बेमौसमी सब्जियों से कुल्लू के किसानों की आय में बढ़ोतरी
बेमौसमी सब्जियों से कुल्लू के किसानों की आय में बढ़ोतरी

Author : Rajneesh Kapil Hamirpur

Aug. 20, 2026 5:29 p.m. 113

हिमाचल प्रदेश के कुल्लू जिले में किसान अब केवल फल उत्पादन तक सीमित नहीं हैं, बल्कि बेमौसमी सब्जियों की खेती को अपनाकर अपनी आमदनी बढ़ाने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। फूलगोभी और बंदगोभी जैसी सब्जियों का मौसम से अलग समय पर उत्पादन किसानों के लिए बेहतर कमाई का माध्यम बन रहा है। कुल्लू, नग्गर, भुंतर और बंजार विकास खंडों में बड़ी संख्या में किसान आधुनिक तकनीक और विभागीय मार्गदर्शन के सहारे खेती को व्यवसाय का रूप दे रहे हैं। बेमौसमी फसलों की सबसे बड़ी खासियत यह है कि जब मैदानी क्षेत्रों से सब्जियों की सामान्य आवक कम हो जाती है, उसी समय पहाड़ी क्षेत्रों से आने वाली उपज बाजार में पहुंचती है। ऐसे समय में मांग बढ़ने के कारण किसानों को अपेक्षाकृत बेहतर भाव मिलने की संभावना रहती है।

सरकारी योजनाओं से किसानों को मिल रही मदद

किसानों को आगे बढ़ाने में Government Subsidy और कृषि विभाग की योजनाओं की भी महत्वपूर्ण भूमिका है। उन्नत बीज, खाद, सिंचाई सुविधाओं और खेती की तकनीक से जुड़ी सहायता किसानों को उपलब्ध करवाई जा रही है। राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के अंतर्गत गोभी के बीज खरीदने पर किसानों को 50 प्रतिशत तक अनुदान दिया जा रहा है। वहीं प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के माध्यम से टपक और फव्वारा सिंचाई व्यवस्था के लिए 55 प्रतिशत तक सहायता उपलब्ध है। पिछले वर्ष जिले के 91 किसानों को इस योजना का लाभ मिला।

स्थानीय मंडियों से परिवहन खर्च में बचत

कुल्लू के किसानों के लिए स्थानीय बाजारों की उपलब्धता भी बड़ी सुविधा साबित हो रही है। पतलीकूहल, भुंतर, बंदरोल और बंजार सहित कई स्थानों पर सब्जी मंडियां मौजूद हैं। यहां उत्तर भारत के अलग-अलग हिस्सों से व्यापारी पहुंचकर किसानों की उपज खरीदते हैं। परवी गांव के किसान शेर सिंह बेमौसमी फूलगोभी उगाते हैं और अपनी फसल बंदरोल मंडी में बेचते हैं। उनका कहना है कि स्थानीय मंडी उपलब्ध होने से दूर के बाजारों तक जाने की जरूरत नहीं पड़ती। इससे समय और परिवहन दोनों की बचत होती है।

550 हेक्टेयर में हो रही सब्जियों की खेती

जिले में करीब 550 हेक्टेयर क्षेत्र में फूलगोभी और बंदगोभी का उत्पादन किया जा रहा है। इनमें लगभग 350 हेक्टेयर में फूलगोभी तथा 200 हेक्टेयर में बंदगोभी की खेती शामिल है। इससे करीब 1,100 मीट्रिक टन उत्पादन प्राप्त हो रहा है। सोयल के मोहन लाल और मलाह के छापे राम सहित कई किसान भी नकदी फसलों को अपनाकर अपनी आर्थिक स्थिति मजबूत कर रहे हैं। Vegetable Farming में वैज्ञानिक सलाह और आधुनिक तकनीक के इस्तेमाल से किसानों को उत्पादन बेहतर करने में मदद मिल रही है।

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वैज्ञानिक सलाह से उत्पादन और गुणवत्ता में सुधार

कृषि विशेषज्ञ किसानों को फसल चयन, बीज उपचार, रोग नियंत्रण, कीट प्रबंधन और सिंचाई से जुड़ी जानकारी देते हैं। इससे किसान सही समय पर जरूरी कदम उठा पाते हैं और फसल की गुणवत्ता बेहतर करने में सफल हो रहे हैं। मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंदर सिंह सुक्खू के नेतृत्व में प्रदेश सरकार किसानों की आय बढ़ाने और कृषि को लाभकारी व्यवसाय बनाने पर जोर दे रही है। सरकारी योजनाओं के माध्यम से किसानों को कृषि योजनाएं, सिंचाई, उन्नत बीज, मशीनीकरण और विपणन से संबंधित सुविधाएं उपलब्ध करवाई जा रही हैं। कुल्लू में बेमौसमी सब्जियों की खेती अब केवल अतिरिक्त आय का साधन नहीं रह गई है। सरकारी सहायता, वैज्ञानिक मार्गदर्शन, आधुनिक तकनीक और स्थानीय मंडियों का सहयोग किसानों को खेती में नए अवसर दे रहा है। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में किसानों की आय बढ़ाने के साथ स्थानीय स्तर पर रोजगार और आत्मनिर्भरता को भी बढ़ावा मिल रहा है।

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