सलूणी में किसानों को मिला रोजगार का सहारा, बांटे गए पोल्ट्री चूजे
सलूणी में किसानों को मिला रोजगार का सहारा, बांटे गए पोल्ट्री चूजे

Author : Kuldeep Singh Thakur Jalai, Chamba

Aug. 13, 2026 11:24 a.m. 278

किसानों की आमदनी बढ़ाने और ग्रामीण परिवारों को आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से सलूणी क्षेत्र में किसान सशक्तिकरण एवं आजीविका संवर्धन कार्यक्रम का आयोजन किया गया। राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक के सहयोग से स्पार्क संस्था द्वारा घराटनाला जलागम परियोजना के अंतर्गत आयोजित इस कार्यक्रम में किसानों को कृषि के साथ आय के अतिरिक्त साधनों से जोड़ने पर जोर दिया गया। कार्यक्रम में डलहौजी के विधायक डी.एस. ठाकुर मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। उनके हाथों चयनित लाभार्थी किसानों को पोल्ट्री चूजों का वितरण किया गया। इस पहल के जरिए किसानों को Poultry Farming शुरू करने और अपनी पारिवारिक आय में बढ़ोतरी करने के लिए प्रोत्साहित किया गया।

किसानों को अतिरिक्त आय के साधनों से जोड़ने पर जोर

मुख्य अतिथि डी.एस. ठाकुर ने कहा कि आज के समय में केवल पारंपरिक खेती पर निर्भर रहने के बजाय किसानों को अन्य आयवर्धक गतिविधियों से जोड़ना जरूरी है। कृषि के साथ पशुपालन और कुक्कुट पालन जैसी गतिविधियां ग्रामीण परिवारों के लिए अतिरिक्त कमाई का साधन बन सकती हैं। उन्होंने कहा कि इस तरह की योजनाएं किसानों की आर्थिक स्थिति मजबूत करने के साथ ग्रामीण अर्थव्यवस्था को गति देने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। विधायक ने घराटनाला जलागम क्षेत्र में किसानों के हित में किए जा रहे कार्यों के लिए स्पार्क संस्था की सराहना भी की।

जलागम परियोजना का उद्देश्य केवल संरक्षण नहीं

स्पार्क संस्था के निदेशक प्रदीप आजाद ने परियोजना की जानकारी देते हुए कहा कि घराटनाला जलागम परियोजना का उद्देश्य केवल प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण करना नहीं है। इसके साथ ग्रामीण लोगों की आय बढ़ाना, किसानों को Farmer Empowerment से जोड़ना और गांवों में आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देना भी इस पहल का महत्वपूर्ण हिस्सा है। उन्होंने लाभार्थी किसानों से पोल्ट्री पालन को व्यवस्थित तरीके से अपनाने की अपील की। उनका कहना था कि सही देखभाल, बेहतर प्रबंधन और बाजार से जुड़ाव के माध्यम से किसान इस गतिविधि को आय का स्थायी स्रोत बना सकते हैं।

किसानों को उपलब्ध संसाधनों के बेहतर इस्तेमाल की सलाह

कार्यक्रम में नाबार्ड के जिला विकास प्रबंधक भी मौजूद रहे। उन्होंने किसानों को विभिन्न आजीविका गतिविधियों का लाभ उठाने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि उपलब्ध संसाधनों का सही उपयोग कर ग्रामीण परिवार अपनी आर्थिक स्थिति को मजबूत कर सकते हैं। इस दौरान किसानों को बताया गया कि कृषि से जुड़ी गतिविधियों के साथ पशुपालन और कुक्कुट पालन अपनाने से परिवारों की आय के स्रोत बढ़ाए जा सकते हैं। इससे ग्रामीण क्षेत्र में Rural Livelihood को मजबूती मिलने की उम्मीद है।

लाभार्थी किसानों ने जताया आभार

कार्यक्रम में चयनित किसानों को पोल्ट्री चूजे वितरित किए गए। लाभार्थियों ने इस पहल के लिए नाबार्ड और स्पार्क संस्था का आभार जताया। किसानों ने कहा कि उन्हें कृषि के साथ अतिरिक्त आय का साधन मिलने से परिवार की आर्थिक स्थिति सुधारने में मदद मिल सकती है। ग्रामीण महिलाओं और स्वयं सहायता समूहों की भागीदारी ने भी कार्यक्रम को महत्वपूर्ण बनाया। ऐसी गतिविधियां महिलाओं को भी आय से जुड़ने और परिवार की आर्थिक मजबूती में योगदान देने का अवसर प्रदान करती हैं।

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ग्रामीण आत्मनिर्भरता का दिया संदेश

कार्यक्रम में ग्राम पंचायत के जनप्रतिनिधि, जलागम समिति के सदस्य, परियोजना से जुड़े अधिकारी-कर्मचारी, स्थानीय किसान और स्वयं सहायता समूहों की महिलाएं मौजूद रहीं। कार्यक्रम समन्वयक मनोज शर्मा, कुलदीप ठाकुर, लक्की शर्मा, राजेश कुमार और अंकित शर्मा सहित कई गणमान्य व्यक्ति भी उपस्थित रहे। कार्यक्रम के माध्यम से किसानों को Agriculture Development, Self Employment और Poultry Farming जैसे आयवर्धक अवसरों से जोड़ने का संदेश दिया गया। आयोजकों ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में इस प्रकार की पहल लगातार जारी रहनी चाहिए, ताकि किसान अपनी पारंपरिक आजीविका के साथ नए साधन अपनाकर आर्थिक रूप से और अधिक मजबूत बन सकें।

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