चीन से मिले उपहार अमेरिका ने फेंके, सुरक्षा प्रोटोकॉल पर सख्ती
चीन से मिले उपहार अमेरिका ने फेंके, सुरक्षा प्रोटोकॉल पर सख्ती

Post by : Himachal Bureau

May 16, 2026 11:41 a.m. 1445

अमेरिका और चीन के बीच लगातार बढ़ते तनाव के बीच एक बार फिर सुरक्षा को लेकर बेहद सख्त कदम सामने आया है। हाल ही में चीन यात्रा के दौरान अमेरिकी अधिकारियों और प्रतिनिधिमंडल को दिए गए उपहारों और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों को अमेरिका ने अपने साथ ले जाने के बजाय वहीं नष्ट कर दिया। यह पूरी कार्रवाई अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा प्रोटोकॉल के तहत की गई, जिसने दुनियाभर में चर्चा तेज कर दी है।

जानकारी के अनुसार अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल जब अपनी यात्रा पूरी कर वापस लौट रहा था, तब एयरफोर्स वन पर सवार होने से पहले चीन से मिले सभी सामानों को अलग कर दिया गया। इनमें स्मृति चिन्ह, बैज, पिन, इलेक्ट्रॉनिक उपकरण और अन्य उपहार शामिल थे। इन सभी वस्तुओं को विशेष सुरक्षा प्रक्रिया के तहत कूड़ेदान में डाल दिया गया।

अमेरिकी सुरक्षा एजेंसियों को आशंका रहती है कि विदेशी देशों द्वारा दिए गए इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों या उपहारों में निगरानी यंत्र, ट्रैकिंग सिस्टम या अन्य तकनीकी उपकरण छिपाए जा सकते हैं। इसी वजह से वर्षों से अमेरिका ऐसे मामलों में बेहद सावधानी बरतता आया है। बताया जा रहा है कि अमेरिकी स्टाफ और प्रेस टीम को यात्रा के दौरान विशेष अस्थायी फोन दिए गए थे, जिन्हें केवल सीमित उपयोग के लिए तैयार किया गया था। इन फोनों का इस्तेमाल केवल आधिकारिक संपर्क के लिए किया गया ताकि किसी भी प्रकार की साइबर निगरानी से बचा जा सके।

सुरक्षा अधिकारियों ने यह भी सुनिश्चित किया कि विमान में कोई भी चीनी मूल का उपकरण, उपहार या इलेक्ट्रॉनिक सामग्री न पहुंचे। पूरी प्रक्रिया सार्वजनिक रूप से कैमरों के सामने की गई ताकि यह साफ संदेश दिया जा सके कि सुरक्षा मामलों में अमेरिका किसी भी तरह की ढिलाई नहीं बरतना चाहता।

विशेषज्ञों का कहना है कि अमेरिका लंबे समय से चीन और रूस जैसे देशों में यात्रा के दौरान इस प्रकार के सख्त नियम अपनाता रहा है। अमेरिकी एजेंसियों को डर रहता है कि संवेदनशील सूचनाओं तक पहुंच बनाने के लिए विदेशी उपकरणों में गुप्त तकनीक या मैलवेयर लगाए जा सकते हैं। यह घटना ऐसे समय सामने आई है जब दोनों देशों के बीच व्यापार, तकनीक और सुरक्षा को लेकर पहले से तनाव बना हुआ है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इस कदम को अमेरिका की कड़ी सुरक्षा नीति के रूप में देखा जा रहा है।

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