया है जब रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन भारत की अहम यात्रा पर आने वाले हैं। मंजूरी मिलने के बाद अब दोनों देशों की सेनाएं एक-दूसरे के सैन्य ठिकानों, संसाधनों और विभिन्न लॉजिस्टिक सेवाओं का उपयोग कर सकेंगी।
इस समझौते को आधिकारिक तौर पर आरईएलओएस (Reciprocal Exchange of Logistic Support) नाम दिया गया है। इसकी मदद से भारतीय और रूसी नेवी के युद्धपोत ईंधन भर सकेंगे, एयरक्राफ्ट को ज़रूरी सप्लाई मिल सकेगी और फौजी मिशनों के दौरान किसी भी साझेदार बेस पर रुककर ऑपरेशनल सपोर्ट लिया जा सकेगा। खर्च भी दोनों देश बराबर-बराबर वहन करेंगे। यह समझौता 18 फरवरी 2025 को हस्ताक्षरित हुआ था और पिछले सप्ताह रूस के प्रधानमंत्री मिखाइल मिशुस्तिन इसे संसद में मंजूरी के लिए लेकर आए थे।
रक्षा विशेषज्ञ मानते हैं कि यह कदम भारत-रूस सैन्य सहयोग को एक नई ऊंचाई देगा। भारतीय सेनाओं को रूस के मध्य एशियाई इलाके में मौजूद सैन्य ठिकानों तक पहुंच मिलना अब आसान हो जाएगा। इससे ऐसे रणनीतिक क्षेत्रों की निगरानी संभव होगी, जहां चीन की मौजूदगी लगातार बढ़ रही है। अक्सु, कासगर और यिनिंग जैसे संवेदनशील इलाकों में चीन बड़ी मात्रा में तेल, हथियार और सैन्य सामग्री तैयार करता है।
भारत पहले ही इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में चीन की घेरेबंदी की कोशिशों का सामना कर रहा है, जिसमें पाकिस्तान, श्रीलंका, बांग्लादेश, नेपाल और म्यांमार में उसकी मौजूदगी शामिल है। ऐसे में आरईएलओएस भारत की रणनीतिक पहुंच को मजबूत करेंगे और सीपीईसी (चीन-पाकिस्तान आर्थिक कॉरिडोर) तथा String of Pearls जैसी योजनाओं पर अधिक निगरानी रखी जा सकेगी।
पुतिन की आगामी भारत यात्रा के मद्देनज़र इसे एक महत्वपूर्ण डिप्लोमैटिक संकेत भी माना जा रहा है। दोनों देशों की सरकारों का मानना है कि यह साझेदारी सुरक्षा सहयोग को नए दौर में लेकर जाएगी और चुनौतियों से भरे मौजूदा वैश्विक माहौल में एक-दूसरे के हितों की रक्षा के लिए सशक्त ढाल का काम करेगी।
भारत और रूस दशकों से रक्षा क्षेत्र में करीबी साझेदार रहे हैं और इस समझौते ने उस संबंध को और गहरा कर दिया है। आगे चलकर संयुक्त अभ्यास, युद्धपोतों के मिशन और आपात स्थितियों में सहायता जैसे क्षेत्रों में भी सहयोग और तेज़ी से बढ़ने की उम्मीद है।
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