नव संवत पर फगवाना पहुंचे देव श्रीबड़ा छमाहूं, पारंपारिक रिती रिवाज से मनाया चेच उत्सव
नव संवत पर फगवाना पहुंचे देव श्रीबड़ा छमाहूं, पारंपारिक रिती रिवाज से मनाया चेच उत्सव

Author : Prem Sagar

March 23, 2026 12:17 p.m. 152

कुल्लू के फगवाना गांव में नव संवत के पावन अवसर पर देव श्रीबड़ा छमाहूं का भव्य स्वागत किया गया। कोटला में नव संवत मनाने के बाद देवता अपने लव-लश्कर के साथ फगवाना पहुंचे, जहां ग्रामीणों और श्रद्धालुओं ने पारंपरिक तरीके से उनका स्वागत किया। इस मौके पर पूरे गांव में उत्सव का माहौल देखने को मिला और लोगों ने चेच उत्सव को बड़ी धूमधाम से मनाया।

देवता के आगमन पर ढोल-नगाड़ों और पारंपरिक वाद्य यंत्रों की गूंज से पूरा वातावरण भक्तिमय हो गया। देवता की शोभायात्रा निकाली गई, जिसमें बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए। गांव के लोग पारंपरिक वेशभूषा में नजर आए और पूरे उत्साह के साथ इस धार्मिक आयोजन में भाग लिया। चारों ओर भक्ति और खुशी का माहौल बना रहा।

फगवाना गांव का देव श्रीबड़ा छमाहूं से खास संबंध माना जाता है। स्थानीय मान्यता के अनुसार, देवता पहले छमाहूंसारी में प्रकट हुए थे और उसके बाद फगवाना में उनका प्रकट होना हुआ। यहां देवता की बालू जोगी नाम के राक्षस से भेंट हुई थी। कहा जाता है कि एक ग्रामीण महिला की मदद से देवता ने उस राक्षस पर विजय प्राप्त की थी, जिसके बाद इस स्थान की धार्मिक महत्ता और बढ़ गई।

इसके अलावा यह भी मान्यता है कि देवता ने इसी स्थान पर जमीन के नीचे से तीन पवित्र जलधाराएं निकाली थीं। ये जलधाराएं आज भी लोगों की आस्था का केंद्र हैं और यहां आने वाले श्रद्धालु इन पवित्र स्थलों पर श्रद्धा के साथ दर्शन करते हैं। मंदिर परिसर में बनी तीन बावड़ियां और अन्य धार्मिक स्थल इस जगह की खास पहचान हैं और यहां की आस्था को दर्शाते हैं।

देव श्रीबड़ा छमाहूं को छह देव शक्तियों का रूप माना जाता है, जिनमें ब्रह्मा, विष्णु, महेश, आदि अनंत और शेष शामिल हैं। लोगों का विश्वास है कि नव संवत के दिन ही देवता का अवतार हुआ था, इसलिए इस दिन का खास महत्व है। नव संवत को सृष्टि की शुरुआत और हिंदू पंचांग के आरंभ का प्रतीक भी माना जाता है, इसलिए इस दिन को बहुत श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया जाता है।

उत्सव के दौरान स्थानीय लोगों ने बताया कि यह पर्व उनकी संस्कृति, परंपरा और आस्था से जुड़ा हुआ है। इस तरह के आयोजन लोगों को अपनी परंपराओं से जोड़ते हैं और समाज में एकता का संदेश भी देते हैं। इस अवसर पर दूर-दूर से आए श्रद्धालुओं ने भी भाग लिया और देवता के दर्शन कर आशीर्वाद प्राप्त किया।

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