दिव्यांग नेताओं की प्रेरक कहानी: संघर्ष से सफलता तक
दिव्यांग नेताओं की प्रेरक कहानी: संघर्ष से सफलता तक

Post by : Himachal Bureau

Jan. 7, 2026 5:31 p.m. 1708

भारतीय लोकतंत्र की सबसे खास बात यह है कि यहाँ नेता का मूल्य शारीरिक क्षमता या रंग-रूप से नहीं, बल्कि जनता के विश्वास, मेहनत और दूरदर्शी सोच से तय होता है। कई ऐसे दिव्यांग नेता हैं जिन्होंने अपनी शारीरिक कठिनाइयों के बावजूद राजनीति में बड़ा मुकाम पाया और समाज के लिए मिसाल बने।

यमुना प्रसाद शास्त्री स्वतंत्रता संग्राम और गोवा मुक्ति आंदोलन के वीर योद्धा थे। पुर्तगाली पुलिस की गोली से उन्होंने एक आँख खो दी और बाद में पूरी दृष्टि भी। इसके बावजूद उन्होंने जनता पार्टी से मध्य प्रदेश की रीवा लोकसभा सीट जीती। नेत्रहीन होने के बावजूद संसद में सक्रिय रहे और जनता के मुद्दों को उठाया।

एस. जयपाल रेड्डी बचपन में पोलियो से प्रभावित हुए और जीवनभर बैसाखी के सहारे चले। इसके बावजूद उन्होंने कांग्रेस में चार बार लोकसभा और दो बार राज्यसभा की सदस्यता पाई। उनकी संसद में बहसें हमेशा यादगार रही।

अजीत जोगी छत्तीसगढ़ के पहले मुख्यमंत्री बने। सड़क दुर्घटना में पैरालाइज होने के बाद भी उन्होंने राजनीति और जनसेवा नहीं छोड़ी। उन्होंने अपनी पार्टी बनाई और हमेशा सक्रिय रहे।

हरिदेव जोशी, राजस्थान के मुख्यमंत्री, एक हाथ से दिव्यांग थे। इसके बावजूद उन्होंने राज्य में विकास, सामाजिक न्याय और जनकल्याण के कई कार्य किए।

शरद पवार को मुंह का कैंसर हुआ। इलाज के दौरान भी उन्होंने राजनीति नहीं छोड़ी और चार बार मुख्यमंत्री और केंद्रीय मंत्री बने।

एम. करुणानिधि, द्रविड़ आंदोलन के नेता, अंतिम वर्षों में व्हीलचेयर पर रहने के बावजूद पांच बार तमिलनाडु के मुख्यमंत्री बने और सामाजिक न्याय और संस्कृति की रक्षा की।

साधन गुप्ता बचपन में चेचक से पूरी तरह नेत्रहीन हो गए। इसके बावजूद उन्होंने वकालत की पढ़ाई की और 1953 में स्वतंत्र भारत के पहले नेत्रहीन सांसद बने। उन्होंने दिव्यांग अधिकारों और शिक्षा के लिए काम किया और नेशनल फेडरेशन ऑफ द ब्लाइंड की स्थापना की।

ये सभी नेता यह दिखाते हैं कि दिव्यांगता केवल शरीर की सीमा हो सकती है, लेकिन इरादों, मेहनत और सपनों की कोई सीमा नहीं होती। यमुना प्रसाद शास्त्री से लेकर साधन गुप्ता, अजीत जोगी, हरिदेव जोशी, शरद पवार और एम. करुणानिधि तक – इन सभी ने अपनी चुनौतियों को ताकत में बदला और देश के लिए प्रेरणा बनी।

#राजनीति #ताज़ा खबरें #भारत समाचार #भारतीय खबरें
अनुच्छेद
प्रायोजित
ट्रेंडिंग खबरें
मोनिका ठाकुर ने CSIR NET JRF में हासिल की ऑल इंडिया 65वीं रैंक, सराज का नाम किया रोशन 1 सितंबर 1972 को कांगड़ा से अलग बना था हमीरपुर जिला, जानें इतिहास बिजली महादेव मंदिर में चला सफाई अभियान, 2 क्विंटल प्लास्टिक कचरा हटाया हिमाचल में बढ़े स्वाइन फ्लू के मामले, इन लक्षणों को न करें नजरअंदाज नेपाल में फंसे हिमाचलियों की जानकारी दें, प्रशासन ने जारी किए निर्देश मणिमहेश यात्रा के पहले दिन 253 श्रद्धालु हुए रवाना, 20 सितंबर तक चलेगी यात्रा हिमाचल में स्वाइन फ्लू की दस्तक, इन लक्षणों को न करें नजरअंदाज हथलौंण की बेटी शिल्पा सोनी का चयन, बंगाणा में बनेंगी रसायन प्रवक्ता