Post by : Khushi Joshi
भारतीय क्रिकेट के सबसे सफल कप्तानों में शामिल रोहित शर्मा ने 2023 वनडे वर्ल्ड कप फाइनल में मिली हार को अपने करियर का सबसे कठिन दौर बताया है। उन्होंने स्वीकार किया है कि उस एक हार ने उन्हें अंदर से पूरी तरह तोड़ दिया था और कुछ समय के लिए उन्हें लगा कि शायद वह अब क्रिकेट खेलना ही नहीं चाहते। नई दिल्ली में आयोजित मास्टर्स यूनियन कन्वोकेशन 2025 में मुख्य अतिथि के रूप में छात्रों को संबोधित करते हुए रोहित ने पहली बार उस मानसिक संघर्ष पर खुलकर बात की, जिससे वह वर्ल्ड कप फाइनल के बाद गुजरे थे।
रोहित शर्मा ने कहा कि 2023 वर्ल्ड कप उनके लिए सिर्फ एक टूर्नामेंट नहीं था, बल्कि वर्षों की मेहनत, योजना और भावनात्मक निवेश का परिणाम था। उन्होंने बताया कि जब उन्होंने 2022 में भारतीय टीम की कप्तानी संभाली थी, तभी से उनका एकमात्र लक्ष्य भारत को आईसीसी ट्रॉफी दिलाना था। चाहे टी20 वर्ल्ड कप हो या 2023 का वनडे वर्ल्ड कप, उन्होंने अपनी पूरी ऊर्जा और सोच उसी एक उद्देश्य में झोंक दी थी। ऐसे में घरेलू मैदान पर फाइनल हार जाना उनके लिए बेहद भारी साबित हुआ।
रोहित ने कहा कि फाइनल के बाद उन्हें ऐसा महसूस हुआ जैसे क्रिकेट ने उनसे सब कुछ छीन लिया हो। उस समय वह मानसिक रूप से इतने टूट चुके थे कि उनके मन में यह सवाल उठने लगा था कि क्या वह अब इस खेल को आगे जारी रखना चाहते हैं। उन्होंने यह भी बताया कि उस हार के बाद उनके शरीर में मानो कोई ऊर्जा ही नहीं बची थी और मानसिक थकावट इतनी ज्यादा थी कि खुद को संभालने में उन्हें कई महीने लग गए।
उन्होंने स्वीकार किया कि यह दौर सिर्फ मानसिक ही नहीं, बल्कि शारीरिक रूप से भी बेहद कठिन था। मैदान से दूर रहने के दौरान उन्हें बार-बार खुद को याद दिलाना पड़ा कि क्रिकेट उनके जीवन का सबसे बड़ा प्यार है और इसे इतनी आसानी से छोड़ा नहीं जा सकता। धीरे-धीरे उन्होंने अपने भीतर फिर से वही जुनून तलाशना शुरू किया, जिसने उन्हें क्रिकेटर बनाया था। समय के साथ उनकी ऊर्जा लौटी और आत्मविश्वास भी वापस आने लगा।
रोहित शर्मा ने कहा कि 2023 वर्ल्ड कप की हार उनके जीवन का एक बड़ा सबक बनी। इसने उन्हें सिखाया कि असफलता से कैसे निपटना है, खुद को दोबारा कैसे खड़ा करना है और आगे बढ़ने के लिए खुद को कैसे रीसेट करना है। यही सीख बाद में उनके लिए एक टर्निंग पॉइंट साबित हुई, जिसने उन्हें आईसीसी टी20 वर्ल्ड कप 2024 से पहले नए सिरे से सोचने और फोकस करने की ताकत दी।
इस नए नजरिए और मानसिक मजबूती का नतीजा तब देखने को मिला, जब भारत ने रोहित शर्मा की कप्तानी में 2024 का टी20 वर्ल्ड कप जीता और फाइनल मुकाबले में दक्षिण अफ्रीका को हराकर वर्षों का इंतजार खत्म किया। रोहित ने कहा कि उन्हें अब यह एहसास हो गया है कि जिंदगी एक हार पर खत्म नहीं होती और हर मुश्किल आगे बढ़ने का रास्ता दिखाती है।
अपने संबोधन के दौरान रोहित शर्मा ने छात्रों को भी प्रेरित करते हुए कहा कि जिंदगी में चुनौतियां बार-बार आएंगी, लेकिन वही व्यक्ति को मजबूत बनाती हैं। उन्होंने युवाओं से कहा कि आत्मविश्वास बनाए रखें, असफलताओं से डरें नहीं और हर अनुभव से सीख लेकर आगे बढ़ते रहें।
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