Author : Rajneesh Kapil Hamirpur
हमीरपुर: उम्र के 78वें पड़ाव पर भी मेहनत और आत्मनिर्भरता की मिसाल पेश कर रहे हिमाचल प्रदेश के हमीरपुर निवासी किशोरी लाल आज कई लोगों के लिए प्रेरणा बने हुए हैं। आंखों पर चश्मा और कानों में सुनने की मशीन होने के बावजूद उनका काम के प्रति जुनून कम नहीं हुआ है। वह पिछले 45 वर्षों से हमीरपुर के नादौन चौक के पास वाहनों के टायर पंचर लगाने का काम कर रहे हैं।
हमीरपुर सदर विधानसभा क्षेत्र के सीमावर्ती गांव पंधेड़ के रहने वाले किशोरी लाल आज भी अपनी दुकान पर अकेले काम करते हैं। बिना किसी मजदूर या हेल्पर की मदद लिए वह भारी टायरों की मरम्मत करते हैं और अपनी रोजमर्रा की जिम्मेदारियां खुद निभाते हैं।
बढ़ती उम्र के साथ किशोरी लाल को स्वास्थ्य संबंधी कुछ चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। उनकी आंखों की रोशनी कमजोर हो चुकी है, जिसके चलते उन्हें चश्मे का सहारा लेना पड़ता है। वहीं, सुनने के लिए वह श्रवण यंत्र का इस्तेमाल करते हैं। इसके बावजूद उनके हौसले में कोई कमी नहीं आई है।
किशोरी लाल रोजाना अपने घर से करीब 30 किलोमीटर का सफर बस से तय कर हमीरपुर पहुंचते हैं। दिनभर दुकान पर मेहनत करने के बाद वह शाम करीब 6 बजे वापस घर लौट जाते हैं। उनकी यह दिनचर्या दिखाती है कि उम्र बढ़ने के बावजूद वह खुद को सक्रिय रखने के लिए लगातार प्रयास कर रहे हैं।
किशोरी लाल के लिए दुकान पर काम करना किसी आर्थिक मजबूरी का नतीजा नहीं है। उनका परिवार आर्थिक रूप से संपन्न है। उनके दोनों बेटे परवाणू और चंडीगढ़ की निजी कंपनियों में अच्छे पदों पर कार्यरत हैं, जबकि उनकी बेटी भी अपने परिवार के साथ खुशहाल जीवन बिता रही है।
किशोरी लाल का मानना है कि घर पर खाली बैठने से इंसान खुद को ज्यादा उम्रदराज महसूस करने लगता है। इसके विपरीत, काम में व्यस्त रहने से शरीर सक्रिय रहता है और मानसिक तनाव भी कम होता है। दुकान पर काम करने के साथ-साथ साथी दुकानदारों से बातचीत करना उन्हें अच्छा लगता है।
उनके लिए दुकान केवल कमाई का जरिया नहीं, बल्कि दिनभर सक्रिय रहने और लोगों के साथ जुड़े रहने का माध्यम भी है।
किशोरी लाल ने वर्षों तक मेहनत करके अपने परिवार की जिम्मेदारियां निभाईं और अपने बच्चों को बेहतर शिक्षा दिलाकर आगे बढ़ने का अवसर दिया। आज उनके बच्चे अपने-अपने कार्यक्षेत्र में स्थापित हैं, लेकिन उन्होंने खुद काम करना नहीं छोड़ा है।
उनकी कहानी यह भी बताती है कि मेहनत और जिम्मेदारी के साथ अपने परिवार का भविष्य संवारने के बाद भी व्यक्ति अपने काम और रुचियों से जुड़ा रह सकता है।
आज के समय में किशोरी लाल की जिंदगी मेहनत, आत्मसम्मान और सकारात्मक सोच का संदेश देती है। जहां कई बुजुर्ग उम्र बढ़ने के साथ काम से दूरी बना लेते हैं, वहीं किशोरी लाल अपनी दिनचर्या के जरिए सक्रिय रहने की मिसाल पेश कर रहे हैं।
उनका जीवन युवाओं को मेहनत और आत्मनिर्भरता का महत्व समझाता है, वहीं बुजुर्गों को भी अपनी क्षमता के अनुसार सक्रिय बने रहने की प्रेरणा देता है। हमीरपुर के नादौन चौक पर पिछले 45 वर्षों से लगातार काम कर रहे किशोरी लाल ने साबित किया है कि इंसान का हौसला मजबूत हो, तो उम्र उसकी पहचान और काम के प्रति लगन के आड़े नहीं आती।
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