हिमाचल सरकार का बड़ा फैसला, 100 से कम विद्यार्थियों वाले कॉलेजों का विलय, 39 स्कूल बंद
हिमाचल सरकार का बड़ा फैसला, 100 से कम विद्यार्थियों वाले कॉलेजों का विलय, 39 स्कूल बंद

Author : Rajesh Vyas

Feb. 20, 2026 12:35 p.m. 127

हिमाचल प्रदेश में शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने और संसाधनों के बेहतर उपयोग के उद्देश्य से राज्य सरकार ने एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। सरकार ने 100 से कम विद्यार्थियों की संख्या वाले कॉलेजों का अन्य निकटवर्ती कॉलेजों में विलय करने का फैसला किया है। इसके साथ ही जिन 39 स्कूलों में विद्यार्थियों का पंजीकरण शून्य है, उन्हें बंद कर वहां तैनात स्टाफ को अन्य स्कूलों में स्थानांतरित करने के आदेश जारी कर दिए गए हैं।

यह निर्णय शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर की अध्यक्षता में राज्य सचिवालय में आयोजित उच्चस्तरीय बैठक में लिया गया। बैठक में विभागीय अधिकारियों के साथ शिक्षा व्यवस्था को अधिक प्रभावी, सुव्यवस्थित और परिणामोन्मुख बनाने पर विस्तृत चर्चा की गई। सरकार का मानना है कि जिन संस्थानों में विद्यार्थियों की संख्या अत्यंत कम है, वहां संसाधनों, भवनों और शिक्षकों का समुचित उपयोग नहीं हो पा रहा है। ऐसे में विलय की प्रक्रिया से शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार होगा।

कॉलेजों के विलय का प्रस्ताव तैयार कर मंत्रिमंडल की मंजूरी के लिए भेजा जाएगा। इससे पहले विभाग ने 39 छात्र और छात्रा विद्यालयों का विलय कर उन्हें सह-शिक्षा संस्थानों में परिवर्तित करने का निर्णय लिया था। अब कॉलेज स्तर पर भी व्यापक बदलाव किए जा रहे हैं ताकि बुनियादी ढांचे और शिक्षण स्टाफ का बेहतर उपयोग सुनिश्चित किया जा सके।

सरकार ने विद्यार्थियों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए एक और महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। जिन विद्यार्थियों को स्कूल या कॉलेज तक पहुंचने के लिए दो किलोमीटर से अधिक दूरी तय करनी पड़ती है, उन्हें परिवहन भत्ता प्रदान किया जाएगा। इससे दूर-दराज क्षेत्रों के विद्यार्थियों को राहत मिलेगी और उनकी नियमित उपस्थिति सुनिश्चित हो सकेगी।

शिक्षा मंत्री ने विभागीय अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि गैर-सीबीएसई विद्यालयों के विलय के लिए भी विस्तृत प्रारूप तैयार किया जाए। मार्च माह में कुछ और विद्यालयों के विलय की प्रक्रिया पूरी की जा सकती है। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस निर्णय का व्यावसायिक पाठ्यक्रमों, शिक्षकों की भर्ती या वर्तमान कर्मचारियों की सेवाओं पर कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा। किसी भी कर्मचारी की नौकरी नहीं जाएगी।

सरकार ने सीबीएसई से संबद्ध सरकारी स्कूलों के लिए शिक्षक भर्ती में 23 वर्ष की न्यूनतम आयु सीमा समाप्त करने का निर्णय भी लिया है। कई अभ्यर्थी अपनी डिग्री 23 वर्ष से पहले पूरी कर लेते हैं और भर्ती के लिए पात्र होते हुए भी आयु सीमा के कारण आवेदन नहीं कर पाते थे। इस निर्णय से योग्य अभ्यर्थियों को राहत मिलेगी, विशेषकर गणित और अंग्रेजी विषय के पदों के लिए।

शिक्षा विभाग के आंकड़ों के अनुसार प्रदेश में पांच कॉलेज ऐसे हैं जहां 40 से भी कम विद्यार्थी अध्ययनरत हैं। इनमें राजकीय महाविद्यालय टिक्कर (6 विद्यार्थी), भलेई (19 विद्यार्थी), हरिपुर (32 विद्यार्थी), संधोल (38 विद्यार्थी) और कुकमसेरी (40 विद्यार्थी) शामिल हैं। इसके अतिरिक्त 16 कॉलेज ऐसे हैं जहां विद्यार्थियों की संख्या 100 से कम है।

इनमें कुपवी, मुल्थान, ननखड़ी, जयनगर, कोटली, थाची, भराली, रामशहर, कुमारसैन, चिंतपूर्णी, श्री नैना देवी जी, रक्कड़, चौकी मनियार, सेनाहट सहित अन्य संस्थान शामिल हैं।

गौरतलब है कि मार्च 2023 में राज्य सरकार ने पूर्व सरकार के कार्यकाल में 1 अप्रैल 2022 के बाद खोले गए 17 डिग्री और दो संस्कृत कॉलेजों को बंद कर दिया था। वर्ष 2022 में खोले गए 24 कॉलेजों में से 19 को डिनोटिफाई किया गया था।

सरकार का कहना है कि शिक्षा व्यवस्था में यह सुधारात्मक कदम दीर्घकालिक दृष्टि से प्रदेश के विद्यार्थियों के हित में है। इससे संसाधनों का समुचित उपयोग होगा, शिक्षकों की उपलब्धता बेहतर होगी और शिक्षा की गुणवत्ता में सकारात्मक बदलाव देखने को मिलेगा।

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