किन्नौर टापरी में विश्व की पहली भू-तापीय ऊर्जा आधारित सेब कोल्ड स्टोरेज का निरीक्षण
किन्नौर टापरी में विश्व की पहली भू-तापीय ऊर्जा आधारित सेब कोल्ड स्टोरेज का निरीक्षण

Post by : Himachal Bureau

April 14, 2026 5:47 p.m. 117

किन्नौर जिले के टापरी क्षेत्र में आज एक महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक विकास देखने को मिला, जब मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने यहां स्थापित एक अनोखी और आधुनिक सुविधा का निरीक्षण किया। यह सुविधा विश्व की पहली ऐसी इकाई मानी जा रही है, जो पूरी तरह से भू-तापीय ऊर्जा पर आधारित है और इसमें सेब सहित अन्य फलों के भंडारण और सुखाने की व्यवस्था की गई है। यह परियोजना राज्य के बागवानी क्षेत्र में तकनीकी बदलाव की दिशा में एक बड़ा कदम मानी जा रही है।

यह संयुक्त इकाई लगभग 1,000 टन क्षमता वाली सेब कोल्ड स्टोरेज प्रणाली है, जिसे हिमाचल प्रदेश बागवानी उत्पादन विपणन एवं प्रसंस्करण निगम (एचपीएमसी) और आइसलैंड की एक विदेशी कंपनी के बीच हुए समझौता ज्ञापन (MoU) के तहत विकसित किया गया है। इस परियोजना का मुख्य उद्देश्य किसानों को बेहतर भंडारण सुविधा उपलब्ध कराना और फलों की बर्बादी को कम करना है।

मुख्यमंत्री ने जानकारी देते हुए बताया कि पिछले दो वर्षों में इस आधुनिक इकाई के माध्यम से कुल 16,963 किलोग्राम फलों का सफलतापूर्वक फल प्रसंस्करण किया गया है। इनमें से 5,105 किलोग्राम फल नवंबर 2024 से फरवरी 2025 के बीच और 11,948 किलोग्राम फल जून 2025 से जनवरी 2026 के बीच प्रोसेस किए गए हैं। यह आंकड़े इस बात का प्रमाण हैं कि यह तकनीक धीरे-धीरे क्षेत्र में अपनी उपयोगिता साबित कर रही है।

यह पूरी प्रणाली पारंपरिक बिजली आधारित तकनीकों से बिल्कुल अलग है। इसमें फलों को सुरक्षित रखने और सुखाने के लिए प्राकृतिक गर्म जल स्रोतों से प्राप्त ऊर्जा का उपयोग किया जाता है। किन्नौर क्षेत्र पहले से ही अपने प्राकृतिक गर्म जल स्रोतों के लिए प्रसिद्ध है, और अब इसी प्राकृतिक संसाधन का उपयोग कृषि क्षेत्र में किया जा रहा है।

इस परियोजना को एचपीएमसी और अंतरराष्ट्रीय सहयोग के माध्यम से विकसित किया गया है, जिससे यह राज्य के किसानों के लिए एक नई उम्मीद बनकर सामने आई है। यह न केवल ऊर्जा की बचत करता है, बल्कि पर्यावरण के अनुकूल कृषि पद्धतियों को भी बढ़ावा देता है।

स्थानीय किसानों और बागवानों को उम्मीद है कि इस आधुनिक सुविधा से भविष्य में उन्हें अपने उत्पादों के लिए बेहतर मूल्य मिलेगा और फलों की गुणवत्ता भी लंबे समय तक सुरक्षित रह सकेगी। यह पूरी परियोजना किन्नौर जैसे पहाड़ी क्षेत्र में तकनीकी प्रगति का एक मजबूत उदाहरण बनकर उभरी है।

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