बैंक की नौकरी छोड़ मशरूम उत्पादन से सफल बने प्रणव धर
बैंक की नौकरी छोड़ मशरूम उत्पादन से सफल बने प्रणव धर

Post by : Himachal Bureau

Aug. 20, 2026 3:24 p.m. 122

हिमाचल प्रदेश में खेती और बागवानी के क्षेत्र में युवाओं के लिए स्वरोजगार की संभावनाएं लगातार बढ़ रही हैं। सरकारी योजनाओं और आधुनिक तकनीक का सही इस्तेमाल करके युवा पारंपरिक खेती से आगे बढ़कर नए कृषि व्यवसाय अपना रहे हैं। कांगड़ा जिले के नगरोटा बगवां विकास खंड के समलोटी गांव निवासी प्रणव धर की कहानी भी ऐसी ही प्रेरणादायक पहल है।

बैंक की नौकरी छोड़ गांव में शुरू किया नया काम

मैकेनिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई करने के बाद बैंक में परिवीक्षाधीन अधिकारी के पद पर कार्य कर चुके प्रणव धर ने नौकरी छोड़कर अपने गांव के पास ही व्यवसाय शुरू करने का निर्णय लिया। परिचितों से प्रेरणा मिलने के बाद उन्होंने Mushroom Farming को अपने स्वरोजगार का माध्यम बनाया। प्रणव ने बताया कि उनके कुछ परिचित हरियाणा में बड़े स्तर पर Mushroom Farming कर रहे हैं। उन्हीं से उन्हें हिमाचल में भी मशरूम उत्पादन की संभावनाओं के बारे में जानकारी मिली। इसके बाद उन्होंने उद्यान विभाग से संपर्क किया और सरकारी योजना के तहत अपनी परियोजना तैयार की।

सरकारी सहायता से स्थापित हुई मशरूम इकाई

प्रणव धर ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के दौरान एकीकृत बागवानी विकास मिशन के अंतर्गत Mushroom Farm स्थापित किया। परियोजना की कुल लागत करीब 60 से 70 लाख रुपये बताई गई है, जबकि उद्यान विभाग की ओर से लगभग 15 लाख रुपये की सहायता उपलब्ध करवाई गई। उनका फार्म आधुनिक सुविधाओं से लैस है और यहां तापमान तथा नमी को नियंत्रित करने की व्यवस्था की गई है। इसी वजह से मौसम पर निर्भरता कम करते हुए पूरे वर्ष Mushroom Production किया जा सकता है।

एक कमरे में हजारों बैग, सालाना उत्पादन क्षमता 50 टन से अधिक

प्रणव धर के अनुसार उनके फार्म में तीन कमरे हैं। एक कमरे में करीब 1,600 से 2,000 मशरूम बैग लगाए जा सकते हैं। एक कमरे से लगभग साढ़े तीन टन तक उत्पादन प्राप्त होने की क्षमता है। इस तरह पूरे वर्ष फार्म की कुल उत्पादन क्षमता 50 टन से अधिक बताई गई है। फार्म शुरू होने के बाद से यहां स्थानीय लोगों को भी रोजगार मिला है। करीब 8 से 10 लोग काम कर रहे हैं, जिनमें बड़ी संख्या महिलाओं की है। इससे ग्रामीण क्षेत्र में लोगों को अपने घर के नजदीक रोजगार का अवसर मिल रहा है।

छह महीने में 40 लाख रुपये का कारोबार

प्रणव के मुताबिक, शुरुआती छह महीनों में फार्म से लगभग 40 लाख रुपये का राजस्व प्राप्त हुआ। कर्मचारियों के वेतन और दूसरे खर्चों को निकालने के बाद करीब 20 प्रतिशत लाभ हासिल हुआ। उनके अनुसार अब तक लगभग 8 से 9 लाख रुपये का मुनाफा हो चुका है। उनका मानना है कि सही प्रशिक्षण, आधुनिक तकनीक और सरकारी सहायता मिलने पर युवा अपने गांव में रहकर भी अच्छा व्यवसाय खड़ा कर सकते हैं।

हिमाचल में मशरूम उत्पादन के लिए अनुकूल वातावरण

उद्यान विभाग के अधिकारियों के अनुसार हिमाचल प्रदेश की जलवायु Mushroom Cultivation के लिए काफी अनुकूल है। सामान्य परिस्थितियों में सितंबर से अप्रैल तक मशरूम उत्पादन किया जा सकता है। विभाग की विभिन्न योजनाओं के माध्यम से किसानों और बागवानों को उत्पादन इकाइयां स्थापित करने के लिए आर्थिक सहायता दी जा रही है। छोटी इकाई स्थापित करने के लिए विभाग की ओर से प्रति इकाई एक लाख रुपये तक की सहायता का प्रावधान बताया गया है। बड़े स्तर पर उत्पादन करने वालों को भी योजनाओं के तहत सहायता उपलब्ध करवाई जा रही है।

कांगड़ा में सैकड़ों किसान उठा चुके हैं लाभ

जिला कांगड़ा में इन योजनाओं से अब तक करीब 211 बागवान लाभान्वित हो चुके हैं। इनमें लगभग 164 छोटी मशरूम इकाइयां स्थापित हो चुकी हैं, जबकि करीब 42 उत्पादन इकाइयां भी तैयार की गई हैं। जिले में मशरूम उत्पादन के लिए तीन खाद तैयार करने वाली इकाइयां भी स्थापित की गई हैं। आधुनिक नियंत्रित वातावरण वाली इकाइयों के माध्यम से अब पूरे वर्ष Mushroom Business चलाना संभव हो रहा है। खासकर मौसम से अलग समय में बाजार में बेहतर दाम मिलने से किसानों की आमदनी बढ़ाने की संभावनाएं भी मजबूत हुई हैं।

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कम जमीन में शुरू हो सकता है मशरूम उत्पादन

विभाग के अनुसार मशरूम उत्पादन की खासियत यह है कि इसे बहुत अधिक जमीन की जरूरत नहीं होती। छोटे स्तर पर सीमित संसाधनों के साथ भी इसकी शुरुआत की जा सकती है। उचित प्रशिक्षण और प्रबंधन के साथ यह युवाओं और छोटे किसानों के लिए अतिरिक्त आय का माध्यम बन सकता है। उपायुक्त कांगड़ा हेमराज बैरवा ने प्रणव धर की पहल को युवाओं के लिए प्रेरणादायक बताया। उन्होंने कहा कि सरकारी योजनाओं का सही उपयोग करके युवा कृषि और बागवानी क्षेत्र में नए उद्यम खड़े कर सकते हैं। प्रणव धर की सफलता यह संदेश देती है कि अच्छी शिक्षा और नौकरी के अनुभव के बाद भी यदि युवा अपने गांव में कुछ नया करने का निर्णय लें, तो कृषि आधारित व्यवसाय को आधुनिक तरीके से अपनाकर रोजगार और आय दोनों के अवसर पैदा किए जा सकते हैं।

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