पालमपुर डिपो में इलेक्ट्रिक बस का दो दिवसीय परीक्षण आरंभ, विधायक ने किया निरीक्षण
पालमपुर डिपो में इलेक्ट्रिक बस का दो दिवसीय परीक्षण आरंभ, विधायक ने किया निरीक्षण

Author : Rajesh Vyas

Feb. 21, 2026 12:06 p.m. 2205

हिमाचल प्रदेश को हरित और पर्यावरण अनुकूल राज्य बनाने के उद्देश्य से प्रदेश सरकार लगातार ठोस कदम उठा रही है। इसी संकल्प को आगे बढ़ाते हुए पालमपुर बस डिपो में इलेक्ट्रिक बस का दो दिवसीय परीक्षण आरंभ किया गया। यह पहल न केवल परिवहन व्यवस्था को आधुनिक बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण है, बल्कि प्रदूषण कम करने और स्वच्छ वातावरण सुनिश्चित करने की दिशा में भी एक बड़ा प्रयास माना जा रहा है।

प्रदेश सरकार का लक्ष्य है कि आने वाले समय में सार्वजनिक परिवहन को अधिक पर्यावरण हितैषी बनाया जाए। इसी क्रम में पारंपरिक डीजल बसों की जगह चरणबद्ध तरीके से इलेक्ट्रिक बसों को शामिल करने की योजना बनाई गई है। परीक्षण के पहले दिन इलेक्ट्रिक बस को पालमपुर से चढ़ियार-सेरी मोलग तथा सेरी मोलग से पुनः पालमपुर मार्ग पर चलाया गया। इस दौरान बस की चढ़ाई, ढलान, मोड़ और लंबी दूरी की क्षमता का बारीकी से आकलन किया गया।

हिमाचल प्रदेश का भौगोलिक स्वरूप पहाड़ी और दुर्गम है, ऐसे में किसी भी नई बस को नियमित संचालन से पहले विभिन्न परिस्थितियों में परखना आवश्यक होता है। इसी कारण परीक्षण के दौरान तकनीकी विशेषज्ञों ने बैटरी की क्षमता, ब्रेक प्रणाली, गति संतुलन और ऊर्जा खपत जैसे पहलुओं का विशेष ध्यान रखा।

इस अवसर पर विधायक आशीष बुटेल ने पालमपुर बस स्टैंड पर बस का निरीक्षण किया। उन्होंने एचआरटीसी अधिकारियों से तकनीकी विशेषताओं और परीक्षण प्रक्रिया की विस्तृत जानकारी प्राप्त की।

विधायक ने स्वयं पालमपुर से चंदपुर-गलूलंगा मार्ग पर सुभाष चौक तक बस में सफर किया और इसके संचालन का अनुभव साझा किया। उन्होंने बताया कि बस का संचालन बेहद शांत और सुगम है। यात्रियों को झटकों से मुक्त और आरामदायक यात्रा का अनुभव मिलेगा।

मीडिया से बातचीत करते हुए विधायक ने मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंदर सिंह सुक्खू और उप-मुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि प्रदेश के पर्यावरण को स्वच्छ और प्रदूषण मुक्त बनाने के लिए एचआरटीसी के बेड़े में लगभग 300 नई इलेक्ट्रिक बसें शामिल की जा रही हैं।

उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रदेश के विभिन्न जिलों में इन बसों के प्रोटोटाइप का परीक्षण किया जा रहा है, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि पहाड़ी और दुर्गम क्षेत्रों में इनका प्रदर्शन संतोषजनक रहे। परीक्षण रिपोर्ट के आधार पर यह तय किया जाएगा कि किस मार्ग पर कौन सी बस सबसे उपयुक्त रहेगी।

विधायक ने कहा कि डीजल बसों की तुलना में इलेक्ट्रिक बसें अधिक पर्यावरण अनुकूल हैं। ये बसें धुआं रहित हैं, जिससे वायु प्रदूषण में कमी आएगी। साथ ही इनका शोर भी बहुत कम होता है, जिससे यात्रियों को शांत और सुखद यात्रा का अनुभव मिलेगा। उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य केवल नई बसें चलाना नहीं, बल्कि एक दीर्घकालिक परिवहन नीति तैयार करना है, जिससे पर्यावरण संरक्षण और यात्री सुविधा दोनों सुनिश्चित हो सकें।

विधायक ने विश्वास व्यक्त किया कि परीक्षण रिपोर्ट और विभागीय सुझावों के आधार पर शीघ्र ही पालमपुर के प्रमुख मार्गों पर इलेक्ट्रिक बसों का नियमित संचालन शुरू कर दिया जाएगा। इससे न केवल स्थानीय यात्रियों को बेहतर सुविधा मिलेगी, बल्कि प्रदेश की हरित छवि को भी मजबूती मिलेगी।

उन्होंने कहा कि यह पहल आने वाले समय में परिवहन व्यवस्था में सकारात्मक बदलाव लाएगी और युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर भी उत्पन्न कर सकती है। इस अवसर पर वूल फेडरेशन निदेशक मंडल के सदस्य त्रिलोक चंद, एचआरटीसी के मंडल प्रबंधक पंकज चड्ढा, क्षेत्रीय प्रबंधक नितेश शर्मा सहित निगम के अन्य अधिकारी और कर्मचारी उपस्थित रहे। सभी ने इस पहल को प्रदेश के लिए एक महत्वपूर्ण कदम बताया।

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