ठियोग अस्पताल में गलत इंजेक्शन का आरोप, पुलिस तक पहुंचा मामला
ठियोग अस्पताल में गलत इंजेक्शन का आरोप, पुलिस तक पहुंचा मामला

Post by : Himachal Bureau

Sept. 5, 2026 10:20 a.m. 113

ठियोग। शिमला जिले के सिविल अस्पताल ठियोग में इलाज के लिए पहुंची एक महिला को कथित रूप से गलत इंजेक्शन लगाए जाने का मामला सामने आया है। महिला के परिजनों ने अस्पताल स्टाफ पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए पुलिस से शिकायत की है। वहीं अस्पताल प्रशासन ने आरोपों को खारिज किया है। मामला ठियोग क्षेत्र के संधू गांव निवासी 52 वर्षीय शीला देवी से जुड़ा है। उनके बेटे दिनेश चंदेल का आरोप है कि अस्पताल में एक अन्य मरीज के लिए रखा गया हृदय संबंधी गंभीर स्थिति में इस्तेमाल होने वाला इंजेक्शन गलती से उनकी मां को लगा दिया गया।

परिजनों ने नर्स पर लगाया आरोप

परिवार का कहना है कि इंजेक्शन लगाने के बाद उन्हें कथित गड़बड़ी की जानकारी मिली। इसके बाद उन्होंने अस्पताल स्टाफ से पूरे मामले पर जवाब मांगा। परिजनों का आरोप है कि संतोषजनक जवाब नहीं मिलने के बाद उन्होंने पुलिस से शिकायत कर घटना की निष्पक्ष जांच और जिम्मेदार कर्मचारी के खिलाफ कार्रवाई की मांग की।

अस्पताल प्रशासन ने आरोपों को नकारा

ड्यूटी पर मौजूद चिकित्सक डॉ. जितेंद्र सांगटा ने आरोपों से इनकार किया है। अस्पताल प्रशासन के मुताबिक संबंधित इंजेक्शन शीला देवी के लिए न तो डॉक्टर ने लिखा था और न ही चिकित्सकीय निगरानी में उन्हें ऐसा इंजेक्शन लगाया गया। अस्पताल का कहना है कि उस समय दो महिला मरीज इलाज के लिए आई थीं। इनमें एक मरीज में गंभीर हृदय समस्या और संभावित हार्ट अटैक की आशंका थी, जिसके लिए आवश्यक उपचार दिया गया और बाद में उसे आईजीएमसी शिमला रेफर किया गया।

सांस लेने में परेशानी के बाद अस्पताल पहुंची थीं शीला देवी

अस्पताल प्रशासन के अनुसार शीला देवी सांस लेने में परेशानी और गैस्ट्रिक समस्या की शिकायत लेकर अस्पताल पहुंची थीं। प्राथमिक उपचार और जांच के बाद उन्हें भी आगे की चिकित्सा के लिए शिमला रेफर किया गया। रिपोर्ट के अनुसार फिलहाल उनकी हालत स्थिर बताई गई है।

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पुलिस शिकायत के बाद जांच की मांग

परिजनों की शिकायत के बाद मामला अब पुलिस तक पहुंच चुका है। परिवार चाहता है कि अस्पताल के रिकॉर्ड, उस समय ड्यूटी पर तैनात कर्मचारियों और दिए गए उपचार की जांच की जाए, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि वास्तव में कोई गलत इंजेक्शन लगाया गया था या नहीं। फिलहाल दोनों पक्षों के दावे अलग-अलग हैं। इसलिए जांच पूरी होने से पहले अस्पताल की लापरवाही या गलत इंजेक्शन लगाए जाने को साबित तथ्य नहीं माना जा सकता।

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