Post by : Ram Chandar
मंडी (बरोट) डॉक्टरों की भारी कमी से स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित, स्थानीय लोगों में चिंता मंडी जिले के बरोट में स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) इस समय गंभीर संकट का सामना कर रहा है। चौहारघाटी और छोटा भंगाल क्षेत्र की करीब 35 हजार की आबादी को चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराने वाला यह अस्पताल पिछले एक सप्ताह से केवल एक डॉक्टर के भरोसे संचालित हो रहा है। इससे स्थानीय लोगों में चिंता और रोष दोनों बढ़ गए हैं।
जानकारी के अनुसार, सीएचसी बरोट में कुल पांच डॉक्टरों के पद स्वीकृत हैं, लेकिन वर्तमान में केवल एक महिला डॉक्टर ही यहां सेवाएं दे रही हैं। एक सप्ताह पहले अस्पताल में तैनात दो डॉक्टर उच्च शिक्षा (पीजी) के लिए चले गए, जिससे अस्पताल में डॉक्टरों की संख्या और घट गई। इस समय मौजूदा महिला डॉक्टर को प्रतिदिन 60 से 70 मरीजों की ओपीडी संभालनी पड़ रही है। बढ़ते कार्यभार और भारी मरीज संख्या के कारण स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता पर असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है।
स्थानीय निवासी कहते हैं कि यदि जल्द ही नए डॉक्टरों की नियुक्ति नहीं हुई, तो स्वास्थ्य सेवाएं और अधिक प्रभावित हो सकती हैं। उन्होंने सरकार और स्वास्थ्य विभाग से आग्रह किया है कि बरोट जैसे दुर्गम क्षेत्र की संवेदनशीलता को ध्यान में रखते हुए तत्काल चिकित्सकों की तैनाती की जाए। छोटे भंगाल की आठ पंचायतों सहित कुल 20 पंचायतों के लिए यह अस्पताल एकमात्र केंद्र है, जहां 24 घंटे आपातकालीन सेवाएं उपलब्ध हैं।
स्थानीय लोग बताते हैं कि अस्पताल में डॉक्टरों की कमी के कारण कई बार मरीजों को निजी अस्पतालों का सहारा लेना पड़ता है, जिससे उनके आर्थिक बोझ में इजाफा होता है। स्वास्थ्य केंद्र में मरीजों की लंबी कतारें और लंबे इंतजार की समस्या ने स्थानीय जनता को और चिंतित कर दिया है।
उधर, खंड चिकित्सा अधिकारी (बीएमओ) डॉ. संजय ने कहा कि दो डॉक्टर पीजी के लिए जा चुके हैं और मौजूदा स्थिति की जानकारी उच्च अधिकारियों को लिखित रूप में भेज दी गई है। उन्होंने आश्वासन दिया कि जैसे ही नए डॉक्टर उपलब्ध होंगे, उन्हें प्राथमिकता के आधार पर बरोट में तैनात किया जाएगा। उन्होंने स्थानीय लोगों से संयम बनाए रखने का अनुरोध किया और कहा कि प्रशासन पूरी गंभीरता के साथ इस समस्या का समाधान सुनिश्चित करेगा।
स्थानीय बागवान और समाजसेवी भी इस मुद्दे को लेकर सक्रिय हैं। उनका कहना है कि बरोट सीएचसी केवल स्वास्थ्य सेवाओं का केंद्र नहीं है, बल्कि यह क्षेत्रीय जीवन रेखा की तरह काम करता है। इसके संचालन में किसी भी प्रकार की लापरवाही दूरगामी प्रभाव डाल सकती है। इसलिए सरकार और स्वास्थ्य विभाग से मांग है कि इस दुर्गम और संवेदनशील क्षेत्र में जल्द से जल्द पर्याप्त चिकित्सकों की नियुक्ति कर स्वास्थ्य सेवाओं को दुरुस्त किया जाए।
यह स्थिति हिमाचल प्रदेश के ग्रामीण और दुर्गम क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की वास्तविक चुनौती को उजागर करती है। स्थानीय लोग चाहते हैं कि प्रशासन इस मामले को प्राथमिकता के आधार पर हल करे ताकि नागरिकों को समय पर और गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध हो सकें।
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