शिमला की हवाई सेवाओं को लेकर हाईकोर्ट ने जताई चिंता, केंद्र सरकार को रिपोर्ट देने के निर्देश
शिमला की हवाई सेवाओं को लेकर हाईकोर्ट ने जताई चिंता, केंद्र सरकार को रिपोर्ट देने के निर्देश

Author : Man Singh

May 6, 2026 10:45 a.m. 506

हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला में हवाई संपर्क व्यवस्था की धीमी प्रगति को लेकर अब मामला न्यायिक स्तर पर गंभीर रूप ले चुका है। हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने इस मुद्दे पर कड़ा रुख अपनाते हुए केंद्र सरकार से विस्तृत और तथ्यात्मक रिपोर्ट पेश करने को कहा है। अदालत ने सुनवाई के दौरान स्पष्ट टिप्पणी की कि जब किसी राज्य की राजधानी में ही पर्याप्त हवाई सेवाएं उपलब्ध नहीं हैं, तो यह प्रशासनिक और नीतिगत दोनों स्तरों पर गंभीर चिंता का विषय है।

सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने नागरिक उड्डयन मंत्रालय से सवाल किया कि शिमला के लिए प्रस्तावित एयर कनेक्टिविटी योजनाओं में लगातार देरी क्यों हो रही है। अदालत ने यह भी पूछा कि अब तक इस दिशा में क्या-क्या कदम उठाए गए हैं और योजनाओं के क्रियान्वयन में बाधाएं क्या हैं। कोर्ट ने मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों को वर्चुअल माध्यम से अगली सुनवाई में उपस्थित होकर पूरी स्थिति स्पष्ट करने के निर्देश दिए हैं।

मामले की गंभीरता को देखते हुए अदालत ने यह भी जानना चाहा कि उड़ान योजना के तहत अन्य छोटे हवाई अड्डों को प्राथमिकता दी जा रही है, जबकि शिमला जैसे महत्वपूर्ण और पर्यटन की दृष्टि से अत्यंत संवेदनशील शहर को अपेक्षित सुविधाएं क्यों नहीं मिल रही हैं। कोर्ट ने इसे असंतुलित विकास नीति का विषय बताते हुए केंद्र से जवाब मांगा है।

राज्य सरकार की ओर से अदालत को जानकारी दी गई कि शिमला एयर कनेक्टिविटी को बेहतर बनाने के लिए कई प्रस्ताव पहले ही केंद्र सरकार को भेजे जा चुके हैं, लेकिन उन पर अब तक कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया है। इस कारण राज्य में पर्यटन उद्योग और स्थानीय व्यापार पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। होटल, ट्रैवल और छोटे व्यवसायों में गिरावट की स्थिति भी सामने आई है।

अदालत ने टिप्पणी करते हुए कहा कि पहाड़ी राज्यों के लिए हवाई संपर्क कोई विलासिता नहीं बल्कि एक आवश्यक सुविधा है। सड़क मार्ग की सीमाओं को देखते हुए एयर कनेक्टिविटी का मजबूत होना बेहद जरूरी है। कोर्ट ने यह भी कहा कि यदि समय रहते सुधारात्मक कदम नहीं उठाए गए तो इसका सीधा असर जनता के हितों पर पड़ेगा।

हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार को निर्देश दिया है कि वह सभी प्रस्तावों, उड़ानों की वर्तमान स्थिति, भविष्य की योजनाओं और लंबित निर्णयों की विस्तृत रिपोर्ट अगली सुनवाई में पेश करे। साथ ही यह भी स्पष्ट किया जाए कि शिमला एयरपोर्ट के विकास में कौन-कौन सी तकनीकी और प्रशासनिक बाधाएं आ रही हैं।

इस पूरे मामले ने शिमला में एयर कनेक्टिविटी की कमी को एक बार फिर चर्चा में ला दिया है। स्थानीय लोगों और पर्यटन क्षेत्र से जुड़े लोगों में उम्मीद जगी है कि न्यायालय की सख्ती के बाद इस दिशा में जल्द कोई ठोस कदम उठाया जाएगा, जिससे क्षेत्र की हवाई सेवाओं में सुधार हो सकेगा।

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