Post by : Himachal Bureau
हिमाचल प्रदेश में एक से सात अप्रैल 2026 तक मौसम ने कई जिलों में अपने रौद्र रूप दिखाए। प्रदेश में इस अवधि के दौरान सामान्य से लगभग 82 प्रतिशत अधिक बारिश दर्ज की गई। मौसम विज्ञान केंद्र के अनुसार, इस समयावधि में सोलन, शिमला, मंडी और बिलासपुर में झमाझम बारिश हुई, जिससे स्थानीय जलाशयों में जलस्तर बढ़ा और किसानों के लिए कृषि गतिविधियों में भी राहत मिली। वहीं, ऊना और किन्नौर में सामान्य से कम बादल बरसे, जिससे वहां अपेक्षाकृत सूखा मौसम रहा।
मौसम विज्ञानियों के अनुसार, एक से सात अप्रैल के बीच सामान्य बारिश की मात्रा 15.2 मिलीमीटर मानी जाती है। इस वर्ष इसी अवधि में 27.6 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई, जो सामान्य से 82 फीसदी अधिक रही। विभिन्न जिलों में हुई बारिश के आंकड़े भी काफी प्रभावशाली हैं। बिलासपुर में सामान्य से 150 फीसदी अधिक बारिश दर्ज हुई, चंबा में 36 फीसदी, हमीरपुर में 20 फीसदी, कांगड़ा में 120 फीसदी, कुल्लू में 54 फीसदी, लाहौल-स्पीति में 75 फीसदी, मंडी में 216 फीसदी, शिमला में 271 फीसदी, सिरमौर में 82 फीसदी और सोलन में 485 फीसदी अधिक बारिश रिकॉर्ड की गई। इसके विपरीत, जिला ऊना में सामान्य से 9 फीसदी और किन्नौर में 12 फीसदी कम बारिश दर्ज की गई।
मौसम विज्ञान केंद्र शिमला के अनुसार, प्रदेश के अधिकतम तापमान में मंगलवार को सोमवार की तुलना में सात से आठ डिग्री सेल्सियस की कमी आई। इस दौरान कांगड़ा, कुल्लू, मंडी, शिमला और सोलन जिले के कई क्षेत्रों में अंधड़ और ओलावृष्टि का ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया। नागरिकों को चेतावनी दी गई है कि वे जोखिम वाले क्षेत्रों में अनावश्यक यात्रा से बचें और मौसम विभाग द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पालन करें।
मौसम विभाग ने यह भी बताया कि नौ अप्रैल को प्रदेश में मौसम खराब बना रहेगा। दस अप्रैल को धूप खिलने की संभावना है, जबकि 11 से 13 अप्रैल तक पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय होने के कारण कई जगह बारिश, बर्फबारी और अंधड़ के फिर से आसार हैं। विशेष रूप से ऊंचे पहाड़ी क्षेत्रों में बर्फबारी की संभावना बनी हुई है, जिससे सड़कों और मार्गों की स्थिति प्रभावित हो सकती है।
प्रदेश में जारी अलर्ट के मद्देनजर प्रशासन और आपदा प्रबंधन विभाग ने सभी जिलों में निगरानी बढ़ा दी है। अधिकारियों ने कहा कि संवेदनशील क्षेत्रों में अतिरिक्त सतर्कता बरती जा रही है और बिजली, जल, सड़क और अन्य सेवाओं के सुचारू संचालन को सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक तैयारियां की गई हैं।
हालांकि यह वर्ष अप्रैल में अपेक्षाकृत ठंडा और वर्षा-प्रधान शुरुआत हुई है, इसके बावजूद मौसम विभाग ने जनता से अपील की है कि वे मौसम की ताजा जानकारी पर ध्यान दें। बर्फबारी, तेज हवा, और कहीं कहीं आंधी के चलते पर्वतीय क्षेत्रों में सुरक्षित रहने के लिए सतर्कता जरूरी है।
इस मौसम के कारण कृषि, पर्यटन और स्थानीय जीवन पर भी प्रभाव पड़ा है। बागवानों को बारिश से फसलों को नुकसान पहुंचने की संभावना का ध्यान रखना होगा, जबकि पर्यटक और यात्रियों को सड़कों पर सुरक्षित यात्रा करने और प्रशासन द्वारा जारी चेतावनी का पालन करने की सलाह दी गई है।
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