NEET पेपर लीक मामले में FIR और जांच को लेकर विपक्ष ने उठाए सवाल
NEET पेपर लीक मामले में FIR और जांच को लेकर विपक्ष ने उठाए सवाल

Post by : Himachal Bureau

May 13, 2026 4:18 p.m. 115

NEET पेपर लीक मामले ने अब राजस्थान की राजनीति में बड़ा विवाद खड़ा कर दिया है। इस पूरे मामले में भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया है। कांग्रेस नेताओं ने इस केस को लेकर सरकार पर गंभीर सवाल उठाए हैं, जबकि भाजपा की ओर से अभी तक इन आरोपों पर स्पष्ट जवाब नहीं दिया गया है।

पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने अपने X अकाउंट पर पोस्ट करते हुए कहा कि NEET पेपर लीक मामले में गिरफ्तार आरोपी दिनेश बिंवाल भाजपा का पदाधिकारी है। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या इसी वजह से राज्य की भाजपा सरकार ने पूरे नौ दिनों तक FIR दर्ज नहीं की और मामले को दबाने की कोशिश की गई। गहलोत ने आरोप लगाया कि सरकार युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने वाले पेपर लीक केस में शामिल लोगों को संरक्षण दे रही है।

इस मुद्दे पर नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने भी सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि गिरफ्तार आरोपी भाजपा से जुड़ा हुआ है और इसी कारण सरकार ने समय पर कार्रवाई नहीं की। जूली ने आरोप लगाया कि सरकार ने जानबूझकर मामले को दबाने की कोशिश की, जिससे यह मामला और अधिक गंभीर बन गया है।

वहीं, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने भी इस पूरे प्रकरण पर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने कहा कि पेपर लीक में शामिल दो आरोपियों के भाजपा नेताओं से संबंध सामने आ रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि कुछ आरोपियों के फोटो भी भाजपा नेताओं के साथ सामने आए हैं। डोटासरा ने कहा कि यह केवल संयोग नहीं हो सकता और पूरे मामले में राजनीतिक संरक्षण की आशंका है।

जांच एजेंसियों के अनुसार यह मामला केवल राजस्थान तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका नेटवर्क कई राज्यों तक फैला हुआ है। जांच में सामने आया है कि पेपर लीक का शुरुआती केंद्र महाराष्ट्र की प्रिंटिंग प्रेस था, जिसके बाद यह हरियाणा और अन्य राज्यों तक पहुंचा। राजस्थान में इसे जमवारामगढ़ के दो भाइयों तक पहुंचाया गया, जिन्होंने इसे आगे छात्रों तक भेजा।

इस पूरे मामले की जांच अब CBI जांच के हाथों में है। एजेंसियां पूरे नेटवर्क को खंगाल रही हैं और कई आरोपियों से पूछताछ जारी है। अब तक 150 से अधिक लोगों से पूछताछ हो चुकी है और दो दर्जन से ज्यादा आरोपियों को CBI को सौंपा गया है। इस विवाद ने देशभर में छात्रों और अभिभावकों के बीच चिंता बढ़ा दी है। लाखों छात्रों के भविष्य से जुड़ा यह मामला अब राजनीतिक बहस का केंद्र बन गया है, जिससे परीक्षा प्रणाली पर भी गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।

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