Author : Prem Sagar
जिला कुल्लू के उपमंडल बंजार की पवित्र और प्राकृतिक सौंदर्य से भरपूर तीर्थन घाटी स्थित गुशेनी का वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय इन दिनों गहरे संकट के दौर से गुजर रहा है। वर्ष 2023 और फिर 2025 में आई भीषण प्राकृतिक आपदाओं ने विद्यालय भवन को पूरी तरह से जमींदोज कर दिया। लगातार हुई भारी वर्षा और भूस्खलन के कारण स्कूल की इमारत असुरक्षित हो गई थी, जिसके बाद प्रशासन को उसे खाली करवाना पड़ा। देखते ही देखते बच्चों की चहल-पहल से गूंजने वाला यह विद्यालय खंडहर में तब्दील हो गया।
इस आपदा ने केवल भवन को ही नहीं गिराया, बल्कि लगभग 400 विद्यार्थियों के भविष्य पर भी अनिश्चितता का साया डाल दिया। आज स्थिति यह है कि विद्यालय का स्थायी भवन नहीं है और बच्चे अस्थायी व्यवस्था में पढ़ने को मजबूर हैं। आपदा के बाद स्थानीय समाजसेवी भवन मालिक ने मानवीय पहल करते हुए अपने निजी भवन को अस्थायी रूप से विद्यालय संचालन के लिए उपलब्ध कराया। यह भवन 31 मार्च 2026 तक के लिए दिया गया है। इसी अस्थायी भवन में करीब 400 विद्यार्थी अपनी पढ़ाई जारी रखे हुए हैं।
हालांकि इस व्यवस्था से बच्चों की पढ़ाई पूरी तरह बंद नहीं हुई, लेकिन यह समाधान स्थायी नहीं है। भवन सीमित संसाधनों वाला है, कक्षाओं की संख्या कम है और खेल मैदान जैसी सुविधाएं भी उपलब्ध नहीं हैं। ऐसे में विद्यार्थी और शिक्षक दोनों ही कठिन परिस्थितियों में शैक्षणिक गतिविधियां संचालित कर रहे हैं।
सबसे बड़ी चिंता यह है कि 31 मार्च 2026 के बाद यह भवन उपलब्ध नहीं रहेगा। इसके बाद बच्चों की पढ़ाई कहाँ होगी, इसको लेकर अभिभावकों में गहरी चिंता व्याप्त है। विद्यालय के नए भवन के निर्माण को लेकर अभी तक कोई ठोस प्रगति नहीं हो पाई है। निर्माण से जुड़ी फाइलें और प्रशासनिक प्रक्रियाएं अभी भी कागजों में उलझी हुई हैं। बजट स्वीकृति, तकनीकी स्वीकृति और भूमि से संबंधित औपचारिकताओं के कारण निर्माण कार्य शुरू नहीं हो सका है।
अभिभावकों का कहना है कि यदि समय रहते निर्माण कार्य शुरू नहीं हुआ, तो बच्चों का एक और शैक्षणिक सत्र प्रभावित हो सकता है। कई अभिभावक अब आगामी सत्र से अपने बच्चों का दाखिला अन्य स्कूलों में करवाने पर विचार कर रहे हैं। यदि ऐसा होता है तो विद्यालय की छात्र संख्या में भारी गिरावट आ सकती है। इसी गंभीर मुद्दे को लेकर शनिवार को बाड़ीरोपा स्थित अस्थायी स्कूल भवन में स्कूल प्रबंधन समिति की साधारण बैठक आयोजित की गई। बैठक में माहौल काफी तनावपूर्ण रहा। बड़ी संख्या में अभिभावक और समिति सदस्य उपस्थित रहे।
बैठक के दौरान वर्तमान महिला एसएमसी प्रधान शिवा गौतम की कार्यप्रणाली पर कई सवाल उठाए गए। सदस्यों ने आरोप लगाया कि संकट की इस घड़ी में प्रभावी नेतृत्व नहीं दिया गया और प्रशासन से मजबूत पैरवी करने में समिति असफल रही। इसके बाद शिवा गौतम के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पेश किया गया। मतदान प्रक्रिया संपन्न हुई और बहुमत से अविश्वास प्रस्ताव पारित कर दिया गया। इस निर्णय के साथ ही उन्हें प्रधान पद से हटा दिया गया।
अविश्वास प्रस्ताव पारित होने के बाद अब स्कूल प्रबंधन समिति प्रधान विहीन हो गई है। इससे प्रबंधन संकट और गहरा गया है। प्रधानाचार्य के. एल. शर्मा ने जानकारी दी कि उच्च शिक्षा निदेशक के दिशा-निर्देशों के अनुसार ही नई कार्यकारिणी के गठन पर विचार किया जाएगा। आगामी दिनों में नई समिति के गठन की प्रक्रिया शुरू हो सकती है, लेकिन तब तक विद्यालय प्रशासन को बिना प्रधान के ही कार्य करना होगा। ऐसे में निर्णय लेने की प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है।
आपदा की मार झेल रहे इस विद्यालय के सामने अब दोहरी चुनौती है। एक ओर स्थायी भवन का अभाव है, दूसरी ओर प्रबंधन संकट खड़ा हो गया है। लगभग 400 बच्चों का भविष्य अनिश्चितता में है। यदि 31 मार्च के बाद अस्थायी भवन खाली करना पड़ा और तब तक नया भवन तैयार नहीं हुआ, तो बच्चों की पढ़ाई पूरी तरह बाधित हो सकती है। यह स्थिति न केवल शैक्षणिक नुकसान पहुंचाएगी, बल्कि मानसिक रूप से भी विद्यार्थियों पर प्रभाव डालेगी।
स्थानीय लोग और अभिभावक प्रशासन तथा सरकार से शीघ्र समाधान की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि शिक्षा जैसी बुनियादी आवश्यकता को लेकर किसी प्रकार की लापरवाही स्वीकार्य नहीं है। लोगों की मांग है कि नए भवन के निर्माण की प्रक्रिया को तुरंत तेज किया जाए, अस्थायी भवन की अवधि बढ़ाने पर विचार किया जाए या फिर किसी अन्य वैकल्पिक भवन की व्यवस्था की जाए। अब पूरा मामला प्रशासन और शिक्षा विभाग के सामने है। समय रहते यदि ठोस निर्णय नहीं लिया गया, तो सैकड़ों बच्चों का शैक्षणिक भविष्य प्रभावित हो सकता है।
तीर्थन घाटी जैसे दूरदराज क्षेत्र में शिक्षा की व्यवस्था पहले ही सीमित है। ऐसे में गुशेनी विद्यालय का संकट पूरे क्षेत्र के लिए चिंता का विषय बन गया है। आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि प्रशासन किस प्रकार इस समस्या का समाधान निकालता है और 31 मार्च के बाद बच्चों की पढ़ाई को सुचारु रूप से जारी रखने के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं। फिलहाल गुशेनी विद्यालय के विद्यार्थी, अभिभावक और शिक्षक अनिश्चित भविष्य की ओर देख रहे हैं और शीघ्र समाधान की उम्मीद लगाए बैठे हैं।
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