Post by : Himachal Bureau
हिमाचल प्रदेश सरकार ने नशे के खिलाफ अपनी मुहिम को और मजबूत करते हुए शिमला के समीप मशोबरा में महिलाओं के लिए विशेष नशा मुक्ति एवं पुनर्वास केंद्र की शुरुआत की है। इस केंद्र का उद्देश्य नशे की गिरफ्त में आई महिलाओं को नया जीवन प्रदान करना और उन्हें सम्मान के साथ समाज की मुख्यधारा में वापस लाना है। इस अवसर पर मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने कहा कि प्रदेश में बढ़ती नशे की समस्या केवल कानून व्यवस्था का मुद्दा नहीं है, बल्कि यह समाज, परिवार और आने वाली पीढ़ियों के भविष्य से जुड़ा गंभीर विषय है। नशा मुक्ति केंद्र की स्थापना इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार शुरू से ही नशे के खिलाफ सख्त नीति अपनाकर काम कर रही है। लोगों को जागरूक करने के साथ-साथ नशे के कारोबार में शामिल लोगों पर लगातार कार्रवाई की जा रही है। उन्होंने कहा कि यह केंद्र महिलाओं के लिए सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराएगा, जहां उन्हें उपचार, परामर्श, पुनर्वास और जीवन को नई दिशा देने की सुविधाएं मिलेंगी। चिट्टा तस्करी जैसी समस्याओं को समाप्त करने के लिए सरकार लगातार प्रयास कर रही है और इसके लिए कई स्तरों पर अभियान चलाए जा रहे हैं।
उन्होंने कहा कि जब कोई महिला या युवती नशे की लत का शिकार होती है तो उसका असर केवल उसी तक सीमित नहीं रहता, बल्कि पूरा परिवार प्रभावित होता है। बच्चों के भविष्य पर भी इसका नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। इसलिए सरकार ने उपचार के साथ-साथ सामाजिक पुनर्स्थापना पर भी विशेष ध्यान दिया है। केंद्र में रहने वाली महिलाओं को मानसिक, सामाजिक और चिकित्सकीय सहायता उपलब्ध करवाई जाएगी ताकि वे सामान्य जीवन की ओर लौट सकें। महिला पुनर्वास की यह पहल प्रदेश में अपनी तरह की पहली सरकारी व्यवस्था है।
मुख्यमंत्री ने जानकारी दी कि प्रदेश में दूसरा सरकारी नशा मुक्ति एवं पुनर्वास केंद्र कांगड़ा जिले के टांडा मेडिकल कॉलेज में स्थापित किया जाएगा। इससे प्रदेश के अन्य क्षेत्रों की महिलाओं को भी उपचार और पुनर्वास की सुविधाएं आसानी से मिल सकेंगी। उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य नशे से प्रभावित लोगों को सहायता प्रदान करना और उन्हें समाज में सम्मानजनक स्थान दिलाना है। नशा विरोधी अभियान को जन आंदोलन का रूप देने के लिए पंचायतों, शिक्षकों, युवाओं और सामाजिक संगठनों की भागीदारी भी सुनिश्चित की जा रही है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछले वर्ष शुरू किया गया नशे के खिलाफ जन जागरूकता अभियान अब व्यापक रूप ले चुका है। समाज के विभिन्न वर्ग इस मुहिम से जुड़ रहे हैं और लोगों में जागरूकता बढ़ रही है। उन्होंने प्रदेशवासियों से अपील की कि वे नशे के खिलाफ इस लड़ाई में सक्रिय भूमिका निभाएं और समाज को इस बुराई से मुक्त बनाने में सहयोग दें। सरकार ने साफ कर दिया है कि नशे के शिकार लोगों के प्रति संवेदनशीलता दिखाई जाएगी, लेकिन नशे का कारोबार करने वालों के खिलाफ कठोर कार्रवाई जारी रहेगी। हिमाचल प्रदेश सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि अवैध नशा कारोबार से जुड़ी संपत्तियों की पहचान कर कानूनी कार्रवाई की जाएगी और किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा।
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