Author : Rajneesh Kapil Hamirpur
हमीरपुर से सांसद और पूर्व केंद्रीय मंत्री अनुराग सिंह ठाकुर ने लोकसभा में हिमालयी राज्यों की सुरक्षा से जुड़ा एक महत्वपूर्ण मुद्दा उठाया। उन्होंने अतारांकित प्रश्न संख्या 6233 के माध्यम से सरकार से यह जानने की कोशिश की कि भूकंप के खतरे वाले क्षेत्रों में रहने वाले लोगों की सुरक्षा के लिए क्या कदम उठाए जा रहे हैं।
उन्होंने खास तौर पर हिमालयी क्षेत्रों में बढ़ती भूकंपीय संवेदनशीलता और ढलानों के अस्थिर होने से पैदा हो रहे खतरों को लेकर चिंता जताई। उन्होंने पूछा कि क्या सरकार ने राष्ट्रीय भवन संहिता (NBC) 2016 और मॉडल बिल्डिंग बाय-लॉज (MBBL) 2016 में ऐसे क्षेत्रों के लिए कोई विशेष बदलाव किए हैं, ताकि इन क्षेत्रों में बनने वाले भवन अधिक सुरक्षित हो सकें।
इस पर आवास एवं शहरी कार्य मंत्रालय की ओर से राज्य मंत्री तोखन साहू ने जवाब देते हुए बताया कि सरकार इस दिशा में लगातार काम कर रही है। उन्होंने कहा कि NBC 2016 और MBBL 2016 को इस तरह बनाया गया है कि वे भूकंप के अलग-अलग जोन के अनुसार भवन निर्माण के लिए जरूरी दिशा-निर्देश देते हैं। हालांकि इन नियमों को लागू करना राज्यों और स्थानीय निकायों की जिम्मेदारी होती है।
मंत्रालय ने यह भी जानकारी दी कि हिल एरिया डेवलपमेंट इंजीनियरिंग समिति के तहत कई महत्वपूर्ण मानक बनाए गए हैं। इन मानकों में ढलानों को मजबूत करने, भूस्खलन से बचाव, पानी के सही प्रबंधन और निर्माण के दौरान सुरक्षा उपायों को शामिल किया गया है। इससे पहाड़ी क्षेत्रों में निर्माण कार्य को सुरक्षित बनाया जा सकता है।
अनुराग ठाकुर ने यह भी पूछा कि क्या सरकार हल्की और स्थानीय सामग्री जैसे लकड़ी और बांस के उपयोग को बढ़ावा दे रही है। इस पर सरकार ने बताया कि NBC 2016 में लकड़ी और बांस के उपयोग को लेकर स्पष्ट दिशा-निर्देश दिए गए हैं। इससे न केवल भवन हल्के बनते हैं, बल्कि पर्यावरण पर भी कम असर पड़ता है।
सरकार ने राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण की एक विशेष योजना के बारे में भी जानकारी दी, जिसके तहत पुराने और महत्वपूर्ण भवनों को मजबूत बनाया जा रहा है। इस योजना के तहत इंजीनियरों और राजमिस्त्रियों को प्रशिक्षण दिया जा रहा है, ताकि वे भूकंप-रोधी तकनीकों का सही तरीके से उपयोग कर सकें। इस योजना के पहले चरण में त्रिपुरा, उत्तराखंड और दिल्ली के कुछ क्षेत्रों को शामिल किया गया था। इसके बाद बची हुई राशि का उपयोग हिमाचल प्रदेश और नागालैंड में सरकारी भवनों को मजबूत करने के लिए किया जा रहा है।
इस दौरान अनुराग ठाकुर ने कहा कि हिमालयी क्षेत्रों में रहने वाले लोगों की सुरक्षा सबसे महत्वपूर्ण है। उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि पहाड़ी शहरों में ‘कैरीइंग कैपेसिटी’ का अध्ययन तेजी से किया जाए, ताकि यह पता चल सके कि किसी क्षेत्र में कितनी जनसंख्या और निर्माण सुरक्षित है। उन्होंने यह भी कहा कि जलवायु परिवर्तन को ध्यान में रखते हुए भवन निर्माण के नियमों को और मजबूत किया जाना चाहिए। साथ ही यह सुनिश्चित किया जाए कि केंद्र सरकार की मदद हर संवेदनशील क्षेत्र तक सही समय पर पहुंचे।
सरकार ने अपने जवाब में कहा कि इस दिशा में काम जारी है, लेकिन अभी और सुधार की जरूरत है। इसके लिए राज्यों, वैज्ञानिक संस्थानों और नीति निर्माताओं के बीच बेहतर तालमेल जरूरी है। यह मुद्दा इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि हिमालयी क्षेत्र भूकंप और भूस्खलन जैसी प्राकृतिक आपदाओं के प्रति काफी संवेदनशील हैं। ऐसे में सुरक्षित और मजबूत निर्माण ही लोगों की जान और संपत्ति को बचाने का सबसे बड़ा माध्यम बन सकता है।
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