हिमाचल सरकार फिर लेगी 700 करोड़ का कर्ज, बढ़ेगा आर्थिक बोझ
हिमाचल सरकार फिर लेगी 700 करोड़ का कर्ज, बढ़ेगा आर्थिक बोझ

Post by : Himachal Bureau

Aug. 1, 2026 12:26 p.m. 127

गंभीर वित्तीय परिस्थितियों से गुजर रही हिमाचल प्रदेश सरकार ने अपनी आर्थिक जरूरतों को पूरा करने के लिए एक बार फिर नया कर्ज लेने का निर्णय लिया है। राज्य सरकार 700 करोड़ रुपये का ऋण लेने जा रही है। यह राशि आगामी 5 अगस्त को प्रदेश सरकार के खाते में जमा होने की संभावना है। नए कर्ज के शामिल होने के बाद हिमाचल प्रदेश सरकार पर कुल कर्ज का बोझ 1,12,600 करोड़ रुपये से अधिक पहुंच जाएगा। लगातार बढ़ती देनदारियों और सीमित आय के साधनों के कारण राज्य सरकार को अपने नियमित खर्चों और वित्तीय जिम्मेदारियों को पूरा करने के लिए अतिरिक्त ऋण का सहारा लेना पड़ रहा है।

दो अलग-अलग अवधि के लिए लिया जाएगा कर्ज

वित्त विभाग से मिली जानकारी के अनुसार 700 करोड़ रुपये की यह राशि दो हिस्सों में ली जा रही है। इसमें 400 करोड़ रुपये का ऋण 18 वर्षों की अवधि के लिए लिया जाएगा। इस राशि की वापसी सरकार को 24 जून 2044 को ब्याज सहित करनी होगी। वहीं, 300 करोड़ रुपये का दूसरा ऋण 23 वर्षों की अवधि के लिए लिया जा रहा है। इसकी अदायगी ब्याज सहित 24 जून 2049 तक करनी होगी। सरकार ने लंबी अवधि के लिए यह ऋण लेने का फैसला किया है ताकि मौजूदा वित्तीय दबावों को कुछ हद तक नियंत्रित किया जा सके। राज्य की आर्थिक स्थिति और बढ़ते कर्ज को लेकर Himachal Loan Crisis, Himachal Pradesh Government, Government Debt, Shimla News, Financial Crisis और State Loan जैसे विषयों पर लोगों की नजर बनी हुई है।

हर महीने करोड़ों रुपये की देनदारियों का दबाव

प्रदेश सरकार पर हर महीने कई अनिवार्य खर्चों का भारी दबाव रहता है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार राज्य को अपनी नियमित देनदारियों को पूरा करने के लिए हर महीने लगभग 2800 करोड़ रुपये की आवश्यकता होती है। इसमें कर्मचारियों के वेतन भुगतान के लिए करीब 2000 करोड़ रुपये और पेंशन भुगतान के लिए लगभग 800 करोड़ रुपये खर्च किए जाते हैं। इसके अलावा पुराने कर्ज पर ब्याज चुकाने के लिए हर महीने लगभग 500 करोड़ रुपये और कर्ज के मूलधन की अदायगी के लिए करीब 300 करोड़ रुपये की जरूरत पड़ती है।

सीमित आय के कारण बढ़ रही वित्तीय चुनौती

हिमाचल प्रदेश जैसे पहाड़ी राज्य के सामने राजस्व बढ़ाने की चुनौती लगातार बनी हुई है। सीमित आय स्रोतों और बढ़ते खर्चों के बीच सरकार को अपनी वित्तीय व्यवस्था को संतुलित करना मुश्किल हो रहा है। राज्य सरकार के सामने वेतन, पेंशन, कर्ज भुगतान और अन्य जरूरी खर्चों को समय पर पूरा करने की जिम्मेदारी है। इन्हीं आर्थिक दबावों के चलते सरकार को समय-समय पर नया ऋण लेना पड़ रहा है।

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कुल कर्ज बढ़ने से बढ़ी चिंता

नए 700 करोड़ रुपये के कर्ज के बाद प्रदेश की कुल देनदारियों में और वृद्धि होगी। विशेषज्ञों के अनुसार लंबे समय तक बढ़ते कर्ज पर नियंत्रण के लिए आय के नए स्रोत विकसित करना और आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देना जरूरी होगा। सरकार की ओर से लगातार वित्तीय स्थिति को सुधारने और संसाधनों को मजबूत करने के प्रयास किए जा रहे हैं। आने वाले समय में राज्य की आर्थिक नीतियां और खर्च प्रबंधन यह तय करेंगे कि प्रदेश वित्तीय दबाव से किस तरह बाहर निकल पाता है।

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