Post by : Ram Chandar
कांगड़ा: प्रदेश सरकार की सौर और ग्रीन एनर्जी को बढ़ावा देने की पहल अब पहले से भी अधिक तेज़ी से आगे बढ़ रही है। इस दिशा में राज्य सरकार ने कांगड़ा जिले के हर विधानसभा क्षेत्र में सोलर एनर्जी से बिजली उत्पादन की योजना को लागू करने का निर्णय लिया है। स्मार्ट सिटी धर्मशाला में स्थापित प्रोजेक्ट की तर्ज पर अब जिले के अन्य क्षेत्रों में भी सोलर एनर्जी के माध्यम से बिजली तैयार की जाएगी और इसे बेचकर राजस्व भी प्राप्त किया जाएगा। इस पहल का उद्देश्य न केवल ग्रीन एनर्जी को बढ़ावा देना है, बल्कि स्थानीय पंचायतों और ग्रामीण इलाकों में आर्थिक और सामाजिक विकास को भी मजबूत बनाना है।
सरकार के ग्रीन पंचायत प्रोग्राम और वर्ल्ड बैंक फाइनांस प्रोग्राम के तहत चयनित पंचायतों में प्रत्येक में दो करोड़ रुपए की लागत से ग्राउंड माउंटेन सोलर पॉवर प्लांट स्थापित किए जाएंगे। पहले चरण में देहरा उपमंडल की ग्राम पंचायत मोहाल, नूरपुर उपमंडल की ग्राम पंचायत पंजाड़ा और इंदौरा उपमंडल की ग्राम पंचायत बसंतपुर को इस योजना में शामिल किया गया है। इन पंचायतों में लगभग 500 किलोवॉट क्षमता के सोलर पॉवर प्लांट स्थापित किए जाएंगे। प्रत्येक प्लांट को लगभग 20 से 22 कनाल भूमि पर स्थापित किया जाएगा, जिससे बिजली उत्पादन की क्षमता पर्याप्त होगी और जिले की ऊर्जा जरूरतों में योगदान मिलेगा।
इस प्रोजेक्ट से हर साल लाखों रुपए की बिजली तैयार होगी। तैयार बिजली के वितरण से होने वाली आय का 40 प्रतिशत हिस्सा सीधे संबंधित पंचायत के विकास कार्यों में खर्च किया जाएगा। इसमें सड़क निर्माण, जल आपूर्ति, स्कूलों और स्वास्थ्य केंद्रों की सुविधाओं को बेहतर बनाने जैसे कार्य शामिल होंगे। 30 प्रतिशत हिस्सा हिम ऊर्जा को दिया जाएगा, जो इस प्रोजेक्ट के रख-रखाव और प्रबंधन में सहायता करेगा। राज्य सरकार को 20 प्रतिशत आय प्राप्त होगी, जो अन्य सरकारी विकास योजनाओं में खर्च किया जाएगा। वहीं, 10 प्रतिशत राशि पंचायतों के विधवा और अनाथ बच्चों के कल्याण पर खर्च की जाएगी, ताकि गरीब और वंचित वर्ग को भी इसका लाभ मिल सके।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस पहल से न केवल ग्रीन एनर्जी को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि पंचायतों की आर्थिक स्थिति मजबूत होगी और ग्रामीण विकास में भी महत्वपूर्ण योगदान मिलेगा। स्थानीय पंचायतें इस आय का उपयोग शिक्षा, स्वास्थ्य और सामाजिक कल्याण के क्षेत्रों में कर सकेंगी। इसके अलावा, इस परियोजना से पर्यावरण संरक्षण और ऊर्जा सुरक्षा के क्षेत्र में भी सकारात्मक बदलाव आएगा।
जिला प्रशासन और पंचायतों का कहना है कि इस योजना से ग्रामीण इलाकों में रोजगार के अवसर भी उत्पन्न होंगे, क्योंकि सोलर पॉवर प्लांट की स्थापना और रख-रखाव में स्थानीय लोगों को काम मिल सकेगा। इसके साथ ही युवा वर्ग को तकनीकी प्रशिक्षण और ऊर्जा क्षेत्र में अनुभव प्राप्त करने का अवसर मिलेगा।
प्रदेश सरकार की यह पहल हिमाचल प्रदेश को ग्रीन एनर्जी के क्षेत्र में आगे ले जाने और सतत विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगी। इससे न केवल जिले की ऊर्जा जरूरतें पूरी होंगी, बल्कि पंचायतों की वित्तीय स्थिति मजबूत होकर ग्रामीण विकास की गति भी तेज होगी।
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