हमीरपुर की डॉ. अंबिका शर्मा को दक्षिण कोरिया का प्रतिष्ठित ट्रैवल अवार्ड
हमीरपुर की डॉ. अंबिका शर्मा को दक्षिण कोरिया का प्रतिष्ठित ट्रैवल अवार्ड

Author : Rajneesh Kapil Hamirpur

Aug. 29, 2026 10:56 a.m. 209

हमीरपुर की बेटी ने बढ़ाया हिमाचल का मान, दक्षिण कोरिया में मिली बड़ी पहचान

हमीरपुर। हिमाचल प्रदेश के हमीरपुर जिले की डॉ. अंबिका शर्मा ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रदेश का नाम रोशन किया है। उन्हें दक्षिण कोरिया की प्रतिष्ठित कोरियन डायबिटीज एसोसिएशन की ओर से ट्रैवल अवार्ड से सम्मानित किया गया है। उनकी इस उपलब्धि पर हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने उन्हें हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दी हैं।

मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने डॉ. अंबिका शर्मा की उपलब्धि की सराहना करते हुए कहा कि मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य के क्षेत्र में उनका शोध महत्वपूर्ण है। खासतौर पर प्रीक्लेम्पसिया जैसी गंभीर गर्भावस्था संबंधी जटिलता पर उनका शोध चिकित्सा एवं स्वास्थ्य के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान माना जा रहा है।

डॉ. अंबिका शर्मा के शोध कार्य ने उन्हें अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिक मंचों तक पहुंचाया है। उनकी उपलब्धि यह दर्शाती है कि हिमाचल प्रदेश के युवा डॉक्टर और शोधकर्ता अपनी प्रतिभा, मेहनत और वैज्ञानिक कार्यों के दम पर वैश्विक स्तर पर पहचान बना रहे हैं।

इससे पहले भी भारत सरकार की ओर से डॉ. अंबिका शर्मा को दो प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय ट्रैवल ग्रांट प्रदान किए जा चुके हैं। इन ग्रांट के माध्यम से उन्होंने अपने शोध कार्य को अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिक सम्मेलनों में प्रस्तुत किया।

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डॉ. अंबिका शर्मा ने बार्सिलोना में आयोजित ESCMID Global तथा वियना, ऑस्ट्रिया में आयोजित अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिक सम्मेलन में अपने शोध कार्य प्रस्तुत किए। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर शोध प्रस्तुत करने का यह अनुभव उनके वैज्ञानिक एवं चिकित्सा क्षेत्र में बढ़ते योगदान को दर्शाता है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि डॉ. अंबिका शर्मा की यह उपलब्धि केवल उनके लिए ही नहीं, बल्कि पूरे हिमाचल प्रदेश और विशेष रूप से हमीरपुर जिले के लिए गर्व का विषय है। उनकी सफलता प्रदेश के युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत है।

डॉ. अंबिका शर्मा की यह अंतरराष्ट्रीय उपलब्धि हिमाचल की स्वास्थ्य एवं शोध प्रतिभा के लिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। उनकी सफलता से यह संदेश जाता है कि छोटे शहरों और पहाड़ी क्षेत्रों से निकलने वाले युवा भी अपने ज्ञान और मेहनत के बल पर दुनिया के बड़े वैज्ञानिक मंचों पर अपनी पहचान बना सकते हैं।

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