तहसील में एफिडेविट पर अवैध वसूली के आरोप, लोगों ने कार्रवाई की मांग की
तहसील में एफिडेविट पर अवैध वसूली के आरोप, लोगों ने कार्रवाई की मांग की

Author : Rajneesh Kapil Hamirpur

July 30, 2026 11:51 a.m. 312

सुजानपुर। हिमाचल प्रदेश के सुजानपुर क्षेत्र में तहसील परिसर में Affidavit और अन्य राजस्व संबंधी कार्यों के दौरान कथित रूप से अवैध वसूली किए जाने का मामला सामने आया है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि सरकारी दस्तावेजों पर गवाही देने के नाम पर कुछ लंबरदार आम नागरिकों से 200 रुपये तक की राशि वसूल रहे हैं। लोगों का कहना है कि यह राशि बिना किसी निर्धारित सरकारी नियम के ली जा रही है, जिससे गरीब और जरूरतमंद नागरिकों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ रहा है। मामले को लेकर प्रशासन से जांच कर उचित कार्रवाई की मांग की गई है।

गरीब और जरूरतमंद लोगों पर बढ़ रहा आर्थिक बोझ

स्थानीय नागरिकों के अनुसार तहसील कार्यालय में प्रतिदिन बड़ी संख्या में किसान, मजदूर, बुजुर्ग, विधवा महिलाएं और अन्य जरूरतमंद लोग विभिन्न सरकारी कार्यों के लिए पहुंचते हैं। इनमें जाति प्रमाण पत्र, आय प्रमाण पत्र, निवास प्रमाण पत्र, भूमि संबंधी दस्तावेज, उत्तराधिकार से जुड़े प्रकरण तथा अन्य राजस्व कार्य शामिल हैं। इन कार्यों के लिए आवश्यक दस्तावेजों पर गवाही करवाने के दौरान कथित रूप से 200 रुपये तक की राशि मांगी जा रही है। लोगों का कहना है कि कई परिवार आर्थिक रूप से कमजोर हैं और उनके लिए अतिरिक्त राशि देना आसान नहीं होता। ऐसे में कई लोग पैसे की व्यवस्था न होने के कारण अपने जरूरी सरकारी कार्य अधूरे छोड़कर वापस लौटने को मजबूर हो रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि सरकारी सेवाओं का उद्देश्य लोगों को सुविधा देना है, लेकिन यदि इस प्रकार की वसूली होती है तो आम नागरिकों को परेशानी का सामना करना पड़ता है।

सरकारी नियमों पर उठ रहे सवाल

स्थानीय लोगों का कहना है कि Revenue Department, Government Rules, Tehsil और Lambardar से जुड़े प्रावधानों के अनुसार सरकारी दस्तावेजों पर गवाही देने के लिए किसी प्रकार का शुल्क निर्धारित नहीं है। इसके बावजूद यदि किसी व्यक्ति से पैसे लिए जा रहे हैं तो इसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि यदि किसी सेवा के लिए कोई निर्धारित शुल्क है तो उसकी स्पष्ट जानकारी तहसील कार्यालय में सूचना बोर्ड पर प्रदर्शित की जाए। वहीं यदि कोई शुल्क निर्धारित नहीं है तो आम जनता से किसी भी प्रकार की राशि वसूले जाने पर तत्काल रोक लगाई जाए। लोगों का कहना है कि इससे पारदर्शिता बढ़ेगी और नागरिकों में भ्रम की स्थिति भी समाप्त होगी।

राजस्व विभाग के नियम क्या कहते हैं

राजस्व विभाग के प्रावधानों के अनुसार सरकारी दस्तावेजों पर गवाही देने के लिए अलग से कोई निर्धारित शुल्क तय नहीं किया गया है। लंबरदार की नियुक्ति सरकार द्वारा अपने निर्धारित क्षेत्र में प्रशासनिक और राजस्व संबंधी सहयोग के लिए की जाती है। नियमों के अनुसार वह केवल अपने अधिकार क्षेत्र के लोगों के दस्तावेजों पर ही गवाही दे सकता है। यदि किसी प्रकार की धनराशि ली जाती है तो उसकी वैधानिक स्थिति संबंधित नियमों के आधार पर जांच का विषय हो सकती है।

प्रशासन से निष्पक्ष जांच की मांग

स्थानीय लोगों ने प्रशासन से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच करवाने और यदि किसी स्तर पर अनियमितता पाई जाती है तो नियमानुसार कार्रवाई करने की मांग की है। उनका कहना है कि सरकारी कार्यालयों में आने वाले लोगों को पारदर्शी और सरल सेवाएं मिलनी चाहिए, ताकि किसी भी व्यक्ति को अनावश्यक आर्थिक बोझ का सामना न करना पड़े।

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नायब तहसीलदार ने स्पष्ट किए नियम

सुजानपुर के नायब तहसीलदार देवव्रत कपिल ने बताया कि राजस्व विभाग के नियमों के अनुसार सरकारी दस्तावेजों पर गवाही देने के लिए कोई शुल्क निर्धारित नहीं है। उन्होंने स्पष्ट किया कि लंबरदार अपने अधिकार क्षेत्र के लोगों के दस्तावेजों पर ही गवाही देने के लिए अधिकृत होता है। यदि किसी भी स्तर पर नियमों के विपरीत कार्य किए जाने की शिकायत प्राप्त होती है तो संबंधित मामले की जांच नियमानुसार की जाएगी। उन्होंने लोगों से अपील की कि यदि किसी व्यक्ति से नियमों के विरुद्ध धनराशि मांगी जाती है तो इसकी सूचना प्रशासन को दें, ताकि आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके।

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