Post by : Himachal Bureau
शिमला। हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने पेपर लीक और सामूहिक नकल के मामलों को लेकर विधानसभा में कड़ा रुख अपनाया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि भर्ती प्रक्रिया में गड़बड़ी करने वाले किसी भी व्यक्ति को सरकार नहीं छोड़ेगी और दोष साबित होने पर उसके खिलाफ कानून के अनुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी।
विधानसभा में हुई चर्चा के दौरान मुख्यमंत्री ने कहा कि पेपर लीक की जानकारी सामने आने के बाद सरकार ने संबंधित परीक्षाओं को रद्द करने के साथ एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की थी। उन्होंने कहा कि सरकार की प्राथमिकता भर्ती प्रक्रिया को निष्पक्ष और पारदर्शी बनाना है, ताकि योग्य युवाओं के हित प्रभावित न हों।
नेता प्रतिपक्ष की ओर से उठाए गए सामूहिक नकल के आरोपों पर मुख्यमंत्री ने विपक्ष को प्रमाण उपलब्ध कराने की चुनौती दी। उन्होंने कहा कि यदि किसी भी परीक्षा या भर्ती में सामूहिक नकल से जुड़े ठोस तथ्य सरकार के सामने रखे जाते हैं तो संबंधित लोगों के खिलाफ तत्काल कार्रवाई की जाएगी। मुख्यमंत्री ने साफ किया कि गलत काम करने वाला व्यक्ति किसी भी पद या प्रभाव में क्यों न हो, उसके खिलाफ कार्रवाई से सरकार पीछे नहीं हटेगी।
करीब पौने दो घंटे तक चली चर्चा के बाद विधानसभा ने राज्य विश्वविद्यालय संशोधन विधेयक को पारित कर दिया। मुख्यमंत्री ने कहा कि विधेयक का मकसद विश्वविद्यालयों की शैक्षणिक स्वायत्तता को प्रभावित करना नहीं है। उन्होंने बताया कि सरकार भर्ती व्यवस्था और वित्तीय प्रबंधन में जवाबदेही बढ़ाना चाहती है। विश्वविद्यालयों के शैक्षणिक कामकाज और पढ़ाई से जुड़े फैसलों में किसी तरह का अनावश्यक हस्तक्षेप नहीं किया जाएगा।
मुख्यमंत्री सुक्खू के अनुसार विश्वविद्यालयों की वित्तीय व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाने के लिए वित्त समिति से जुड़े प्रावधानों में बदलाव किया गया है। वित्त सचिव को वित्त समिति की जिम्मेदारी दिए जाने का उद्देश्य खर्च और वित्तीय निर्णयों की निगरानी मजबूत करना है। उन्होंने कहा कि यह व्यवस्था केवल वित्तीय मामलों तक सीमित रहेगी और विश्वविद्यालय की अकादमिक गतिविधियों में सरकार का हस्तक्षेप नहीं होगा।
मुख्यमंत्री ने सदन में यह भी कहा कि संशोधन विधेयक तैयार करते समय विश्वविद्यालय अनुदान आयोग यानी UGC की गाइडलाइन का ध्यान रखा गया है। सरकार के अनुसार विधेयक में ऐसा कोई प्रावधान नहीं किया गया है जिससे विश्वविद्यालयों की निर्धारित शैक्षणिक व्यवस्था प्रभावित हो। मुख्यमंत्री ने भाजपा विधायकों से भी विधेयक का समर्थन करने की अपील करते हुए कहा कि नई व्यवस्था से भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ेगी और इसका फायदा प्रदेश के युवाओं को मिलेगा।
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विधानसभा में चर्चा के दौरान मुख्यमंत्री ने संकेत दिया कि आने वाले समय में प्रदेश के निजी विश्वविद्यालयों से जुड़े मामलों को लेकर भी कानूनी व्यवस्था को और मजबूत करने की जरूरत पड़ सकती है।सरकार का कहना है कि शिक्षा संस्थानों में भर्ती, वित्तीय प्रबंधन और प्रशासनिक कामकाज में पारदर्शिता सुनिश्चित करना जरूरी है, ताकि विद्यार्थियों और युवाओं के हित सुरक्षित रहें। पेपर लीक और सामूहिक नकल के मुद्दे पर मुख्यमंत्री के बयान के बाद यह साफ है कि राज्य सरकार भर्ती परीक्षाओं से जुड़ी गड़बड़ियों को लेकर सख्त नीति अपनाने का संदेश दे रही है।
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