Author : Rajneesh Kapil Hamirpur
सोलन स्थित डॉ. यशवंत सिंह परमार औद्यानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय नौणी में प्रशासनिक और शोध गतिविधियों को और मजबूत करने के लिए दो वरिष्ठ वैज्ञानिकों को नई जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं। विश्वविद्यालय प्रशासन ने विस्तार शिक्षा निदेशालय और अनुसंधान निदेशालय में नए संयुक्त निदेशकों की नियुक्ति कर संस्थान की शोध और प्रशिक्षण गतिविधियों को नई दिशा देने की पहल की है। इस फैसले के बाद विश्वविद्यालय से जुड़े शिक्षकों, वैज्ञानिकों और छात्रों में उत्साह का माहौल देखा जा रहा है।
विश्वविद्यालय प्रबंधन ने डॉ. परमिंदर कौर बवेजा को विस्तार शिक्षा निदेशालय में संयुक्त निदेशक (प्रशिक्षण एवं संचार) नियुक्त किया है। डॉ. बवेजा लंबे समय से कृषि और जलवायु परिवर्तन से जुड़े विषयों पर काम कर रही हैं। उन्होंने किसानों तक आधुनिक खेती की तकनीक पहुंचाने और मौसम आधारित खेती को बढ़ावा देने में अहम भूमिका निभाई है। उनके पास शिक्षण, अनुसंधान और किसान प्रशिक्षण का करीब 28 वर्षों का अनुभव है।
डॉ. बवेजा ने वर्ष 1998 में विश्वविद्यालय में अपनी सेवाएं शुरू की थीं। इसके बाद उन्होंने जलवायु परिवर्तन, कृषि मौसम विज्ञान और पहाड़ी क्षेत्रों की खेती से जुड़े कई महत्वपूर्ण कार्य किए। उनकी ओर से तैयार की गई मौसम आधारित कृषि सलाह सेवाओं का लाभ हजारों किसान उठा चुके हैं। बताया जा रहा है कि मोबाइल संदेशों और आधुनिक तकनीकों के माध्यम से लाखों किसानों तक खेती से जुड़ी जरूरी जानकारी पहुंचाई गई।
वर्तमान समय में डॉ. परमिंदर एक महत्वपूर्ण परियोजना का नेतृत्व भी कर रही हैं, जिसके तहत डिजिटल तकनीक और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की मदद से किसानों के लिए मौसम संबंधी सलाह देने वाला मोबाइल एप तैयार किया जा रहा है। इससे पहाड़ी क्षेत्रों के किसानों को खेती संबंधी फैसले लेने में काफी मदद मिलेगी। उन्होंने कई शोध पत्र प्रकाशित किए हैं और अनेक पुस्तकों तथा प्रशिक्षण सामग्री का लेखन भी किया है।
इसके अलावा विश्वविद्यालय ने वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. प्रदीप कुमार को अनुसंधान निदेशालय में संयुक्त निदेशक अनुसंधान (वानिकी) नियुक्त किया है। डॉ. प्रदीप कुमार को वन प्रबंधन, मिट्टी संरक्षण और बागवानी अनुसंधान के क्षेत्र में करीब दो दशक का अनुभव है। उन्होंने वनों में कार्बन भंडारण क्षमता बढ़ाने और मिट्टी की गुणवत्ता सुधारने को लेकर कई महत्वपूर्ण शोध किए हैं।
डॉ. प्रदीप कुमार ने सेब और खुबानी जैसी फसलों में ड्रिप सिंचाई और उर्वरक प्रबंधन पर भी व्यापक कार्य किया है। उनके शोध कार्यों से किसानों को कम पानी में बेहतर उत्पादन प्राप्त करने में मदद मिली है। इसके अलावा उन्होंने जल संरक्षण तकनीकों और बागों के पुनरोपण से जुड़े कई प्रयोग भी सफलतापूर्वक किए हैं। विश्वविद्यालय प्रशासन का मानना है कि इन दोनों वैज्ञानिकों की नियुक्ति से शोध, प्रशिक्षण और किसानों तक नई तकनीक पहुंचाने के कार्यों को और मजबूती मिलेगी। आने वाले समय में विश्वविद्यालय कृषि, बागवानी और जलवायु परिवर्तन से जुड़े क्षेत्रों में और बेहतर कार्य कर सकेगा।
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