हिमाचल होली 2026: होलिका दहन 2 मार्च को और रंगोत्सव 4 मार्च को आयोजित
हिमाचल होली 2026: होलिका दहन 2 मार्च को और रंगोत्सव 4 मार्च को आयोजित

Post by : Ram Chandar

March 2, 2026 noon 1403

सोलन: हिमाचल प्रदेश देशभर में इस वर्ष होली 2026 का उत्सव 4 मार्च को धूमधाम और उल्लास के साथ मनाया जाएगा। होली के रंगों से पहले परंपरागत होलिका दहन का आयोजन 2 मार्च को होगा। इस वर्ष होलिका दहन का शुभ मुहूर्त सोमवार शाम 6:22 बजे से रात्रि 8:53 बजे तक निर्धारित किया गया है।

गंज बाजार स्थित राधा-कृष्ण मंदिर में दो मार्च को शाम 7:00 बजे होलिका दहन का कार्यक्रम होगा। इस अवसर पर होलिका और प्रह्लाद के प्रतीकात्मक पुतले रखे जाएंगे। पूजन और धार्मिक अनुष्ठान के बाद परंपरा अनुसार प्रह्लाद का पुतला हटाकर होलिका का दहन किया जाएगा। मंदिर प्रशासन ने बताया कि यह पर्व परंपरागत रीति-रिवाजों और धार्मिक अनुशासन के साथ मनाया जाएगा।

मंदिर में आयोजित कार्यक्रम में सनातन धर्म सभा के प्रधान अजय सूद, सचिव धर्म पॉल पूरी और अन्य सदस्य उपस्थित रहेंगे। सभा के प्रचार मंत्री सुमन पॉल दत्ता ने बताया कि एसडी विद्यालय में पहली से पांचवीं कक्षा के विद्यार्थियों को सभा प्रबंधन की ओर से निशुल्क किताबें वितरित की जाएंगी। इस पहल से बच्चों में शिक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ाने में मदद मिलेगी।

इस वर्ष होली के तुरंत बाद, 3 मार्च को साल का पहला चंद्रग्रहण लग रहा है। भारतीय समयानुसार यह ग्रहण दोपहर 3:20 बजे से शाम 6:46 बजे तक रहेगा। ग्रहण से लगभग 9 घंटे पहले सुबह 6:20 बजे सूतक काल शुरू होगा, जिसमें सभी मांगलिक कार्य वर्जित होंगे। यह चंद्रग्रहण सिंह राशि और पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्र में स्थित होगा और पूरे भारत में दिखाई देगा।

गंज बाजार के राधा-कृष्ण मंदिर के पंडित उमेश नौटियाल ने बताया कि सूतक काल के दौरान मंदिरों के कपाट बंद कर दिए जाएंगे। इस समय पूजा, हवन, नए काम की शुरुआत या भोजन करना वर्जित रहेगा। इस दौरान घर में जल, दूध, घी, तेल, अचार और शहद में तुलसी और कुशा डालकर शुभ कार्य सुनिश्चित किए जा सकते हैं।

हिमाचल प्रदेश में होली 2026 की तैयारियों में धार्मिक, सांस्कृतिक और सामाजिक गतिविधियों का भी समावेश किया गया है। मंदिरों, विद्यालयों और स्थानीय समाज संगठनों के सहयोग से बच्चों और युवाओं के लिए शिक्षाप्रद और सांस्कृतिक गतिविधियां आयोजित की जा रही हैं। होली के इस अवसर पर लोग पारंपरिक गीत, नृत्य, रंग और गुलाल का आनंद लेंगे।

इस प्रकार, हिमाचल प्रदेश में होली न केवल रंगों का पर्व है, बल्कि यह धार्मिक जागरूकता, शिक्षा और सामाजिक सहभागिता का भी प्रतीक बनती जा रही है। इस वर्ष होली के साथ-साथ चंद्रग्रहण का मिलन पर्व के महत्व को और बढ़ा देता है, और लोगों को शुभ कार्यों में सावधानी बरतने की सीख देता है।

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