Author : Gopal Dutt Sharma
राजगढ़, सिरमौर। हिमाचल प्रदेश में गोवंश की सुरक्षा, सेवा और सम्मान को लेकर चलाए जा रहे अभियान को आगे बढ़ाने के उद्देश्य से वृंदावन स्थित मलूक पीठ के संत गोपेश कृष्ण दास सिरमौर जिले के राजगढ़ पहुंचे। यहां उन्होंने स्थानीय लोगों से गो सम्मान अभियान के तहत चलाए जा रहे हस्ताक्षर अभियान में बढ़-चढ़कर भाग लेने की अपील की। संत ने कहा कि गोवंश का संरक्षण केवल धार्मिक आस्था का विषय नहीं है, बल्कि इसका संबंध भारतीय संस्कृति, पर्यावरण संरक्षण, प्राकृतिक खेती और ग्रामीण अर्थव्यवस्था से भी जुड़ा हुआ है।
राजगढ़ में आयोजित संवाद के दौरान संत गोपेश कृष्ण दास ने अभियान की जानकारी साझा करते हुए बताया कि देश के विभिन्न हिस्सों में इस मुहिम को समर्थन मिल रहा है। उनके अनुसार, अब तक देशभर में करीब 21 करोड़ हस्ताक्षर एकत्र किए जा चुके हैं। अभियान के आयोजकों ने कुल 51 करोड़ हस्ताक्षर जुटाने का लक्ष्य निर्धारित किया है। उन्होंने हिमाचल प्रदेश के लोगों से भी इस पहल में अपनी भागीदारी सुनिश्चित करने का आग्रह किया। संत ने कहा कि अधिक से अधिक लोगों के जुड़ने से गोवंश की सुरक्षा और संरक्षण से संबंधित मांगों को व्यापक स्तर पर सरकार के सामने रखा जा सकेगा।
अभियान के अगले चरण के तहत 17 दिसंबर को राजधानी शिमला में शांतिपूर्ण कार्यक्रम आयोजित करने की योजना बनाई गई है। इस दौरान सरकार के समक्ष गोसंरक्षण से जुड़ी तीन प्रमुख मांगें रखी जाएंगी। इनमें केंद्र सरकार के स्तर पर गोसेवा मंत्रालय का गठन करना, गोवंश की सुरक्षा के लिए प्रभावी केंद्रीय कानून बनाना और गोचर भूमि को अतिक्रमण से मुक्त करवाना शामिल है। अभियान से जुड़े लोगों का मानना है कि इन मांगों पर नीतिगत स्तर पर ध्यान दिए जाने से गोवंश की देखभाल और सुरक्षा के लिए बेहतर व्यवस्थाएं विकसित की जा सकती हैं।
संत गोपेश कृष्ण दास ने कहा कि भारतीय परंपरा में गोवंश का विशेष महत्व रहा है। ग्रामीण जीवन, कृषि व्यवस्था और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण में भी इसकी महत्वपूर्ण भूमिका मानी जाती है। उन्होंने गोसेवा को केवल धार्मिक गतिविधि तक सीमित न रखते हुए इसे पर्यावरण और ग्रामीण जीवन से जुड़ा व्यापक विषय बताया। उनके अनुसार, प्राकृतिक खेती को प्रोत्साहित करने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए भी गोवंश का संरक्षण महत्वपूर्ण है।
राजगढ़ पहुंचकर संत ने प्रदेशवासियों से हस्ताक्षर अभियान में सहयोग देने और गोवंश के प्रति सेवा एवं संवेदनशीलता का भाव बनाए रखने का आह्वान किया। इस पहल के माध्यम से अभियान से जुड़े लोग गोवंश की सुरक्षा, गोचर भूमि के संरक्षण और गोसेवा से संबंधित मांगों को व्यापक जनसमर्थन दिलाने का प्रयास कर रहे हैं। अब 17 दिसंबर को शिमला में प्रस्तावित कार्यक्रम को लेकर अभियान से जुड़े लोगों की नजरें आगे की तैयारियों पर रहेंगी।
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