पालमपुर कृषि विश्वविद्यालय की मई सलाह, किसानों के लिए फसल व पशुपालन गाइड
पालमपुर कृषि विश्वविद्यालय की मई सलाह, किसानों के लिए फसल व पशुपालन गाइड

Author : Rajesh Vyas

May 15, 2026 5:56 p.m. 110

चौधरी सरवण कुमार हिमाचल प्रदेश कृषि विश्वविद्यालय, पालमपुर के प्रसार शिक्षा निदेशालय द्वारा मई 2026 के दूसरे पखवाड़े के लिए किसानों और पशुपालकों हेतु विस्तृत कृषि एवं पशुपालन सलाह जारी की गई है। यह सलाह मौसम पूर्वानुमान को ध्यान में रखते हुए तैयार की गई है, जिसका उद्देश्य किसानों को बेहतर उत्पादन और फसल सुरक्षा के लिए सही दिशा देना है।

इस कृषि सलाह में सबसे पहले अन्न एवं चारा फसलों पर ध्यान केंद्रित किया गया है। धान की खेती के लिए दोमट मिट्टी को सबसे उपयुक्त बताया गया है। धान की नर्सरी की बुआई समय अनुसार करने और बीज उपचार के लिए बाविस्टिन के उपयोग की सलाह दी गई है। साथ ही आर.पी.-2421, सुकरा धान-1 और बासमती किस्मों को उन्नत फसल के रूप में बताया गया है। मक्का की बीजाई के लिए अलग-अलग पर्वतीय क्षेत्रों के अनुसार समय निर्धारित किया गया है और पंक्ति में बुवाई करने पर जोर दिया गया है।

इसके अलावा मक्का को चारे के रूप में भी उपयोगी बताया गया है, जिससे गर्मी के मौसम में पशुओं के लिए पर्याप्त हरा चारा उपलब्ध हो सके। अफ्रीकन टॉल जैसी किस्मों को अधिक उपज देने वाली बताया गया है। सब्जी उत्पादन के तहत किसानों को सलाह दी गई है कि निचले और मध्य पर्वतीय क्षेत्रों में टमाटर, बैंगन, मिर्च, शिमला मिर्च, कद्दू वर्गीय फसलों की निराई-गुड़ाई करें और उचित मात्रा में खाद एवं सिंचाई का प्रयोग करें। फूलगोभी, भिंडी, फ्रांसबीन, खीरा, करेला, तोरी जैसी फसलों की सही समय पर बुवाई और रोपाई पर भी जोर दिया गया है। उन्नत प्रजातियों के चयन और उचित दूरी पर पौध लगाने की सलाह दी गई है।

ऊंचाई वाले क्षेत्रों में सब्जियों जैसे फूलगोभी, बंदगोभी, ब्रोकली, गाजर, मूली और मटर की निराई-गुड़ाई और यूरिया खाद के प्रयोग की सलाह दी गई है। वहीं असिंचित क्षेत्रों में जिमीकंद की रोपाई और मल्च के उपयोग को लाभकारी बताया गया है। फसल संरक्षण के अंतर्गत पौधों को कमरतोड़ रोग, लाल बीटल, कटुआ कीट और झुलसा रोग से बचाने के लिए विभिन्न रसायनों और उपचार विधियों का उपयोग करने की सलाह दी गई है।

पशुपालन में गर्मी के मौसम को ध्यान में रखते हुए पशुओं को धूप, लू और गर्म हवाओं से बचाने, पर्याप्त पानी और संतुलित आहार देने की सलाह दी गई है। पशुओं में होने वाली बीमारियों से बचाव के लिए टीकाकरण और नियमित जांच पर जोर दिया गया है। मछली पालन करने वाले किसानों को तालाबों में पानी की उचित गहराई और ऑक्सीजन स्तर बनाए रखने की सलाह दी गई है। विश्वविद्यालय ने किसानों से अपील की है कि वे अपने क्षेत्र की परिस्थितियों के अनुसार अधिक जानकारी के लिए कृषि विज्ञान केंद्र या एटिक हेल्पलाइन से संपर्क करें।

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