Author : Rajneesh Kapil Hamirpur
हिमाचल प्रदेश का कुल्लू जिला अब केवल अपनी प्राकृतिक सुंदरता और पर्यटन के लिए ही नहीं, बल्कि महिला सशक्तिकरण और ग्रामीण आत्मनिर्भरता के लिए भी एक नई पहचान बना रहा है। भुंतर विकास खंड के गड़सा क्लस्टर के अंतर्गत कार्यरत शिवशक्ति स्वयं सहायता समूह इस बदलाव की एक सशक्त और प्रेरणादायक मिसाल बनकर सामने आया है। इस समूह ने यह साबित कर दिया है कि यदि महिलाओं को सही दिशा, सामूहिक सहयोग और सरकारी समर्थन मिले, तो वे न केवल अपने परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत कर सकती हैं, बल्कि पूरे समाज को आगे बढ़ाने में भी अहम भूमिका निभा सकती हैं।
भलान-एक पंचायत की 13 महिलाओं से मिलकर बना शिवशक्ति स्वयं सहायता समूह आज ग्रामीण आजीविका का एक मजबूत आधार बन चुका है। यह समूह कुल्लू की पारंपरिक खान-पान संस्कृति और हस्तशिल्प को जीवित रखते हुए उसे आय का साधन बना रहा है। समूह की महिलाएँ स्थानीय और प्राकृतिक संसाधनों का उपयोग कर पारंपरिक अचार, चटनियाँ, अन्य खाद्य उत्पादों के साथ-साथ कुल्लवी पट्टू और शाल का निर्माण कर रही हैं। इन उत्पादों में उपयोग की जाने वाली सामग्री न केवल स्वादिष्ट है, बल्कि औषधीय गुणों से भरपूर भी है, जिससे ये स्वास्थ्य की दृष्टि से भी लाभकारी साबित हो रहे हैं।
शिवशक्ति स्वयं सहायता समूह ने पारंपरिक ज्ञान को आधुनिक स्वरोजगार से जोड़कर एक नई राह तैयार की है। यह पहल जहां महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बना रही है, वहीं कुल्लू की सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करने में भी महत्वपूर्ण योगदान दे रही है। समूह की मेहनत और लगन ने यह दिखा दिया है कि परंपरा और आधुनिकता का संतुलन बनाकर ग्रामीण क्षेत्रों में भी टिकाऊ विकास संभव है।
राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन और हिमाचल प्रदेश सरकार के सहयोग से समूह को लगभग 8 लाख रुपये की लागत से एक आधुनिक फूड वैन उपलब्ध करवाई गई है। यह फूड वैन महिलाओं के लिए आत्मनिर्भरता का एक सशक्त माध्यम बनकर उभरी है। इसके माध्यम से अब कुल्लू के प्रमुख पर्यटन स्थलों पर शुद्ध, स्थानीय और पारंपरिक भोजन किफायती दरों पर उपलब्ध कराया जा रहा है। इससे पर्यटकों को जहां कुल्लू के पारंपरिक स्वाद से रूबरू होने का अवसर मिल रहा है, वहीं महिलाओं को नियमित आय का साधन भी प्राप्त हो रहा है।
समूह ने सामाजिक जिम्मेदारी निभाते हुए विद्यार्थियों के लिए भी कम दरों पर खाद्य सामग्री उपलब्ध करवाई है। इससे यह स्पष्ट होता है कि शिवशक्ति स्वयं सहायता समूह केवल लाभ कमाने तक सीमित नहीं है, बल्कि समाज के प्रति अपने दायित्वों को भी पूरी गंभीरता से निभा रहा है। इसके अतिरिक्त कसोल क्लस्टर को भी इसी प्रकार की फूड वैन उपलब्ध करवाई गई है, जबकि आने वाले समय में भुंतर क्लस्टर को एक और नग्गर क्लस्टर में तीन फूड वैन उपलब्ध करवाने की योजना है।
समूह की महिलाओं का कहना है कि मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के नेतृत्व में मिले इस सरकारी सहयोग से उन्हें स्थायी आजीविका का मजबूत साधन प्राप्त हुआ है। इससे उनकी आर्थिक स्थिति में सुधार हुआ है और साथ ही परिवार तथा समाज में उनका सम्मान और आत्मविश्वास भी बढ़ा है। महिलाओं ने राज्य सरकार और मुख्यमंत्री का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह सहयोग उनके जीवन में सकारात्मक बदलाव लेकर आया है।
देश-विदेश से आने वाले पर्यटकों के कारण कुल्लू पहले से ही एक प्रमुख पर्यटन स्थल है। शिवशक्ति स्वयं सहायता समूह की इस पहल से अब पर्यटक कुल्लू के पारंपरिक, शुद्ध और किफायती स्वाद का सीधा अनुभव कर पा रहे हैं। यह प्रयास स्थानीय संस्कृति को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
हिमाचल प्रदेश सरकार द्वारा समर्थित ‘हिमइरा’ ब्रांड भी ग्रामीण महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक सशक्त मंच के रूप में उभरा है। ‘सबका साथ, सबका विकास’ सीएलएफ मशोबरा के स्वामित्व में विकसित यह पहल प्राकृतिक उत्पादों और पारंपरिक शिल्पकला को नई पहचान दे रही है। हिमइरा के उत्पाद पर्यावरण-अनुकूल हैं और पारंपरिक ज्ञान तथा आधुनिक जरूरतों के बीच संतुलन स्थापित करते हैं।
समूह की सदस्य सपना ठाकुर बताती हैं कि फूड वैन मिलने से सभी महिलाएँ बेहद उत्साहित हैं। सम्मानजनक रोजगार मिलने से उनका आत्मसम्मान बढ़ा है और भविष्य को लेकर उनका भरोसा और मजबूत हुआ है। शिवशक्ति स्वयं सहायता समूह की यह सफलता कहानी उन सभी महिलाओं के लिए प्रेरणा है, जो सीमित संसाधनों के बावजूद आगे बढ़ने का साहस और संकल्प रखती हैं। यह कहानी यह भी साबित करती है कि जब सरकारी योजनाएँ सही हाथों तक पहुँचती हैं, तो वे ग्रामीण समाज में स्थायी और सकारात्मक बदलाव की नींव रखती हैं।
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