अमलेहड़ के मेजर जनरल पी.एस. कँवर बने डिवीजन के जनरल ऑफिसर कमांडिंग
अमलेहड़ के मेजर जनरल पी.एस. कँवर बने डिवीजन के जनरल ऑफिसर कमांडिंग

Author : Rajneesh Kapil Hamirpur

July 15, 2026 4:42 p.m. 118

हिमाचल प्रदेश के ऊना जिले के ऐतिहासिक गांव अमलेहड़ के लिए गर्व का अवसर सामने आया है। गांव के सुपुत्र मेजर जनरल पी.एस. कँवर को भारतीय सेना में एक महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपते हुए डिवीजन के जनरल ऑफिसर कमांडिंग (जीओसी) का दायित्व दिया गया है। उनकी इस नियुक्ति को न केवल उनके व्यक्तिगत सैन्य जीवन की बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है, बल्कि पूरे हिमाचल प्रदेश और विशेष रूप से ऊना जिले के लिए सम्मान और गौरव का विषय भी माना जा रहा है।करीब 31 वर्षों की उल्लेखनीय सैन्य सेवा के बाद उन्हें यह जिम्मेदारी सौंपी गई है। उनकी नियुक्ति भारतीय सेना के वरिष्ठ नेतृत्व द्वारा उनके अनुभव, नेतृत्व क्षमता और उत्कृष्ट सेवा पर व्यक्त किए गए विश्वास का प्रतीक मानी जा रही है। भारतीय सेना में उनकी यह उपलब्धि युवाओं के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बन रही है।

परिवार की तीन पीढ़ियां राष्ट्र सेवा के लिए समर्पित

मेजर जनरल पी.एस. कँवर ऐसे प्रतिष्ठित सैनिक परिवार से संबंध रखते हैं, जिसकी कई पीढ़ियां देश की सेवा में अपना योगदान देती रही हैं। उनके पिता सेवानिवृत्त लेफ्टिनेंट जनरल एच.एस. कँवर भारतीय सेना के वरिष्ठ अधिकारियों में शामिल रहे हैं। वहीं उनके दादा स्वर्गीय लेफ्टिनेंट बाबूराम जसवाल ने भी सेना में महत्वपूर्ण सेवाएं दी थीं। उनके परिवार के अन्य सदस्य भी रक्षा सेवाओं से जुड़े रहे हैं, जिससे यह परिवार लंबे समय से राष्ट्र सेवा की गौरवशाली परंपरा को आगे बढ़ाता आया है।सैन्य पृष्ठभूमि वाले इस परिवार ने अनुशासन, समर्पण और राष्ट्रभक्ति की जो मिसाल पेश की है, वह आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणादायक मानी जाती है। राष्ट्र सेवा की यह परंपरा परिवार की सबसे बड़ी पहचान बन चुकी है।

विभिन्न महत्वपूर्ण जिम्मेदारियों का सफल निर्वहन

अपने तीन दशक से अधिक लंबे सैन्य करियर के दौरान मेजर जनरल पी.एस. कँवर ने अनेक महत्वपूर्ण स्टाफ, प्रशिक्षण और कमान संबंधी जिम्मेदारियों का सफलतापूर्वक निर्वहन किया है। उन्होंने देश के विभिन्न संवेदनशील क्षेत्रों में सेवाएं दीं और कई महत्वपूर्ण अभियानों का हिस्सा रहे। इसके अलावा विदेश में भी सैन्य प्रशिक्षण से जुड़े दायित्व निभाकर उन्होंने भारतीय सेना का प्रतिनिधित्व किया।पश्चिमी सीमा पर चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में नेतृत्व करने के साथ-साथ उन्होंने एक बख्तरबंद ब्रिगेड के गठन और संचालन जैसी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां भी निभाईं। मेजर जनरल के रूप में उनका अनुभव और नेतृत्व क्षमता उन्हें इस नई जिम्मेदारी के लिए उपयुक्त बनाती है।

नई जिम्मेदारी से बढ़ा हिमाचल का गौरव

डिवीजन के जनरल ऑफिसर कमांडिंग का दायित्व संभालने के बाद पूरे ऊना जिले और हिमाचल प्रदेश में खुशी का माहौल है। स्थानीय लोगों, पूर्व सैनिकों, सामाजिक संगठनों और जनप्रतिनिधियों ने उन्हें शुभकामनाएं देते हुए इसे प्रदेश के लिए गर्व का विषय बताया है।लोगों का कहना है कि इस तरह की उपलब्धियां प्रदेश के युवाओं को सेना में करियर बनाने और राष्ट्र सेवा के लिए प्रेरित करती हैं। हिमाचल प्रदेश लंबे समय से वीर सैनिकों की भूमि के रूप में जाना जाता है और मेजर जनरल पी.एस. कँवर की उपलब्धि ने इस गौरवशाली परंपरा को और मजबूत किया है।

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युवाओं के लिए प्रेरणा बनी उपलब्धि

मेजर जनरल पी.एस. कँवर की सफलता यह संदेश देती है कि समर्पण, अनुशासन, कठिन परिश्रम और उत्कृष्ट नेतृत्व के बल पर किसी भी ऊंचाई को प्राप्त किया जा सकता है। उनका सैन्य जीवन युवाओं के लिए प्रेरणादायक उदाहरण माना जा रहा है।विशेषज्ञों का मानना है कि सेना में उच्च पदों तक पहुंचने वाले अधिकारी केवल अपने परिवार ही नहीं बल्कि पूरे समाज और प्रदेश का सम्मान बढ़ाते हैं। जीओसी के रूप में उनकी नियुक्ति भारतीय सेना में उनके उत्कृष्ट योगदान का प्रमाण है और यह आने वाली पीढ़ियों को देश सेवा के लिए प्रेरित करती रहेगी।

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