Author : Rajneesh Kapil Hamirpur
हिमाचल प्रदेश में दवा निर्माण और औषधि अनुसंधान को नई दिशा देने की कोशिश तेज होती दिखाई दे रही है। हमीरपुर के सांसद अनुराग सिंह ठाकुर ने प्रदेश में राष्ट्रीय औषधीय शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थान की सुविधा स्थापित करने का प्रस्ताव केंद्र सरकार के सामने रखा है। इसमें हिमाचल में नया संस्थान स्थापित करने या मोहाली स्थित संस्थान का विस्तार केंद्र खोलने का विकल्प शामिल है। दिए गए प्रस्ताव के अनुसार, इस पहल पर केंद्र की ओर से सकारात्मक रुख सामने आया है। हालांकि, इसे अभी अंतिम स्वीकृति या संस्थान की औपचारिक स्थापना का निर्णय नहीं माना जा सकता। केंद्र की Biopharma SHAKTI योजना में नए राष्ट्रीय औषधीय शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थानों के नेटवर्क के विस्तार का प्रावधान पहले से शामिल है।
हिमाचल में इस स्तर का संस्थान स्थापित होने पर फार्मा क्षेत्र में पढ़ाई, प्रशिक्षण और अनुसंधान के अवसर बढ़ सकते हैं। प्रदेश के विद्यार्थियों को उन्नत औषधि तकनीक, जैव-औषधि अनुसंधान और उद्योग से जुड़ी विशेषज्ञता हासिल करने के लिए दूसरे राज्यों पर निर्भरता कम हो सकती है। इससे स्थानीय युवाओं के लिए उच्च स्तरीय कौशल विकास के रास्ते खुलने की संभावना है। खासकर दवा निर्माण, अनुसंधान, गुणवत्ता जांच और नई औषधियों से जुड़े क्षेत्रों में प्रशिक्षित मानव संसाधन तैयार करने में मदद मिल सकती है।
प्रस्ताव का एक महत्वपूर्ण पहलू ऊना के हरोली में विकसित हो रहा Bulk Drug Park है। केंद्र सरकार ने इस परियोजना के लिए 1,000 करोड़ रुपये की सहायता स्वीकृत की है। पार्क में साझा आधारभूत सुविधाओं के विकास पर काम किया जा रहा है। इस पार्क के साथ यदि उच्च स्तरीय औषधि शिक्षा और अनुसंधान की सुविधा विकसित होती है तो उद्योग और शैक्षणिक संस्थानों के बीच बेहतर तालमेल बनाया जा सकता है। इससे अनुसंधान के परिणामों को औद्योगिक स्तर तक पहुंचाने और नई तकनीकों के इस्तेमाल को बढ़ावा देने में सहायता मिल सकती है।
केंद्र सरकार ने 2026-27 के बजट में Biopharma SHAKTI के लिए पांच वर्षों में 10,000 करोड़ रुपये के खर्च का प्रस्ताव रखा है। योजना का उद्देश्य भारत में जैव-औषधियों और समान जैविक दवाओं के घरेलू उत्पादन, अनुसंधान और नवाचार की क्षमता बढ़ाना है। इसके तहत तीन नए राष्ट्रीय औषधीय शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थानों का नेटवर्क बनाने और सात मौजूदा संस्थानों को मजबूत करने की योजना है। साथ ही देशभर में एक हजार से अधिक मान्यता प्राप्त चिकित्सकीय परीक्षण केंद्रों का नेटवर्क विकसित करने का लक्ष्य रखा गया है।
हिमाचल प्रदेश पहले से ही दवा निर्माण के लिए देश के प्रमुख राज्यों में गिना जाता है। बद्दी-बरोटीवाला-नालागढ़ जैसे औद्योगिक क्षेत्रों में बड़ी संख्या में दवा कंपनियां काम कर रही हैं। ऐसे में अनुसंधान और उच्च स्तरीय प्रशिक्षण की सुविधा प्रदेश के मौजूदा औद्योगिक आधार को और मजबूत कर सकती है। राष्ट्रीय औषधीय शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थान, मोहाली पहले से ही हिमाचल के ऊना और बद्दी-बरोटीवाला-नालागढ़ जैसे औद्योगिक समूहों को अपनी लक्षित गतिविधियों में शामिल करता है।
अनुराग सिंह ठाकुर ने इस पहल के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय मंत्री जगत प्रकाश नड्डा का आभार व्यक्त किया है। उनके अनुसार हिमाचल में ऐसी संस्था स्थापित होने से प्रदेश की औषधि और जैव-औषधि क्षमता को बढ़ाने में मदद मिलेगी। उनका कहना है कि संस्थान से युवाओं को विशेष प्रशिक्षण, अनुसंधान और कौशल विकास के अवसर मिल सकते हैं। साथ ही प्रदेश में तकनीकी और नियामक क्षमता मजबूत होने की संभावना है।
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केंद्रीय स्तर पर योजना की रूपरेखा और संबंधित हितधारकों के साथ विचार-विमर्श के दौरान इस प्रस्ताव का परीक्षण किया जाना है। इसलिए आने वाले समय में यह महत्वपूर्ण होगा कि हिमाचल के लिए नए संस्थान या मोहाली के विस्तार केंद्र को लेकर केंद्र सरकार किस प्रकार का अंतिम निर्णय लेती है। यदि प्रस्ताव को आगे मंजूरी मिलती है तो यह हिमाचल के औषधि उद्योग, युवाओं, अनुसंधान संस्थानों और ऊना के बल्क ड्रग पार्क के लिए महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकता है।
हिमाचल में NIPER को लेकर क्या प्रस्ताव रखा गया है?
हिमाचल में नया राष्ट्रीय औषधीय शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थान स्थापित करने या मोहाली स्थित संस्थान का विस्तार केंद्र खोलने का प्रस्ताव रखा गया है।
क्या हिमाचल में NIPER को अंतिम मंजूरी मिल गई है?
उपलब्ध जानकारी के आधार पर इसे अभी अंतिम स्वीकृति नहीं कहा जा सकता। प्रस्ताव पर केंद्र स्तर पर विचार और प्रक्रिया आगे बढ़नी है।
Biopharma SHAKTI क्या है?
यह केंद्र सरकार की 10,000 करोड़ रुपये की पांच वर्षीय पहल है, जिसका उद्देश्य भारत में जैव-औषधि निर्माण, अनुसंधान और नवाचार को मजबूत करना है।
ऊना के बल्क ड्रग पार्क को इससे क्या फायदा हो सकता है?
यदि हिमाचल में अनुसंधान और प्रशिक्षण सुविधा स्थापित होती है तो इससे पार्क को प्रशिक्षित मानव संसाधन, तकनीकी विशेषज्ञता और उद्योग-अकादमिक सहयोग का लाभ मिल सकता है।
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