हरनेड़ के बुजुर्ग दंपत्ति ने प्राकृतिक खेती से कम जमीन में उगाई बंपर आलू फसल
हरनेड़ के बुजुर्ग दंपत्ति ने प्राकृतिक खेती से कम जमीन में उगाई बंपर आलू फसल

Author : Rajneesh Kapil Hamirpur

April 17, 2026 12:44 p.m. 136

हमीरपुर जिले के निकटवर्ती गांव हरनेड़ से एक प्रेरणादायक कहानी सामने आई है, जहां एक बुजुर्ग दंपत्ति ने प्राकृतिक खेती को अपनाकर शानदार सफलता हासिल की है। इस दंपत्ति ने यह साबित कर दिया है कि अगर सही तकनीक और मेहनत हो, तो कम जमीन में भी बेहतर उत्पादन लिया जा सकता है। उनकी इस उपलब्धि ने न केवल स्थानीय किसानों का ध्यान आकर्षित किया है, बल्कि कृषि विशेषज्ञों को भी प्रभावित किया है।

गांव हरनेड़ के 76 वर्षीय तीर्थू देवी और उनके 83 वर्षीय पति रिखी राम शर्मा पिछले कई वर्षों से खेती कर रहे हैं। पहले वे पारंपरिक तरीके से गेहूं और मक्की की खेती करते थे, लेकिन उन्हें इस खेती से ज्यादा लाभ नहीं मिल रहा था। साथ ही, रासायनिक खाद और हाईब्रिड बीजों पर होने वाला खर्च भी लगातार बढ़ता जा रहा था, जिससे उनकी आमदनी पर असर पड़ रहा था।

करीब ढाई साल पहले उन्हें सरकारी योजना के माध्यम से प्राकृतिक खेती के बारे में जानकारी मिली। इसके बाद उन्होंने इस पद्धति को अपनाने का निर्णय लिया। कृषि विभाग के मार्गदर्शन में उन्होंने अपनी लगभग 15 कनाल भूमि पर विभिन्न फसलों की खेती शुरू की। अब वे गेहूं, मक्की के साथ-साथ कई तरह की सब्जियां और मसाले भी उगा रहे हैं, जिससे उनकी आय में सुधार देखने को मिला है।

हाल ही में उन्होंने केवल दो मरले के छोटे से खेत में आलू की खेती की, जिससे उन्हें लगभग 200 किलोग्राम उत्पादन प्राप्त हुआ। इतनी कम जमीन में इतनी अच्छी पैदावार ने सभी को चौंका दिया। उनके खेत में उगा आलू स्थानीय बाजार में आसानी से बिक गया और उन्हें अच्छा मुनाफा भी मिला। इस दंपत्ति की सफलता से गांव के अन्य किसान भी प्रेरित हो रहे हैं और वे भी धीरे-धीरे इस खेती की ओर कदम बढ़ा रहे हैं। यह पहल न केवल किसानों की आय बढ़ाने में मददगार साबित हो रही है, बल्कि पर्यावरण के लिए भी लाभदायक है।

आतमा परियोजना से जुड़े अधिकारियों के अनुसार, जिले में हजारों किसानों को इस योजना से जोड़ा गया है और बड़ी मात्रा में भूमि को इस खेती के अंतर्गत लाया गया है। किसानों को सरकार की ओर से आर्थिक सहायता भी प्रदान की जा रही है, जिससे वे इस पद्धति को आसानी से अपना सकें। हरनेड़ के इस बुजुर्ग दंपत्ति की मेहनत और लगन ने यह साबित कर दिया है कि उम्र केवल एक संख्या है। अगर इच्छाशक्ति मजबूत हो, तो किसी भी क्षेत्र में सफलता हासिल की जा सकती है। उनकी यह उपलब्धि अन्य किसानों के लिए एक प्रेरणा बन गई है।

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