Post by : Himachal Bureau
हिमाचल प्रदेश के लोक भवन में गुजरात और महाराष्ट्र राज्य के स्थापना दिवस के अवसर पर एक विशेष सम्मान समारोह और सांस्कृतिक मिलन कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस अवसर पर हिमाचल प्रदेश में रह रहे गुजरात और महाराष्ट्र के लोगों को आमंत्रित किया गया, ताकि वे अपने-अपने राज्यों के स्थापना दिवस को उत्साह, गर्व और राष्ट्रीय एकता की भावना के साथ मना सकें। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य देश की विविध संस्कृतियों को एक मंच पर लाकर भाईचारे, पारस्परिक सम्मान और सांस्कृतिक समन्वय को बढ़ावा देना रहा।
समारोह के दौरान गुजरात और महाराष्ट्र से जुड़े प्रतिभागियों ने राज्यपाल से मुलाकात कर अपने राज्यों की समृद्ध परंपराओं, सांस्कृतिक विरासत, रीति-रिवाजों और सामाजिक मूल्यों की जानकारी साझा की। इस संवाद ने न केवल विभिन्न राज्यों के लोगों को एक-दूसरे की संस्कृति को समझने का अवसर दिया, बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर आपसी जुड़ाव और सम्मान की भावना को भी मजबूत किया। उपस्थित लोगों ने अपने सांस्कृतिक अनुभव साझा करते हुए भारत की विविधता को उसकी सबसे बड़ी शक्ति बताया।
कार्यक्रम में राज्यपाल ने अतिथियों का पारंपरिक हिमाचली टोपी और मफलर पहनाकर सम्मान किया। यह सम्मान हिमाचल प्रदेश की समृद्ध परंपरा, आत्मीयता और अतिथि सत्कार की भावना का प्रतीक बना। इस दौरान उपस्थित लोगों ने हिमाचली संस्कृति और आतिथ्य की सराहना करते हुए इसे यादगार अनुभव बताया।
सभा को संबोधित करते हुए राज्यपाल ने कहा कि भारत अनेक भाषाओं, संस्कृतियों और परंपराओं वाला देश होने के बावजूद एक मजबूत राष्ट्र के रूप में खड़ा है। उन्होंने कहा कि देश की सबसे बड़ी शक्ति उसकी विविधता में एकता है। “वसुधैव कुटुंबकम्” की भावना भारतीय संस्कृति की मूल आत्मा है, जो पूरे राष्ट्र को एक परिवार की तरह जोड़ती है।
उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजन केवल स्थापना दिवस मनाने तक सीमित नहीं होते, बल्कि ये लोगों को एक-दूसरे को बेहतर समझने, सांस्कृतिक विविधता को अपनाने और राष्ट्रीय एकता को सशक्त बनाने का अवसर प्रदान करते हैं। लोक भवन जैसे मंच इस दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इस अवसर पर राज्यपाल सचिव संदीप भारद्वाज सहित कई गणमान्य लोग भी उपस्थित रहे। यह आयोजन सांस्कृतिक समृद्धि, सामाजिक सौहार्द और राष्ट्रीय एकता को मजबूत करने की दिशा में एक प्रेरणादायक पहल साबित हुआ।
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