कांगड़ा में पोक्सो पीड़िता की पहचान उजागर करने पर आरोपी पर केस दर्ज
कांगड़ा में पोक्सो पीड़िता की पहचान उजागर करने पर आरोपी पर केस दर्ज

Post by : Himachal Bureau

May 2, 2026 2:19 p.m. 114

हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले में पोक्सो अधिनियम के तहत दर्ज एक संवेदनशील मामले में पीड़िता की पहचान सार्वजनिक करना एक व्यक्ति को भारी पड़ गया। धर्मशाला स्थित अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश फास्ट ट्रैक स्पेशल कोर्ट (पोक्सो) ने मामले की गंभीरता को देखते हुए आरोपी के खिलाफ सख्त रुख अपनाया है। अदालत के आदेश के बाद थाना इंदौरा पुलिस ने आरोपी के खिलाफ विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज कर जांच प्रक्रिया तेज कर दी है। इस कार्रवाई ने सोशल मीडिया पर संवेदनशील मामलों की जानकारी साझा करने वालों के लिए कड़ा संदेश दिया है।

जानकारी के अनुसार वर्ष 2025 में थाना इंदौरा में पोक्सो अधिनियम के तहत एक मामला दर्ज हुआ था। आरोप है कि इंदौरा विधानसभा क्षेत्र के गांव कुड़सा निवासी अजय शर्मा उर्फ लाइटी ने सोशल मीडिया मंच पर पीड़िता की पहचान और घटनास्थल से जुड़ी संवेदनशील जानकारी सार्वजनिक कर दी। यह जानकारी सामने आने के बाद स्थानीय स्तर पर चिंता बढ़ गई, क्योंकि कानून के तहत किसी भी नाबालिग पीड़िता की पहचान उजागर करना गंभीर अपराध माना जाता है।

बताया जा रहा है कि जब एक समाजसेवी की नजर सोशल मीडिया पर प्रसारित इस सामग्री पर पड़ी, तो उन्होंने तत्काल पुलिस प्रशासन को लिखित शिकायत देकर कार्रवाई की मांग की। शिकायतकर्ता का आरोप था कि पर्याप्त साक्ष्य उपलब्ध होने के बावजूद शुरुआती स्तर पर कोई प्रभावी कदम नहीं उठाया गया। इसके बाद शिकायतकर्ता ने स्वयं आवश्यक प्रमाण जुटाए और अधिवक्ता के माध्यम से अदालत का दरवाजा खटखटाया।

सुनवाई के दौरान न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत दस्तावेजों और साक्ष्यों का गहन परीक्षण किया गया। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश ने मामले को गंभीर मानते हुए पाया कि प्रथम दृष्टया आरोपी के खिलाफ अपराध बनता है। इसके बाद अदालत ने थाना इंदौरा को आरोपी के खिलाफ तत्काल प्राथमिकी दर्ज करने के आदेश दिए। साथ ही पुलिस को निर्देश दिया गया कि निष्पक्ष, समयबद्ध और विस्तृत जांच पूरी कर निर्धारित समय सीमा के भीतर रिपोर्ट न्यायालय में प्रस्तुत की जाए।

डीएसपी इंदौरा ने पुष्टि की कि अदालत के आदेशों का पालन करते हुए आरोपी के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया गया है। आरोपी की गिरफ्तारी के लिए विशेष पुलिस टीमों का गठन किया गया है और जल्द गिरफ्तारी की बात कही गई है। यह मामला स्पष्ट करता है कि नाबालिग पीड़ितों की पहचान उजागर करना न केवल सामाजिक रूप से संवेदनशील विषय है, बल्कि कानूनन गंभीर अपराध भी है। अदालत की इस कार्रवाई को बाल संरक्षण कानूनों की सख्ती और न्यायिक जवाबदेही का महत्वपूर्ण उदाहरण माना जा रहा है।

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