Post by : Himachal Bureau
हिमाचल प्रदेश सरकार ने नशा तस्करी के विरुद्ध अपनी 'जीरो टॉलरेंस' नीति को कड़ाई से लागू करते हुए एक बड़ी दंडात्मक कार्रवाई की है। कुल्लू में तैनात स्पेशल टास्क फोर्स के चार पुलिस जवानों को लगभग एक करोड़ रुपये की लाइसर्जिक एसिड डाइथाइलमाइड तस्करी मामले में संलिप्त पाए जाने पर तत्काल प्रभाव से सेवा से बर्खास्त कर दिया गया है। बर्खास्त किए गए जवानों में कॉन्स्टेबल नितेश, कॉन्स्टेबल अशोक, हेड कॉन्स्टेबल राजेश कुमार और हेड कॉन्स्टेबल समीर कुमार शामिल हैं। ये चारों जवान उस समय सीआईडी के तहत एसटीएफ कुल्लू में अपनी सेवाएँ दे रहे थे। इनके विरुद्ध यह कठोर अनुशासनात्मक कार्रवाई भारतीय संविधान के अनुच्छेद 311(2)(बी) के तहत गंभीर कदाचार और विश्वासघात को आधार मानकर की गई है।
तस्करी के नेटवर्क का ऐसे हुआ पर्दाफाश
जांच में यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ कि इन पुलिसकर्मियों ने कर्तव्य निष्ठा को ताक पर रखकर तस्करों के साथ साठगांठ की थी। मुख्य आरोपी संदीप शर्मा से पूछताछ में पता चला कि 8 मार्च को एक ड्रग सप्लायर नेविल हैरिसन भारी मात्रा में नशीले पदार्थ लेकर भुंतर पहुंचा था। हालांकि इन जवानों ने उसे पकड़ा, लेकिन विभाग को इसकी सूचना देने या मामला दर्ज करने के बजाय उन्होंने नशीले पदार्थ जब्त कर अपने पास रख लिए। साक्ष्यों के अनुसार, जवानों ने बरामद 1450 LSD स्ट्रिप्स में से 616 स्ट्रिप्स संदीप शर्मा को बेच दीं। न्यू शिमला पुलिस की जांच में सीसीटीवी फुटेज, कॉल डिटेल रिकॉर्ड और लोकेशन डेटा से स्पष्ट हुआ कि उस दिन इन जवानों की उपस्थिति घटनास्थल पर थी, जबकि आधिकारिक रिकॉर्ड में किसी भी ऑपरेशन की एंट्री नहीं की गई थी।
नशे के खिलाफ कड़ा अभियान और अब तक की कार्रवाई
प्रदेश पुलिस महानिदेशक अशोक तिवारी ने स्पष्ट संदेश दिया है कि कानून से ऊपर कोई नहीं है, चाहे वह विभाग का अपना कर्मचारी ही क्यों न हो। हिमाचल प्रदेश में अब तक नशा तस्करी में शामिल 24 सरकारी कर्मचारियों को बर्खास्त किया जा चुका है, जिनमें 15 पुलिसकर्मी शामिल हैं। इसके अतिरिक्त, लगभग 109 अन्य सरकारी कर्मचारियों पर भी मादक पदार्थों से संबंधित मामले दर्ज हैं। पिछले छह महीनों में पुलिस ने नशा तस्करों के आर्थिक तंत्र को तोड़ने के लिए 'पिट-एनडीपीएस' एक्ट का कड़ाई से उपयोग किया है, जिसके तहत 96 तस्करों को हिरासत में लिया गया और उनकी चल-अचल संपत्तियां जब्त की जा रही हैं।
लाइसर्जिक एसिड डाइथाइलमाइड एक अत्यंत शक्तिशाली सिंथेटिक हैलुसिनोजेनिक ड्रग है, जो रंगहीन और गंधहीन होती है। इसे आमतौर पर छोटे कागज के टुकड़ों पर बेचकर सेवन किया जाता है। यह सीधे मस्तिष्क के सेरोटोनिन रिसेप्टर्स पर हमला करती है, जिससे व्यक्ति की सोच और व्यवहार में खतरनाक बदलाव आते हैं। इसकी एक स्ट्रिप की कीमत बाजार में करीब 10 हजार रुपये है। इस अवैध ड्रग की तस्करी के मामले में दोषी पाए जाने पर 20 वर्ष तक की कठोर जेल की सजा का प्रावधान है। वर्तमान में गिरफ्तार चारों जवान पुलिस रिमांड पर हैं और उन्हें जल्द ही न्यायालय में पेश कर आगे की जांच बढ़ाई जाएगी।
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