Post by : Himachal Bureau
हिमाचल प्रदेश केंद्रीय विश्वविद्यालय के धर्मशाला परिसर के निर्माण और उससे जुड़ी प्रक्रियाओं में हो रही देरी को लेकर हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय ने राज्य सरकार से विस्तृत जवाब तलब किया है। इस महत्वपूर्ण मामले की सुनवाई के दौरान न्यायालय ने परियोजना की वर्तमान स्थिति पर शपथ पत्र सहित विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। अदालत का यह रुख इस बात को दर्शाता है कि लंबे समय से लंबित इस परियोजना की प्रगति को लेकर न्यायालय गंभीर है और वह वास्तविक स्थिति को जानना चाहता है।
यह मामला मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष सुनवाई के लिए प्रस्तुत हुआ। सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से यह पक्ष रखा गया कि धर्मशाला परिसर परियोजना को लेकर अब तक अपेक्षित गति से कार्य नहीं हो पाया है। अदालत को बताया गया कि राज्य सरकार और उच्च शिक्षा विभाग द्वारा दायर किए गए उत्तर में स्वयं यह स्वीकार किया गया है कि भूमि हस्तांतरण की प्रक्रिया अभी तक पूरी नहीं हुई है और यह कार्य अब भी जारी है।
सुनवाई के दौरान यह भी सामने आया कि परियोजना के लिए आवश्यक लगभग 30 करोड़ रुपये की राशि का प्रावधान अभी तक नहीं हो सका है। सरकार द्वारा दायर शपथ पत्र में कहा गया है कि धनराशि उपलब्ध करवाने का विषय संबंधित विभागों के विचाराधीन है। हालांकि याचिकाकर्ता पक्ष ने इस स्थिति पर चिंता जताते हुए कहा कि केवल प्रक्रियात्मक जानकारी देने से परियोजना की वास्तविक प्रगति स्पष्ट नहीं होती।
याचिकाकर्ता ने न्यायालय को बताया कि सरकार की ओर से दिए गए जवाब में परियोजना की समय-सीमा, कार्यान्वयन की स्थिति, जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका, वर्तमान प्रगति और संभावित पूर्णता तिथि के बारे में कोई स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई है। उनका कहना था कि केवल भविष्य में कार्य होने के संकेत दिए गए हैं, जबकि जमीनी स्तर पर क्या प्रगति हुई है, इसकी विस्तृत जानकारी उपलब्ध नहीं कराई गई।
अदालत में यह भी दलील दी गई कि धर्मशाला परिसर से जुड़ी यह परियोजना प्रदेश के हजारों विद्यार्थियों और उच्च शिक्षा व्यवस्था से सीधे तौर पर जुड़ी हुई है। ऐसे में इसके निर्माण में हो रही देरी का असर शिक्षा क्षेत्र पर पड़ रहा है। इसलिए सरकार को परियोजना की वास्तविक स्थिति सार्वजनिक रूप से स्पष्ट करनी चाहिए और यह बताना चाहिए कि अब तक कौन-कौन से ठोस कदम उठाए गए हैं।
याचिकाकर्ता पक्ष ने न्यायालय से अनुरोध किया कि राज्य सरकार को एक समेकित और विस्तृत रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया जाए। इस रिपोर्ट में परियोजना की वर्तमान स्थिति, अब तक की प्रगति, भूमि हस्तांतरण प्रक्रिया, वित्तीय व्यवस्था तथा आगे की कार्ययोजना का पूरा विवरण शामिल किया जाए। साथ ही यह भी स्पष्ट किया जाए कि 30 करोड़ रुपये की राशि अब तक उपलब्ध क्यों नहीं हो पाई और परियोजना को आगे बढ़ाने के लिए कौन-कौन से कदम उठाए गए हैं।
सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद उच्च न्यायालय ने प्रतिवादियों को 22 जुलाई तक अथवा उससे पहले विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया। न्यायालय ने यह भी संकेत दिया कि यदि निर्धारित समय सीमा के भीतर रिपोर्ट दाखिल नहीं की गई तो संबंधित पक्षों पर लागत भी लगाई जा सकती है।
अदालत के इस निर्देश के बाद अब सभी की निगाहें राज्य सरकार द्वारा प्रस्तुत की जाने वाली रिपोर्ट पर टिकी हैं। माना जा रहा है कि इस रिपोर्ट से धर्मशाला परिसर परियोजना की वास्तविक स्थिति स्पष्ट होगी और यह भी पता चलेगा कि लंबे समय से लंबित इस महत्वपूर्ण शैक्षणिक परियोजना को पूरा करने की दिशा में आगे क्या कदम उठाए जाएंगे। हालांकि छात्रों, अभिभावकों और शिक्षा जगत से जुड़े लोगों को उम्मीद है कि इस मामले में जल्द ठोस प्रगति देखने को मिलेगी और विश्वविद्यालय परिसर के निर्माण का रास्ता साफ होगा।
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