डॉ. प्रदीप कुमार की बड़ी उपलब्धि, ग्वालियर कृषि विश्वविद्यालय में निदेशक पद पर नियुक्ति
डॉ. प्रदीप कुमार की बड़ी उपलब्धि, ग्वालियर कृषि विश्वविद्यालय में निदेशक पद पर नियुक्ति

Author : Rajesh Vyas

April 15, 2026 3:27 p.m. 204

चौधरी सरवण कुमार हिमाचल प्रदेश कृषि विश्वविद्यालय, पालमपुर के लिए यह गर्व का विषय है कि विश्वविद्यालय के मृदा विज्ञान विभाग के प्रधान वैज्ञानिक डॉ. प्रदीप कुमार को राजमाता विजयाराजे सिंधिया कृषि विश्वविद्यालय, ग्वालियर में निदेशक (शिक्षा एवं छात्र कल्याण) के महत्वपूर्ण पद पर नियुक्त किया गया है। इस उपलब्धि से पूरे विश्वविद्यालय परिवार में खुशी और सम्मान का माहौल है।

विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. अशोक कुमार पांडा ने डॉ. प्रदीप कुमार को इस नई जिम्मेदारी के लिए हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं दीं। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि डॉ. कुमार का लंबा शैक्षणिक अनुभव, शोध कार्य और प्रशासनिक क्षमता नए संस्थान में शिक्षा की गुणवत्ता और छात्र कल्याण को और अधिक सशक्त बनाएगी। मृदा विज्ञान विभागाध्यक्ष डॉ. राज पॉल शर्मा ने भी इस उपलब्धि पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए उन्हें उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं दीं और कहा कि यह पूरे विभाग और विश्वविद्यालय के लिए गौरव का क्षण है।

डॉ. प्रदीप कुमार एक प्रतिष्ठित मृदा वैज्ञानिक हैं, जिन्होंने वर्ष 1996 में इसी विश्वविद्यालय से मृदा रसायन एवं उर्वरता विषय में पीएच.डी. की उपाधि प्राप्त की थी। वे वर्ष 1998 से लगातार विश्वविद्यालय में सेवाएं दे रहे हैं और वर्तमान में प्रधान वैज्ञानिक के रूप में कार्यरत हैं। वर्ष 2022 से 2024 के दौरान उन्होंने एनएफएल-प्रोफेसर चेयर इन सॉइल साइंस जैसी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी भी निभाई, जिससे उनके शैक्षणिक योगदान की पुष्टि होती है।

लगभग तीन दशकों के अपने शिक्षण, अनुसंधान और प्रसार अनुभव में डॉ. कुमार ने मृदा विज्ञान के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। उन्होंने अनेक स्नातकोत्तर एवं पीएच.डी. छात्रों का मार्गदर्शन किया है तथा कई शोध परियोजनाओं का सफल संचालन किया है। उनके कार्यों ने कृषि शिक्षा और अनुसंधान को नई दिशा दी है।

डॉ. कुमार को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कई प्रतिष्ठित सम्मान प्राप्त हो चुके हैं, जिनमें आउटस्टैंडिंग साइंटिस्ट अवार्ड और डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम साइंटिस्ट अवार्ड प्रमुख हैं। उन्होंने अमेरिका और जर्मनी में प्रशिक्षण एवं शोध अनुभव भी प्राप्त किया है।

उन्होंने 120 से अधिक शोध लेख प्रकाशित किए हैं तथा कई पुस्तकों और वैज्ञानिक बुलेटिनों में योगदान दिया है। वे विभिन्न शैक्षणिक और प्रशासनिक समितियों में भी सक्रिय भूमिका निभाते रहे हैं। विश्वविद्यालय परिवार ने उनके उज्ज्वल भविष्य और नई जिम्मेदारी के सफल निर्वहन की कामना की है और इसे संस्थान के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया है।

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