दिल्ली में हिमाचल के पांच वीर जवानों को मिला वीरता सम्मान, सेना ने किया सम्मानित
दिल्ली में हिमाचल के पांच वीर जवानों को मिला वीरता सम्मान, सेना ने किया सम्मानित

Post by : Himachal Bureau

June 9, 2026 1:22 p.m. 1471

हिमाचल प्रदेश को वीर भूमि और देवभूमि कहा जाता है, और यह पहचान केवल परंपरा नहीं बल्कि यहां के लोगों के साहस और बलिदान से जुड़ी हुई है। एक बार फिर प्रदेश के पांच वीर जवानों ने देश का नाम रोशन किया है। भारतीय सेना की ओर से इन सभी जवानों को उनकी असाधारण वीरता और कर्तव्यनिष्ठा के लिए सम्मानित किया गया है। यह सम्मान समारोह नई दिल्ली स्थित राष्ट्रपति भवन में आयोजित किया गया, जहां राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने स्वयं सभी जवानों को वीरता पदक प्रदान किए।

इस अवसर पर हिमाचल प्रदेश के मंडी, बिलासपुर, शिमला और ऊना जिलों से जुड़े पांच वीर सपूतों को वीर चक्र और शौर्य चक्र जैसे प्रतिष्ठित सैन्य सम्मान से नवाजा गया। यह सम्मान उन सैनिकों को दिया जाता है जिन्होंने युद्ध या आतंकवाद विरोधी अभियानों में असाधारण साहस और वीरता का परिचय दिया हो।

बिलासपुर जिले के लांस दफादार बलदेव चंद को मरणोपरांत शौर्य चक्र प्रदान किया गया। उन्होंने आतंकियों से मुकाबले के दौरान अपने प्राणों की आहुति दी, लेकिन अपने साथियों की जान बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनकी वीरता और बलिदान को देश हमेशा याद रखेगा। जोगिंद्रनगर क्षेत्र के कैप्टन योगेंद्र ठाकुर को जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद विरोधी अभियान के दौरान दिखाए गए साहस और नेतृत्व क्षमता के लिए शौर्य चक्र से सम्मानित किया गया। उन्होंने कठिन परिस्थितियों में अपने दल का नेतृत्व करते हुए एक आतंकी को ढेर किया।

नायब सूबेदार सतीश कुमार को वीर चक्र से सम्मानित किया गया। उन्होंने दुश्मनों की गोलीबारी के बीच साहसिक कार्रवाई करते हुए अपनी जिम्मेदारी निभाई और महत्वपूर्ण अभियान को सफल बनाया। इसी तरह शिमला के मेजर अंशुल बाल्टू को असम में आतंकियों के खिलाफ अभियान में दिखाए गए साहस के लिए सम्मानित किया गया, जहां उन्होंने एक उग्रवादी को मार गिराया।

ऊना के लेफ्टिनेंट कमांडर सूरज पराशर को भी शौर्य चक्र से सम्मानित किया गया। उन्होंने कश्मीर में तलाशी अभियान के दौरान आतंकियों के खिलाफ निर्णायक कार्रवाई की, जिससे अभियान सफल हुआ। इस पूरे सम्मान समारोह में हिमाचल प्रदेश के इन वीर जवानों की बहादुरी को देशभर में सराहा गया। सभी अधिकारियों और परिजनों ने इस उपलब्धि पर गर्व व्यक्त किया और इसे प्रदेश के लिए गौरव का क्षण बताया।

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