Post by : Ram Chandar
सोलन: देशभर में दवाओं की गुणवत्ता को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (सीडीएससीओ) द्वारा जनवरी 2026 के लिए जारी ड्रग अलर्ट के अनुसार, 218 दवाओं, कफ सिरप और इंजेक्शन के सैंपल गुणवत्ता मानकों पर खरे नहीं उतरे। इन असफल सैंपलों में हिमाचल प्रदेश में निर्मित दवाएं भी शामिल हैं।
रिपोर्ट के अनुसार, देशभर में कफ सिरप के 58 सैंपल जांच में फेल पाए गए, जिनमें से 16 सैंपल हिमाचल प्रदेश में निर्मित थे। इसके अलावा हृदय रोग, मिर्गी, उच्च रक्तचाप, मधुमेह और अन्य गंभीर बीमारियों के उपचार में उपयोग होने वाली कई दवाएं भी गुणवत्ता परीक्षण में असफल रही हैं।
सीडीएससीओ की रिपोर्ट में बताया गया है कि कुल 215 दवाओं के सैंपल गुणवत्ता मानकों पर खरे नहीं उतरे। इनमें हिमाचल प्रदेश के 71, उत्तराखंड के 28, गुजरात के 23, मध्य प्रदेश के 15, महाराष्ट्र के 13, तमिलनाडु के 11, राजस्थान के 10 और हरियाणा के 9 सैंपल शामिल हैं। इसके अतिरिक्त तेलंगाना के 6, पंजाब, उत्तर प्रदेश और पुडुचेरी के 5-5, सिक्किम और बिहार के 3-3, पश्चिम बंगाल, ओडिशा और कर्नाटक के 2-2 तथा केरल और दिल्ली के एक-एक सैंपल भी फेल पाए गए हैं। रिपोर्ट में तीन दवाओं को नकली भी घोषित किया गया है।
गुणवत्ता परीक्षण में असफल पाई गई प्रमुख दवाओं में मिर्गी के उपचार में उपयोग होने वाली फेनिटॉइन टैबलेट, डिप्रेशन और माइग्रेन के इलाज की अमिट्रिप्टिलाइन, कैंसर उपचार में प्रयुक्त बुप्रेनॉर्फिन इंजेक्शन, कोलेस्ट्रॉल नियंत्रित करने की अटोरवास्टेटिन तथा हृदय में रक्त के थक्के बनने से रोकने वाली क्लोपिडोग्रेल शामिल हैं।
इसके अलावा कुछ कॉस्मेटिक उत्पाद जैसे फेस पाउडर भी जांच में फेल पाए गए हैं। परीक्षण के दौरान इनमें हैवी मेटल और लेड की मात्रा निर्धारित सीमा से अधिक पाई गई, जो स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो सकती है।
गौरतलब है कि मध्य प्रदेश में पिछले वर्ष जहरीला कफ सिरप पीने से 20 से अधिक बच्चों की मौत के बाद देशभर में दवाओं की निगरानी और कड़ी कर दी गई है। इसके बाद विभिन्न राज्यों में दवा निर्माण इकाइयों की सख्त जांच की जा रही है।
हिमाचल प्रदेश के राज्य दवा नियंत्रक डॉ. मनीष कपूर ने बताया कि प्रदेश में दवा निर्माण इकाइयों का लगातार निरीक्षण किया जा रहा है। गुणवत्ता मानकों पर खरे नहीं उतरने वाले उद्योगों को नोटिस जारी किए गए हैं। जोखिम आधारित निरीक्षण (रिस्क बेस्ड इंस्पेक्शन) के तहत कई इकाइयों को उत्पादन बंद करने के निर्देश भी दिए गए हैं। साथ ही, ड्रग अलर्ट में शामिल असफल बैचों को बाजार से वापस मंगाने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि दवा निर्माण में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी और मरीजों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है।
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