Author : Rajneesh Kapil Hamirpur
हमीरपुर जिले में जल संरक्षण को बढ़ावा देने और पारंपरिक जलस्रोतों के संरक्षण के लिए जिला प्रशासन ने एक व्यापक अभियान शुरू किया है। उपायुक्त गंधर्वा राठौड़ की पहल पर जिलेभर में कुओं, बावड़ियों, खातरियों, तालाबों और अन्य प्राकृतिक जलस्रोतों की सफाई कर उन्हें पुनर्जीवित किया जा रहा है। इस अभियान का उद्देश्य केवल सफाई तक सीमित नहीं है, बल्कि लोगों को जल संरक्षण के प्रति जागरूक करना और भविष्य में संभावित जल संकट से निपटने के लिए सामुदायिक भागीदारी को मजबूत बनाना भी है।
जिला प्रशासन के अनुसार हमीरपुर में हर घर तक नल से पेयजल पहुंचाने का लक्ष्य पूरा किया जा चुका है। इसके बावजूद कम वर्षा, घटते भूजल स्तर और बदलते मौसम के कारण भविष्य में पानी की उपलब्धता को लेकर चुनौतियां बनी हुई हैं। ऐसे में पारंपरिक जलस्रोतों का संरक्षण और उनका नियमित रखरखाव आवश्यक माना जा रहा है।विशेषज्ञों का मानना है कि पुराने कुएं, बावड़ियां और तालाब केवल पेयजल के वैकल्पिक स्रोत नहीं हैं, बल्कि वर्षा जल को संचित करने, भूजल स्तर को बनाए रखने और पर्यावरणीय संतुलन को मजबूत करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
जिला प्रशासन द्वारा जारी जानकारी के अनुसार अभियान के तहत अब तक लगभग 236 प्राकृतिक जलस्रोतों की सफाई पूरी की जा चुकी है। इनमें शामिल हैं—
इन सभी स्थानों से झाड़ियां, प्लास्टिक कचरा, गाद और अन्य अवरोध हटाकर जलस्रोतों को स्वच्छ एवं उपयोग योग्य बनाया गया है।
इस अभियान को सफल बनाने में केवल जिला प्रशासन ही नहीं, बल्कि ग्राम पंचायतें, महिला मंडल, युवक मंडल, स्वयंसेवी संस्थाएं और स्थानीय ग्रामीण भी सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। प्रशासन का मानना है कि प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण तभी संभव है, जब समाज का प्रत्येक वर्ग इसमें अपनी जिम्मेदारी निभाए।ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों द्वारा स्वयं श्रमदान कर जलस्रोतों की सफाई करना इस अभियान की सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक माना जा रहा है।मानसून से पहले जलस्रोतों की सफाई क्यों जरूरी है?मानसून के दौरान यदि प्राकृतिक जलस्रोतों की समय पर सफाई नहीं की जाए तो उनमें गंदगी, काई और अन्य अपशिष्ट जमा होने लगते हैं। इससे पानी दूषित हो सकता है और जलजनित बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है।स्वच्छ जलस्रोत न केवल सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराने में मदद करते हैं, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में जल संकट की स्थिति में वैकल्पिक स्रोत के रूप में भी उपयोगी साबित होते हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार पारंपरिक जलस्रोतों का संरक्षण भूजल स्तर को बनाए रखने, वर्षा जल संचयन को बढ़ावा देने और भविष्य में जल संकट की समस्या को कम करने का प्रभावी तरीका है। इसके अलावा स्वच्छ जलस्रोत स्थानीय जैव विविधता, हरित पर्यावरण और प्राकृतिक पारिस्थितिकी तंत्र को भी मजबूत बनाते हैं।इसी कारण यह अभियान केवल सफाई कार्यक्रम नहीं, बल्कि दीर्घकालिक जल प्रबंधन और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
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उपायुक्त गंधर्वा राठौड़ ने जिले की सभी ग्राम पंचायतों, महिला मंडलों, युवक मंडलों, सामाजिक संस्थाओं और आम नागरिकों से अपने-अपने क्षेत्रों में स्थित प्राकृतिक जलस्रोतों की नियमित सफाई और संरक्षण में सहयोग करने की अपील की है।उन्होंने कहा कि यदि प्रत्येक नागरिक अपने आसपास के जलस्रोतों की जिम्मेदारी उठाए तो आने वाले वर्षों में वर्षा जल का बेहतर उपयोग किया जा सकेगा, भूजल स्तर मजबूत होगा और जल संकट जैसी समस्याओं से काफी हद तक राहत मिल सकेगी।हमीरपुर में चलाया जा रहा यह अभियान केवल प्रशासनिक पहल नहीं, बल्कि सामुदायिक भागीदारी से आगे बढ़ रहा जल संरक्षण का एक प्रभावी मॉडल बनता जा रहा है। यदि इसी प्रकार समाज और प्रशासन मिलकर प्राकृतिक जलस्रोतों के संरक्षण के लिए कार्य करते रहे तो भविष्य में जल सुरक्षा, स्वच्छ पर्यावरण और सतत विकास के लक्ष्य को हासिल करना काफी आसान हो सकता है।
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