कोटखाई के शवाल में पारंपरिक मेले के दौरान दिखी हिमाचली संस्कृति की झलक
कोटखाई के शवाल में पारंपरिक मेले के दौरान दिखी हिमाचली संस्कृति की झलक

Post by : Himachal Bureau

May 11, 2026 11:51 a.m. 916

कोटखाई के शवाल क्षेत्र में आयोजित पारंपरिक वार्षिक मेले में इस वर्ष भी श्रद्धा, आस्था और सांस्कृतिक रंगों का अनोखा संगम देखने को मिला। हर साल की तरह इस बार भी बड़ी संख्या में स्थानीय लोग और आसपास के क्षेत्रों से श्रद्धालु मेले में शामिल होने पहुंचे। मेले के दौरान पूरे क्षेत्र में भक्तिमय माहौल बना रहा और लोगों ने पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ अपने कुल देवी-देवताओं का भव्य स्वागत किया। मेले में मां दुर्गा, माता काली, भगवान नरसिंह नारायण और अन्य देवी-देवताओं की पवित्र पालकियों के पहुंचते ही वातावरण पूरी तरह धार्मिक रंग में रंग गया।

मेले में पारंपरिक वाद्य यंत्रों की मधुर धुनों के बीच देवी-देवताओं की पालकियां पूरे सम्मान और श्रद्धा के साथ निकाली गईं। श्रद्धालुओं ने फूल-मालाओं और पारंपरिक विधि-विधान के साथ देवी-देवताओं का स्वागत किया। पालकियों के साथ चल रहे श्रद्धालुओं में भारी उत्साह देखने को मिला। महिलाएं, बुजुर्ग और युवा पारंपरिक वेशभूषा में मेले में शामिल हुए और धार्मिक परंपराओं को निभाते नजर आए। देव नृत्य ने मेले की रौनक को और अधिक बढ़ा दिया। देव नृत्य के दौरान श्रद्धालुओं ने ढोल-नगाड़ों और रणसिंघों की धुनों पर पारंपरिक अंदाज में नृत्य कर देव संस्कृति की झलक प्रस्तुत की।

स्थानीय लोगों का कहना है कि यह मेला केवल धार्मिक आयोजन नहीं बल्कि पहाड़ी संस्कृति और आपसी भाईचारे का भी बड़ा प्रतीक है। मेले के माध्यम से पुरानी परंपराओं को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का प्रयास किया जाता है। ग्रामीण क्षेत्रों से पहुंचे लोगों ने भी मेले में बढ़-चढ़कर भाग लिया और देव संस्कृति से जुड़े कार्यक्रमों का आनंद लिया। मेले में पारंपरिक खानपान और स्थानीय उत्पादों की दुकानों पर भी लोगों की अच्छी भीड़ देखने को मिली। पूरे क्षेत्र में उत्सव जैसा माहौल बना रहा।

मेले में आए श्रद्धालुओं ने कुल देवी-देवताओं के दर्शन कर सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना की। मंदिर परिसर और मेले के आयोजन स्थल को रंग-बिरंगी सजावट से आकर्षक बनाया गया था। बच्चों और युवाओं में भी मेले को लेकर काफी उत्साह देखने को मिला। स्थानीय कलाकारों ने भी सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के माध्यम से लोगों का मनोरंजन किया। मेले के हर आयोजन में हिमाचली संस्कृति और पारंपरिक जीवनशैली की झलक साफ दिखाई दी।

प्रशासन और मेला समिति की ओर से श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए विशेष व्यवस्थाएं की गई थीं। सुरक्षा, साफ-सफाई और यातायात को लेकर भी उचित इंतजाम किए गए। लोगों ने शांतिपूर्ण माहौल में मेले का आनंद लिया और देव परंपराओं के प्रति अपनी आस्था व्यक्त की। श्रद्धालुओं का कहना है कि ऐसे मेले हिमाचल की समृद्ध संस्कृति और परंपराओं को जीवित रखने में अहम भूमिका निभाते हैं।

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