Author : Rajesh Vyas
शाहपुर। पूर्व मंत्री और शाहपुर से पांच बार विधायक रहे मेजर विजय सिंह मनकोटिया की स्मृति और सार्वजनिक योगदान को स्थायी रूप से सम्मानित करने की मांग उठी है। शाहपुर के स्थानीय निवासी श्रेय अवस्थी ने हिमाचल प्रदेश सरकार से राजकीय महाविद्यालय शाहपुर का नाम मेजर विजय सिंह मनकोटिया के नाम पर रखने और कांगड़ा जिले में उनकी आदमकद प्रतिमा स्थापित करने की मांग की है।
श्रेय अवस्थी ने कहा कि राजकीय महाविद्यालय शाहपुर का नाम “मेजर विजय सिंह मनकोटिया राजकीय महाविद्यालय” किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि शाहपुर में महाविद्यालय की स्थापना के लिए स्थानीय किसानों को जमीन देने के लिए तैयार करवाने में भी मेजर मनकोटिया की भूमिका रही थी। उनके अनुसार, कॉलेज का नामकरण उनके क्षेत्र के लिए किए गए कार्यों और सार्वजनिक जीवन में उनके योगदान को याद रखने का एक स्थायी माध्यम हो सकता है।
मेजर विजय सिंह मनकोटिया ने भारतीय सेना में अधिकारी के रूप में सेवा की और वर्ष 1962, 1965 तथा 1971 के युद्धों में देश की सेवा की। सेना से सेवानिवृत्ति के बाद उन्होंने सक्रिय राजनीति में कदम रखा। वह शाहपुर विधानसभा क्षेत्र से पांच बार विधायक चुने गए। उपलब्ध चुनाव रिकॉर्ड के अनुसार उन्होंने 1982, 1985, 1990, 1993 और 2003 में शाहपुर सीट से जीत दर्ज की। वह हिमाचल प्रदेश सरकार में दो बार मंत्री भी रहे और पर्यटन, नागरिक उड्डयन तथा कानून जैसे विभागों की जिम्मेदारी संभाली।
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श्रेय अवस्थी ने कांगड़ा जिले में किसी प्रमुख और उपयुक्त स्थान पर मेजर विजय सिंह मनकोटिया की आदमकद प्रतिमा स्थापित करने की मांग भी रखी है। उन्होंने कहा कि इससे आने वाली पीढ़ियों को उनके सैन्य और सार्वजनिक जीवन के योगदान के बारे में जानकारी मिलेगी। उन्होंने कहा कि मेजर मनकोटिया का जीवन सेना की सेवा से लेकर शाहपुर की जनता के प्रतिनिधित्व तक विभिन्न क्षेत्रों से जुड़ा रहा। इसलिए उनकी स्मृति को स्थायी स्वरूप देने के लिए सरकारी स्तर पर निर्णय लिया जाना चाहिए।
श्रेय अवस्थी ने बताया कि मुख्यमंत्री कार्यालय से मुलाकात के लिए समय मांगा गया है। उन्होंने कहा कि जल्द ही शाहपुर का एक प्रतिनिधिमंडल मुख्यमंत्री से मुलाकात करेगा और राजकीय महाविद्यालय शाहपुर के नामकरण की घोषणा 15 दिनों के भीतर करने की मांग रखेगा। उन्होंने कहा कि सरकार के पास मेजर विजय सिंह मनकोटिया के योगदान को याद करने और उनकी स्मृति को स्थायी सम्मान देने का अवसर है।
श्रेय अवस्थी ने मेजर मनकोटिया के अंतिम संस्कार के दौरान राजकीय सम्मान को लेकर भी अपनी निराशा व्यक्त की। हालांकि, उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार उनके अंतिम संस्कार में कांगड़ा एसडीएम की मौजूदगी में गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया था और गोरखा रेजिमेंट की टुकड़ी ने भी अंतिम सम्मान दिया था। श्रेय अवस्थी ने कहा कि अब सरकार को उनकी स्मृति में ठोस कदम उठाने चाहिए। उन्होंने कहा कि केवल श्रद्धांजलि तक सीमित रहने के बजाय उनके योगदान को आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाने के लिए स्थायी पहल की जरूरत है।
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