पझौता के सरकारी स्कूलों में स्टाफ संकट, एक शिक्षक पर कई जिम्मेदारियां
पझौता के सरकारी स्कूलों में स्टाफ संकट, एक शिक्षक पर कई जिम्मेदारियां

Author : Gopal Dutt Sharma

July 18, 2026 1:23 p.m. 118

सिरमौर जिले की उपतहसील पझौता के अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायत जदोल-टपरोली के सरकारी विद्यालय इन दिनों शिक्षकों और गैर-शिक्षण कर्मचारियों की भारी कमी से जूझ रहे हैं। वर्षों से कई महत्वपूर्ण पद खाली होने के कारण शिक्षा व्यवस्था प्रभावित हो रही है। स्थिति यह है कि एक ही शिक्षक को कई विषयों की पढ़ाई कराने के साथ-साथ विद्यालय का प्रशासनिक कार्य भी संभालना पड़ रहा है। स्थानीय जनप्रतिनिधियों, अभिभावकों और ग्रामीणों ने इस स्थिति पर चिंता जताते हुए सरकार से जल्द रिक्त पद भरने की मांग की है। सरकारी स्कूलों में स्टाफ की कमी अब विद्यार्थियों के भविष्य के लिए बड़ी चुनौती बनती जा रही है।

वर्षों से खाली हैं कई महत्वपूर्ण पद

स्थानीय लोगों के अनुसार राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय में प्रधानाचार्य का पद लंबे समय से रिक्त है। इसके अलावा वाणिज्य, अर्थशास्त्र, गणित, कला वर्ग, शारीरिक शिक्षा और अन्य विषयों के शिक्षकों के कई पद भी खाली पड़े हैं। केवल शिक्षकीय पद ही नहीं, बल्कि कार्यालय अधीक्षक, सहायक अधीक्षक, लिपिक और अन्य कर्मचारियों के पद भी लंबे समय से नहीं भरे गए हैं। इन पदों के खाली रहने के कारण उपलब्ध शिक्षकों पर अतिरिक्त जिम्मेदारियों का बोझ बढ़ गया है। उन्हें नियमित पढ़ाई के साथ-साथ विद्यालय के प्रशासनिक कार्य भी देखने पड़ रहे हैं। शिक्षक भर्ती की मांग लंबे समय से उठाई जा रही है, लेकिन अभी तक स्थिति में अपेक्षित सुधार नहीं हुआ है।

एक शिक्षक संभाल रहा कई विषयों की जिम्मेदारी

विद्यालय में कुछ विषयों के शिक्षक उपलब्ध नहीं होने के कारण दूसरे विषयों के शिक्षकों को अतिरिक्त कक्षाएं लेनी पड़ रही हैं। इससे विद्यार्थियों की नियमित पढ़ाई प्रभावित हो रही है और शिक्षकों का कार्यभार भी लगातार बढ़ता जा रहा है। शिक्षकों का कहना है कि सीमित संसाधनों और कम स्टाफ के बावजूद वे पूरी निष्ठा से अपने दायित्व निभा रहे हैं, लेकिन लंबे समय तक एक व्यक्ति कई लोगों का कार्य नहीं कर सकता। स्कूल शिक्षा की गुणवत्ता बनाए रखने के लिए पर्याप्त स्टाफ की उपलब्धता बेहद आवश्यक है।

प्राथमिक विद्यालयों में भी यही स्थिति

केवल वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय ही नहीं, बल्कि क्षेत्र के प्राथमिक विद्यालय भी स्टाफ की कमी से प्रभावित हैं। कई स्कूल ऐसे हैं जहां एक ही शिक्षक प्री-प्राइमरी से लेकर पांचवीं कक्षा तक के विद्यार्थियों की पढ़ाई संभाल रहा है। इससे गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देना कठिन होता जा रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि बच्चों की संख्या लगातार बढ़ रही है, लेकिन शिक्षकों की नियुक्तियां नहीं होने से शिक्षा व्यवस्था कमजोर पड़ रही है। कई स्थानों पर स्कूल प्रबंधन समितियों को अपने स्तर पर अस्थायी व्यवस्था करनी पड़ रही है। विद्यार्थी इस पूरी स्थिति का सबसे अधिक असर झेल रहे हैं।

जनप्रतिनिधियों और ग्रामीणों ने उठाई मांग

स्थानीय पंचायत प्रतिनिधियों और समाजसेवियों ने सरकार से मांग की है कि शिक्षा विभाग तत्काल रिक्त पदों को भरने की प्रक्रिया शुरू करे। उनका कहना है कि ग्रामीण क्षेत्रों के बच्चों को भी गुणवत्तापूर्ण शिक्षा का समान अधिकार मिलना चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि समय रहते शिक्षकों और कर्मचारियों की नियुक्ति नहीं की गई तो विद्यार्थियों की पढ़ाई, परीक्षा परिणाम और भविष्य पर इसका गंभीर प्रभाव पड़ सकता है। शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए केवल योजनाएं बनाना पर्याप्त नहीं, बल्कि विद्यालयों में पर्याप्त स्टाफ उपलब्ध कराना भी आवश्यक है।

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जल्द समाधान की उम्मीद

क्षेत्र के लोगों को उम्मीद है कि सरकार और शिक्षा विभाग इस गंभीर समस्या का शीघ्र समाधान करेंगे। उनका कहना है कि समय पर नियुक्तियां होने से शिक्षकों का कार्यभार कम होगा और विद्यार्थियों को भी बेहतर शैक्षणिक वातावरण मिल सकेगा। ग्रामीणों ने मांग की है कि रिक्त पदों को प्राथमिकता के आधार पर भरा जाए ताकि भविष्य में किसी भी छात्र की पढ़ाई प्रभावित न हो। शिक्षा विभाग से अपेक्षा की जा रही है कि वह इस मुद्दे पर जल्द प्रभावी कदम उठाकर क्षेत्र के विद्यालयों को पर्याप्त स्टाफ उपलब्ध कराए।

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