कुल्लू में गैस संकट, व्यावसायिक सिलेंडरों की कमी से बंद हुए सैकड़ों ढाबे
कुल्लू में गैस संकट, व्यावसायिक सिलेंडरों की कमी से बंद हुए सैकड़ों ढाबे

Post by : Himachal Bureau

March 16, 2026 11:47 a.m. 2811

ईरान, अमेरिका और इजरायल के बीच बढ़ते अंतरराष्ट्रीय तनाव की तपिश अब हिमाचल प्रदेश के पर्यटन केंद्र कुल्लू में भी महसूस की जाने लगी है। वैश्विक अस्थिरता के कारण ईंधन आपूर्ति श्रृंखला प्रभावित होने से जिले में व्यावसायिक गैस सिलेंडरों  की भारी किल्लत पैदा हो गई है। इस संकट का सीधा असर स्थानीय कारोबार पर पड़ा है, जिसके चलते रविवार को जिले भर में सैकड़ों ढाबों और रेस्तरां पर ताले लटके रहे। अकेले कुल्लू शहर में ही लगभग 100 के करीब ढाबे बंद रहे, जो आमतौर पर रविवार की छुट्टी के दिन पर्यटकों की भारी भीड़ के कारण खुले रहते थे। होटल और ढाबा संचालकों के लिए व्यवसाय चलाना अब एक बड़ी चुनौती बन गया है, क्योंकि सिलेंडरों की नियमित सप्लाई न होने से उनका दैनिक कामकाज पूरी तरह ठप होने की कगार पर पहुँच गया है।

हालांकि, स्थिति को देखते हुए खाद्य आपूर्ति विभाग ने तत्परता दिखाते हुए रविवार को कुल्लू शहर के ढाबा संचालकों को 46 व्यावसायिक सिलेंडर वितरित किए, जिससे आगामी दो-तीन दिनों के लिए अस्थायी राहत मिलने की उम्मीद है। विभाग ने जानकारी दी है कि ये सिलेंडर लाहौल से मंगवाई गई 400 व्यावसायिक सिलेंडरों की एक विशेष खेप से आवंटित किए गए हैं। इसके बावजूद, कारोबारियों की चिंताएं कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। आपूर्ति में निरंतरता न होने के कारण कई छोटे और मध्यम वर्गीय ढाबा संचालक अपना व्यवसाय बंद करने की योजना बना रहे हैं। मौजूदा हालात से निपटने के लिए कई संचालकों ने मजबूरन 'जुगाड़' का सहारा लिया है और वे गैस के स्थान पर स्टोव, बिजली के हीटर और इंडक्शन चूल्हों की मदद से किसी तरह काम चला रहे हैं।

स्थानीय ढाबा संचालकों, जिनमें रंगारंग सिंह, शेर सिंह, तेजा सिंह, धर्म दास, निका राम और दिले राम शामिल हैं, ने अपना दर्द बयां करते हुए बताया कि व्यावसायिक सिलेंडरों की कमी के कारण उन्हें एहतियातन अपने प्रतिष्ठान बंद रखने पड़े। उन्होंने बताया कि सोमवार से वे काम तो शुरू करेंगे, लेकिन उनके पास उपलब्ध स्टॉक केवल दो से तीन दिनों तक ही चल पाएगा। सिलेंडरों की कमी को देखते हुए कई कारोबारियों ने 5,000 से 10,000 रुपये तक का अतिरिक्त निवेश कर नए इंडक्शन और हीटर खरीदे हैं। हालांकि, उनका कहना है कि गैस चूल्हों के मुकाबले बिजली के उपकरणों पर खाना बनाने की गति बहुत धीमी होती है, जिससे न केवल ग्राहकों को लंबा इंतजार करना पड़ता है, बल्कि ऑर्डर तैयार करने में भी काफी समय बर्बाद होता है।

इस पूरे मामले पर जिला नियंत्रक खाद्य आपूर्ति विभाग कुल्लू, शिव राम राही ने स्पष्ट किया है कि विभाग स्थिति पर पूरी नजर बनाए हुए है। उन्होंने बताया कि लाहौल से 400 व्यावसायिक सिलेंडरों की खेप कुल्लू-मनाली पहुंचाई गई है और मांग के अनुसार वितरण जारी है। उन्होंने यह भी आश्वस्त किया कि जिले में घरेलू गैस सिलेंडरों की कोई कमी नहीं है और आम उपभोक्ताओं को उनके घर-द्वार पर निरंतर डिलीवरी दी जा रही है। प्रशासन की ओर से कोशिशें जारी हैं, लेकिन अंतरराष्ट्रीय बाजार और युद्ध जैसी स्थितियों के चलते व्यावसायिक गैस की किल्लत का यह संकट फिलहाल पर्यटन और खान-पान उद्योग के लिए गले की फांस बना हुआ है।

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