हाईकोर्ट ने सोलन में पंचायतों के पुनर्गठन का फैसला किया रद्द
हाईकोर्ट ने सोलन में पंचायतों के पुनर्गठन का फैसला किया रद्द

Post by : Himachal Bureau

March 11, 2026 1:14 p.m. 3158

हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने प्रदेश में पंचायत चुनावों से ठीक पहले राज्य सरकार द्वारा किए जा रहे पंचायतों के पुनर्गठन और परिसीमन के कार्यों पर कड़ा संज्ञान लेते हुए गंभीर सवाल खड़े किए हैं। न्यायमूर्ति विवेक सिंह ठाकुर और न्यायमूर्ति रंजन शर्मा की खंडपीठ ने सरकार की कार्यप्रणाली पर तीखी टिप्पणी करते हुए सोलन जिले के मनलोग-बड़ोग गांव को हनुमान बड़ोग पंचायत से हटाकर दाड़लाघाट में शामिल करने के फैसले को पूरी तरह रद्द कर दिया है।

अदालत ने इस सरकारी अधिसूचना को 'मनमाना और तर्कहीन' करार देते हुए स्पष्ट किया कि पुनर्गठन की प्रक्रिया में जनता की सुविधा और भौगोलिक निकटता को प्राथमिकता मिलनी चाहिए, न कि प्रशासनिक जल्दबाजी को।अदालत ने सुनवाई के दौरान सरकार की मंशा पर सवाल उठाते हुए कहा कि जब पंचायती राज संस्थाओं का पांच साल का कार्यकाल समाप्त हो चुका है और सर्वोच्च न्यायालय के आदेशानुसार 31 मई तक चुनाव प्रक्रिया पूरी करना अनिवार्य है, तो ऐसे नाजुक समय पर सरकार जल्दबाजी में पुनर्गठन क्यों कर रही है। कोर्ट ने चेतावनी दी कि सरकार की इस 'देरी करने वाली रणनीति' से उनकी छवि पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।

मामले की गहराई में जाने पर पता चला कि नेहरू युवा क्लब और महिला मंडल द्वारा दायर याचिका में ग्रामीणों का तर्क सही था; हनुमान बड़ोग पंचायत घर उनके गांव से पैदल मात्र 2-3 किलोमीटर दूर है, जबकि दाड़लाघाट की दूरी 6 से 7 किलोमीटर है।अदालत ने सरकार द्वारा दूरी मापने के तरीके पर भी कड़ी आपत्ति जताई। सरकार ने दलील दी थी कि सड़क मार्ग से हनुमान बड़ोग 14 किलोमीटर दूर है, लेकिन जांच में खुलासा हुआ कि सरकार ने यह दूरी एक लंबे घुमावदार रास्ते से नापी थी।

इस पर कोर्ट ने कटाक्ष करते हुए कहा कि यह वैसा ही है जैसे शिमला से सोलन की दूरी बिलासपुर होकर मापना। साथ ही, कोर्ट ने पाया कि दाड़लाघाट की जनसंख्या पहले से ही साढ़े चार हजार के करीब है, जबकि हनुमान बड़ोग की आबादी मात्र 1500 है, ऐसे में कम आबादी वाली पंचायत से गांव निकालकर उसे बड़ी आबादी वाली पंचायत में डालना प्रशासनिक दृष्टिकोण से भी गलत है। अंततः, हाईकोर्ट ने सरकार को अगले 5 दिनों के भीतर नई परिसीमन अधिसूचना जारी करने और दोनों पंचायतों के वार्डों को पुराने स्वरूप में बहाल करने का सख्त आदेश दिया है।

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