Author : Rajesh Vyas
हिमाचल प्रदेश के पालमपुर स्थित कृषि विश्वविद्यालय में इन दिनों कर्मचारियों के बीच भारी असंतोष का माहौल बना हुआ है। मार्च महीने की सैलरी और पेंशन 7 अप्रैल तक भी जारी नहीं हो पाई है, जिससे कर्मचारियों, वैज्ञानिकों और प्राध्यापकों को गंभीर आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। लगातार हो रही देरी ने न केवल कर्मचारियों के दैनिक जीवन को प्रभावित किया है, बल्कि उनके परिवारों की जरूरतों पर भी सीधा असर डाला है।
विश्वविद्यालय के नॉन टीचिंग कर्मचारियों ने इस मुद्दे को गंभीरता से उठाते हुए प्रशासन के खिलाफ आवाज बुलंद की है। नॉन टीचिंग कर्मचारी यूनियन के महासचिव नरेश कुमार शर्मा ने इस स्थिति पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि यह समस्या अब एक स्थायी रूप लेती जा रही है। उनका कहना है कि लगभग हर दूसरे महीने वेतन और पेंशन में देरी होना कर्मचारियों के लिए एक बड़ी चुनौती बन चुका है।
अप्रैल का महीना कर्मचारियों के लिए आर्थिक दृष्टि से काफी महत्वपूर्ण होता है, क्योंकि इस समय बच्चों के स्कूलों में एडमिशन, फीस जमा करने और अन्य घरेलू खर्चों का दबाव बढ़ जाता है। ऐसे में समय पर वेतन न मिलने से कर्मचारियों को अपने जरूरी खर्चों को पूरा करने में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। कई कर्मचारी ऐसे भी हैं जो बैंक से लिए गए लोन की किश्तें समय पर नहीं चुका पा रहे हैं, जिससे उन पर अतिरिक्त बैंक लोन का दबाव और पेनल्टी का खतरा भी बढ़ता जा रहा है।
नरेश कुमार शर्मा ने यह भी कहा कि इस तरह की स्थिति विश्वविद्यालय प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करती है। उन्होंने इसे स्पष्ट रूप से प्रशासनिक लापरवाही बताते हुए कहा कि यदि समय रहते इस समस्या का समाधान नहीं किया गया, तो कर्मचारियों का आक्रोश और बढ़ सकता है।
उन्होंने जानकारी दी कि इस समस्या के समाधान के लिए विश्वविद्यालय के कुछ अधिकारी पिछले दो दिनों से शिमला में प्रयास कर रहे हैं, लेकिन अभी तक सैलरी और पेंशन जारी होने को लेकर कोई ठोस जानकारी सामने नहीं आई है। इस अनिश्चितता के कारण कर्मचारियों में चिंता और असमंजस की स्थिति बनी हुई है।
कर्मचारी यूनियन ने विश्वविद्यालय प्रशासन से मांग की है कि वे इस मुद्दे को प्राथमिकता के आधार पर हल करें और भविष्य में ऐसी स्थिति दोबारा न आए, इसके लिए स्थायी समाधान निकाला जाए। उन्होंने सुझाव दिया कि जिस प्रकार राज्य सरकार के अन्य विभागों में हर महीने की पहली तारीख को नियमित रूप से वेतन और पेंशन जारी की जाती है, उसी तरह विश्वविद्यालय में भी यह व्यवस्था लागू की जानी चाहिए।
कर्मचारियों का कहना है कि यदि समय पर भुगतान सुनिश्चित किया जाता है, तो वे अपने कार्यों को और अधिक मन लगाकर कर पाएंगे और संस्थान के विकास में बेहतर योगदान दे सकेंगे। उन्होंने उम्मीद जताई कि प्रशासन उनकी समस्याओं को समझेगा और जल्द से जल्द पेंशन और वेतन जारी करने के लिए आवश्यक कदम उठाएगा।
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